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8 तरीके जिनसे शिशु के जन्म के बाद ज़िन्दगी खुशनुमा हो जाती है

8 तरीके जिनसे शिशु के जन्म के बाद ज़िन्दगी खुशनुमा हो जाती है

8 Apr 2022 | 1 min Read

Tinystep

Author | 2578 Articles

यकीनन आपको शिशु के जन्म लेने की बड़ी बेताबी रहती है। परन्तु जब उसका जन्म होता है तब आपकी दुनिया ही बदल जाती है। वे सभी भावनाएं जो आपने पहले कभी अनुभव न की हों वह आप महसूस करने लगती हैं। इस पोस्ट में हम आपको 8 चुनिंदा बातें बताएँगे जो शिशु के जन्म के बाद आपके जीवन को खुशहाल बनाती हैं।

1. शिशु आपको प्यार सिखाता है

यदि आप मज़ाकिया आवाज़ें निकालती हैं या फिर आप कुछ अजीबोगरीब करती हैं तो शिशु हँसने लगता है। उसकी मुस्कान से आपका दिन खिल उठता है तथा आपके बदन की थकान मिट जाती है। इसलिए उसे हंसाना आपकी आदत सा बन जाता है। मुस्कुराना, खिलखिलाना व प्यार-भरे ख्वाबों में डूबे रहना आपकी दिनचर्या सा बन जाता है।

2. आपको एक अपनेपन का एहसास मिलता है

शुरुवाती दिनों में आप अपनी नींद, बाहर खाने जाना को मिस करेंगी। पर बाद में शिशु की ज़िम्मेदारी आपको अच्छी लगेगी। आपको उसके बिना बाहर जाना अधूरा सा लगेगा। आप हमेशा उसकी देख-रेख में लीन रहती हैं। इस दुनिया में आपका कोई ख़ास है इसका ख्याल आपको पल-पल रहता है।

3. आप नए मित्र बनाने लगती हैं

बच्चे के जन्म के बाद आप चिकित्सक के पास जाँच के लिए जाएँगी। वहाँ आपको हम-उम्र महिलाएं मिलेंगी जो की आप की तरह अपने शिशु और खुद की जाँच करवा रहीं होंगी। इस तरह आप नए रिश्ते बनाएंगी जिससे आपका मन बहल जायेगा। साथ ही आते-जाते आपकी अपने आस-पड़ोस के लोगों से भी बात-चीत होगी।

4. आपके ह्रदय में अपार प्यार जागृत होता है

आपके ह्रदय में कितना प्यार भरा है इसका आभास आपको शिशु के जन्म पश्चात मालूम पड़ेगा। आप के बगल में रोता शिशु आपके अंदर गुस्सा नही बल्कि ममता जगायेगा। माँ बनने के बाद आपको अन्य माता-पिताओं का हाल पता चलता है। आप वे किन मुश्किलों से गुज़रते हैं इस बात को बेहतर रूप से समझ पाती हैं और उनसे हमदर्दी रखती हैं।

5. आप काम बेहतर रूप से करना शुरू कर देती हैं

याद हैं वो दिन जब आप दिन भर क्या किया ये सोचती थीं? शायद आप भुलक्कड़ हो जाती थीं। आप काम करने में आलस करती थीं। लेकिन बच्चे के जन्म के बाद आप समय ज़ाया नहीं करतीं। आप काम प्लान कर के करती हैं। इसके साथ ही हर छोटी बड़ी चीज़ को महत्त्व देती हैं। खुद की देखभाल के लिए भी आपको समय मिल जाता है।

6. ज़रूरी चीज़ों की समझ

आपको किन चीज़ों या लोगों को महत्व देना है इसकी समझ आ जाती है। आप पहले की तरह मामूली बातों जैसे की आपके कंगन की चमक, बाई को छुट्टी देना, पति से तोहफे माँगना, हफ्ते में 3-4 बार बाहर घूमने, मूवी देखने या डिनर/लंच करने जाना को कम कर देती हैं। साथ ही आपके प्रियजनों की सेहत और सलामती की दुवायें करती हैं। आप पति से ऑफिस से देर से आने पर क्रोध करने की बजाय कारण पूछती हैं। आप नये कपड़े व साज-श्रृंगार के सामान खरीदने में कम विश्वास रखती हैं। पहले की तुलना आप लेने से ज़्यादा देने में विश्वास रखती हैं।

7. आप में भावनात्मक परिपक्वता आती है

जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होता है वैसे-वैसे आपको खुद को जैसी हैं उस हाल में अपनाने की समझदारी आती है। आपके विचारों में परिपक्वता यानि मेचोरिटी आती है। आप के ख्याल और सोचने का ढंग बदलता है तथा आप खुल कर सोचती हैं। आपके अंदर धैर्य बढ़ेगा। आप बेहतर श्रोता भी बनेंगी। छोटी-छोटी बातों पर रूठना व चिढ़ जाना आपके स्वाभाव में कम हो जाता है। आप समस्या का कारण नही बल्कि हल ढूंढती हैं। अगर बात बिगड़ जाये तो आप उसे सुधारने का जिम्मा उठाती हैं।

8. आप परिवार के मायने समझती हैं

बच्चे के जन्म के साथ ही आप एक माँ को भी जन्म देती हैं। आप अपने माँ-बाप, शिशु तथा पति का ध्यान रखने लग जाती हैं। आप उनकी और इज़्ज़त करने लगती हैं। आप उनको उनकी परेशानियों से उभरने में मदद करती हैं। लोग आपको बहुत सारी सलाह देंगे। पर अब आप खुद निर्णय लेने के काबिल बन जाती हैं। इसके बावजूद आप महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने पति और माँ-बाप से परामर्श लेने में हिचकिचाती नहीं। आप सोच-समझकर विचार करती हैं। बात की गहरायी समझती हैं तथा सदैव आपको खुद से पहले दूसरों का ख्याल आता है। 

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