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जानिए शिशु को पानी किस महीने से और कितना पिलाना चाहिए?

जानिए शिशु को पानी किस महीने से और कितना पिलाना चाहिए?

20 Jan 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 387 Articles

यह तो हम सभी जानते हैं कि पानी जीवन के लिए कितना आवश्यक होता है। डॉक्टरों का मानना है कि शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए दिन में 8-10 गिलास पानी पीना वयस्कों के लिए जरूरी होता है, लेकिन क्या यह नियम शिशुओं पर भी लागू होता है? यह सवाल हर नए मम्मी-पापा के मन में उठता होगा।

इसके बाद अब सवाल यह आता है कि फिर शिशुओं को पानी कब से पिलानी चाहिए और कितना? क्या ज्यादा पानी पिलाने पर उनको किसी प्रकार की बीमारी होने का खतरा रहता है? चलिए आपके सारे सवालों का जवाब इस लेख के माध्यम से देने की कोशिश करते हैं।

शिशुओं को पानी किस उम्र से दिया जा सकता है?

 

लगभग 6 महीने पहले तक शिशु माँ के दूध पर पूरी तरह से निर्भर रहता है। माँ के दूध में लगभग 80% पानी की मात्रा होती है, जो शिशु के हाइड्रेटेड रहने के लिए काफी होता है। माँ के दूध के जगह पर यदि शिशु फार्मूला मिल्क लेता है तो उसको बनाने के लिए जितने पानी की जरूरत होती है, वह शिशुओं के पानी की जरूरत को पूरा करने में सक्षम होता है। लगभग 6 महीने से शिशु को ठोस खाद्य पदार्थ देना शुरू कर दिया जाता है, इसलिए तब से थोड़ा पानी देना शुरू कर सकते हैं।

6 महीने के पहले बच्चों को पानी देने से क्या खतरा हो सकता है?

असल में 6 महीने से पहले तक शिशु का पेट बहुत छोटा रहता है। शिशुओं को पानी पिलाने पर उसका पेट इतना भर जाता है कि इसके बाद दूध पीने का जगह ही नहीं बचती। दूध नहीं पीने के कारण शिशु में पोषण की कमी हो जाती है, और वह कुपोषण का शिकार हो जाता है। इसके अलावा और भी समस्याएं होती हैं-

  • दूध कम पीने के कारण वजन कम होने लगता है और बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है।
  • शिशुओं को पीने के लिए ज्यादा पानी देने से वाटर इंटोक्सिकेशन (Water Intoxication) होने के खतरा रहता है। जिसके कारण उल्टी, चिड़चिड़ापन, सूजन, मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी, सांस लेने में समस्याएं आदि हो सकते हैं।
  • बहुत ज्यादा पानी पिलाने में बच्चों के शरीर में सोडियम की मात्रा असंतुलित हो जाती है, जिसके कारण बेहोशी, कोमा, मिर्गी का दौरा, सुस्ती और शरीर का तापमान भी गिर सकता है।
  • यहां तक कि 6 महीने से पहले पानी पिलाने से हाइपोनेट्रेमिया यानि रक्त में नमक की कमी भी हो सकती है। जिसके कारण सिरदर्द, बेचैनी, आँखों में धुंधलापन, सुस्ती, मांसपेशियों में कंपकंपी, दस्त, तेज बुखार, पसीना न निकलने जैसी बहुत सारी समस्याएं हो सकती हैं।
  • परिस्थिति ज्यादा खराब होने पर मृत्यु की संभावना भी रहती है।

 

6-12 महीने तक बच्चों को पानी कितनी मात्रा में पिलानी चाहिए?

जैसा कि हमने बताया है कि 6 महीने तक शिशुओं को पानी पिलाने की जरूरत नहीं होती है, भले ही मौसम कितनी ही गर्मी की हो। उसके बाद 7 वें महीने से पानी की मात्रा शिशु के ठोस पदार्थ खाने की मात्रा पर निर्भर करता है। लगभग 2-4 ओंस पानी की मात्रा शिशु को हाइड्रेटेड रहने के लिए काफी होता है।

 

12 महीने के बाद शिशुओं को पानी की मात्रा कितनी देनी चाहिए?

12 महीने के बाद शिशु खाना भी ज्यादा ठोस मात्रा में लेना शुरू कर देता है। फलस्वरूप वह माँ का दूध या फार्मूला दूध पहले की तुलना में कम लेता है। इसलिए कम से कम दिन में 2 कप पानी पिलाने की कोशिश की जानी चाहिए।
इस उम्र में बच्चे को सुबह, दोपहर और शाम में खाने की आदत डालें। ज्यादा से ज्यादा शारीरिक गतिविधियों में शामिल करवाएं, इससे बच्चे खुद ही पानी पीने की माँग करेंगे।

 

शिशुओं को पानी किस तरह का देना चाहिए?

शिशुओं को पानी देने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, नहीं तो शिशु को इंफेक्शन होने का खतरा रहता है-

  • शिशु को पानी देने से पहले उसे कम से कम 10 मिनट तक उबालें।
  • शिशु को सीधा नल से पानी न पिलाएं, इससे इंफेक्शन होने का खतरा हो सकता है।
  • आप फिल्टर किया हुआ पानी या डिस्टिल्ड वाटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

शिशु में पानी पीने की आदत कैसे डालें?

जैसा कि हम जानते हैं कि आम तौर पर शिशु पानी पीना नहीं चाहते हैं। उन्हें पानी पिलाने के लिए तरह-तरह के तरीकों को ट्राई करना पड़ता है, जैसे कि-

  • शुरू-शुरू में पानी पिलाने के सिपर या रंग-बिरंगे कप का इस्तेमाल करें।
  • शुरू में हो सकता है शिशु कप से या गिलास से पानी पी न सके। पानी पीना सिखाने के लिए माँ खुद उसको ट्रेनिंग दे सकती हैं। बच्चे माँ की नकल करते हैं इसलिए उसको खुद पानी पीने का तरीका दिखाकर सिखाना आसान हो सकता है।
  • आप पानी पिलाने के लिए फलों का रस बना सकती हैं। एक साल के बाद ही शिशुओं को फलों का रस दें।
  • कप में स्ट्रॉ डालकर भी शिशु को पानी पिलाया जा सकता है।
  • इसके अलावा आप फीडिंग बोटल का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • शिशु अगर पानी पीता है तो उसकी तारीफ कीजिए, ताकि वह पानी पीने के लिए प्रोत्साहित हो।

क्या फार्मूला मिल्क बनाने के लिए पानी की जरूरत होती है?

बिल्कुल हाँ, फार्मूला मिल्क बनाने के लिए उबाला हुआ पानी का ही इस्तेमाल करें। फार्मूला मिल्क बनाने के लिए जितना पानी देने की सलाह पैक में दी हुई होती है, उतना ही देना चाहिए। इससे ज्यादा देने की गलती नहीं करनी चाहिए।

अब तक के विश्लेषण से आप समझ ही गए होंगे कि बच्चों को पानी किस उम्र से और कितनी मात्रा में देनी चाहिए। गलत उम्र में और ज्यादा मात्रा में पानी पिलाने से शिशु को किस प्रकार से नुकसान पहुँच सकता है, इस बारे में भी आप जान ही चुके है। तो फिर चिंता मुक्त होकर शिशु को सही उम्र में सही मात्रा में पानी पिलाएं और उन्हें सेहतमंद भविष्य दें।

#shishukidekhbhal

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