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ओमिक्रॉन के खतरों के बीच जब स्कूल खुलेंगे, जानिए तब किन चीजों का रखना होगा ध्यान

ओमिक्रॉन के खतरों के बीच जब स्कूल खुलेंगे, जानिए तब किन चीजों का रखना होगा ध्यान

20 Jan 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

देश भर में स्कूल खोलने की तैयारी चल रही है, इस खबर से घर में कैद बच्चे तो खुश हो रहे हैं, लेकिन माता-पिता का दिल डर से आशंकित है। वैसे तो बच्चों में कोरोना होने के मामले बहुत कम हैं, लेकिन फिर भी ओमिक्रॉन का खतरा भी सर पर लटक रहा है। इन हालातों में बच्चों को कोरोना के खतरे से बचाने के लिए क्या करना चाहिए, यह बात शायद आपकी नींद उड़ा रही होगी। चिंता मत कीजिए, हम कुछ ऐसे आसान टिप्स के बारे में बात करेंगे जो आपको कुछ हद तक स्ट्रेसफ्री कर सकते हैं।

अब बच्चों को इंटरनेट, कंप्यूटर, लैबटॉप, सेलफोन में सिमटी दुनिया से मुक्ति तो मिल रही है लेकिन माता-पिता के लिए उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से इस संक्रामक रोग से लड़ने के लिए तैयार करवाना भी जरूरी काम बन गया है। इसके लिए सबसे पहले उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत है यानि उनके इम्यूनिटी को स्ट्रॉंग करने की आवश्यकता है। तो चलिए सबसे पहले खान-पान पर नजर डालते हैं कि ओमिकॉन के खतरे से लड़ने के लिए बच्चों के खान-पान में किन चीजों को शामिल करना चाहिए और किनको नहीं।

 

बच्चों के इम्यूनिटी बूस्टर सुपरफूड-

  • विटामिन सी के स्रोत वाले फल- संतरा, नींबू, अमरूद जैसे फलों में विटामिन-सी के साथ-साथ एंटीऑक्सिडेंट भी होता है, जो बच्चों के इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं।
  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ- इनमें पालक, पत्तागोभी, केल, ब्रोक्ली, मटर आदि आते हैं, जिनमें कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए, सी और के होता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर ओमिक्रॉन के लक्षणों से लड़ने में मदद करता है।
  • हल्दी-दूध- बच्चों में हर दिन रात को सोते समय हल्दी दूध पीने की आदत डालें। हल्दी में करक्यूमिन, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सिडेंट, एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होता है, वह बीमारियों से लड़ने और शरीर को आंतरिक रूप से मजबूत करने में सहायता करता है।
  • गुनगुना गर्म पानी- रोजाना सुबह एक गिलास गुनगुना गर्म पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे शरीर को आंतरिक रूप से मजबूत होने और ऑमिक्रॉन के खतरों से बचने में भी मदद मिलती है।
  • दही- इसको बच्चों के रोजाना के डायट में शामिल करने की कोशिश कीजिए। इसमें जो गुड बैक्टीरिया होता है, वह पेट को स्वस्थ रखने में मदद करता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले पेट को सेहतमंद रखना जरूरी होता है।
  • दाल- दाल एक ऐसा खाद्य है, जिसमें प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और बच्चों को भी आसानी से खिलाया जा सकता है।

 

क्या न खाएं-

  • बाहर के स्ट्रीट फूड्स, स्पाइसी और पैकेज्ड तथा जंक फूड्स उन्हें खाने न दें।
  • कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम जितना कम हो सके खाने दें।
  • पेस्ट्रिज, कुकिज आदि से जितना हो सके उन्हें दूर रखें।

 

जीवनशैली में बदलाव-

  • दो साल तक घर में ऑनलाइन पढ़ाई चलने के कारण बच्चों की सोने और जागने की आदतें बिल्कुल ही अस्वास्थ्यकर हो गई हैं। देर रात तक पढ़ना और सुबह क्लास शुरू होने के ठीक पहले जागना। स्कूल जाने से पहले उन्हें सुबह जल्दी उठने की आदत डालें।
  • घर में कैद होकर पढ़ने के कारण बच्चे खेल-कूद, चलने-दौड़ने की आदतों से दूर हो गए हैं। फलस्वरूप स्कूल जाने पर वह जल्दी ही थक जाएंगे। इसलिए उन्हें एक्टिव बनाएं।
  • घर में ज्यादातर समय रहने के कारण बच्चों में विटामिन डी की कमी हो रही है, इससे बचने के लिए उनको कम से कम आधा घंटा ही सही धूप में जाने के लिए कहें।
  • शाम को पार्क या गार्डेन भेंजे ताकि साइकिलिंग, रेस, रस्सी कुदने जैसे खेल खेलकर वह फिजिकली फिट रहें। लेकिन उन्हें मास्क और सैनिटाइजर साथ में देना न भूलें।
  • रोजाना के जीवनशैली में योगासन को शामिल करना न भूलें। यह न आपके बच्चे का इम्यूनिटी पावर को बढ़ाता है बल्कि साथ में शरीर को निरोग और स्वस्थ रहने में भी पूरी तरह मदद करता है। इम्यूनिटी पावर को बूस्ट करने और ओमिक्रॉन के खतरों से बचाने के लिए इन योगासनों को शामिल कर सकते हैं-

 

  • सूर्य नमस्कार: इसको करने से न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है बल्कि फेफड़ो को भी भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलने में सहायता मिलती है। साथ ही शरीर पूरे दिन एनर्जी से भरपूर रहता है।
  • ताड़ासन: बच्चे अगर इसका अभ्यास रोजाना करेंगे तो उनकी लंबाई बढ़ने की संभावना बनती है। इसके अलावा शरीर में रक्त का संचार बेहतर तरीके से हो पाता है।
  • वृक्षासन: इस योगासन को करने से बच्चों में एकाग्रता की क्षमता बढ़ती है। शरीर लचीला होने के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूती भी मिलती है।
  • भुजंगासन: इसको करने से लिवर और किडनी ही सिर्फ हेल्दी नहीं होता बल्कि शरीर को भी मजबूती मिलती है।
  • गरूड़ासन: इससे न सिर्फ मन की एकाग्रता बढ़ती है बल्कि पैरों के मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है।

इन सब चीजों को बच्चों के जीवन और डायट में शामिल करने से वह आंतरिक और शारीरिक रूप से सशक्त हो जाएंगे, और ओमिक्रॉन के लक्षणों से बचने के लिए हो जाएंगे तैयार। इसके अलावा स्कूल जाना शुरू करने पर बच्चों को गाइडलाइंस को फॉलो करना है, इस जिम्मेदारी को सिखाना है।

  • स्कूल जाने पर बच्चों को हाइजिन का ध्यान रखना होगा।
  • उनको हाथ धोने और मास्क पहने रहने जैसे आदतों को ध्यान दिलाते रहना होगा।
  • बच्चों के बैग में अतिरिक्त सैनिटाइजर और मास्क दें।
  • अगले एक दो सालों तक शेयर करके खाने की आदत को भूलने के लिए कहना होगा।
  • बच्चों को बाहर का खाना खाने की आदत छुड़ाने के साथ उनमें घर का टिफिन और पानी लेने की आदत डालनी होगी।
  • ओमिक्रॉन के खतरों से बचने के लिए स्कूल से आने के बाद तुरन्त कपड़े छोड़कर, हाथ-पैर धोकर साफ कपड़े पहनने की आदत डालनी होगी।
  • स्कूल ले जाने वाली सारी चीजों को डिसइंफेक्ट करने की भी आदत डालनी होगी।

इन सब छोटी-छोटी आदतों को बच्चों के जीवन में शामिल करवाने से आप उनको ओमिक्रॉन के खतरे से कुछ हद तक जरूर बचा सकते हैं। इससे उन्हें फिर से अपनी पुरानी जिंदगी में लौटने का मौका भी मिल जाएगा और आपकी टेंशन भी थोड़ी कम होगी।

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