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वर्निक्स केसोसा (Vernix Caseosa )क्या है? इसको धो देना क्या नवजात शिशु के लिए सेफ है?

वर्निक्स केसोसा (Vernix Caseosa )क्या है? इसको धो देना क्या नवजात शिशु के लिए सेफ है?

13 Feb 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

गर्भधारण और बच्चे के जन्म के बीच बहुत तरह की प्रक्रियाएं होती है। वैसे तो शिशु माँ के गर्भ में भ्रूण से मनुष्य के रूप में हर दिन विकसित होता रहता है, पर इस दौरान उसकी सुरक्षा की भी जरूरत होती है। शिशु की सुरक्षा के लिए वर्निक्स केसोसा (Vernix Caseosa) नाम का सुरक्षात्मक परत बनता है, जो शिशु की त्वचा के लिए बहुत जरूरी होता है। आप शायद यह सोच रहे होंगे, ऐसा कोई परत जन्म के बाद तो दिखाई नहीं देता है, तो आप गलत हैं। वर्निक्स केसोसा सफेद रंग का परत होता है जो गर्भ के अंदर उसकी सुरक्षा करता है और जन्म लेने के बाद भी।

अब आप जरूर जानते होंगे कि यह सुरक्षात्मक कवच आखिर क्या हैं? कब से यह बनना शुरू होता है और कैसे यह शिशु की सुरक्षा करता है। तो चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

वर्निक्स केसोसा (Vernix Caseosa) क्या होता है?

वर्निक्स केसोसा आपके बच्चे की त्वचा पर एक सुरक्षात्मक परत की तरह होता है। यह एक सफेद, पनीर जैसे पदार्थ की तरह होता है। यह लेप गर्भ में बच्चे की त्वचा पर विकसित होता है। यह लेप के निशान जन्म के बाद त्वचा पर दिखाई दे सकते हैं या तो कम मात्रा में या ज्यादा मात्रा में।

शायद आप सोच रही होंगी इस परत की आखिर जरूरत क्या हैं। जरा सोचिए, लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहने से त्वचा जिस तरह सिकुड़ जाती है, उसी तरह एमनियोटिक फ्लूइड में शिशु तैरता रहता है, उससे यह परत सुरक्षा प्रदान करता है।

जैसा कि आप जानते हैं, आपका शिशु 40 सप्ताह तक एमनियोटिक द्रव में तैरता रहता है। यह यह लेप है अजन्मे बच्चे की त्वचा को तरल पदार्थ से बचाता है। इस सुरक्षा के बिना, गर्भ में बच्चे की त्वचा या तो फट जाएगी या झुर्रीदार बन जाएगी।

जन्म के बाद शिशु की त्वचा को नरम रखने में वर्निक्स केसोसा की भूमिका अहम होती है। यह गर्भ में आपके बच्चे की त्वचा को संक्रमण से भी बचाता है।

वर्निक्स केसोसा (Vernix Caseosa) गर्भधारण करने के कितने दिनों बाद से बनना शुरू होता है?

गर्भधारण के 21वें हफ्ते तक वर्निक्स केसोसा के बनने की प्रक्रिया चलती है और फिर यह शिशु की त्वचा पर परत के रूप में बनकर तैयार हो जाता है।

असल में वर्निक्स केसोसा झिल्लीदार संरचना की तरह होता है। इसमें 80% पानी, 10% प्रोटीन और 10% लिपिड होता हैं, जिसमें सेरामाइड्स, फैटी एसिड, फॉस्फोलिपिड (phospholipids) और कोलेस्ट्रॉल (cholesterol), जैसे लिपिड शामिल होते हैं, जो गर्भावस्था के अंतिम तिमाही के दौरान आंशिक रूप से भ्रूण फ्री फैटी एसिड द्वारा एटरो-पोस्टीरियर और डोरसोवेंट्रल तरीके से एटरो-पोस्टीरियर और डोरसोवेंट्रल तरीकेसंश्लेषित होते हैं। एटरो-पोस्टीरियर और डोरसोवेंट्रल तरीके। इसकी लिपिड सामग्री के कारण, वर्निक्स हाइड्रोफोबिक है और स्ट्रेटम कॉर्नियम के विकास के दौरान त्वचा को अत्यधिक पानी के संपर्क से बचाता है।

वर्निक्स केसोसा (Vernix Caseosa)के फायदे

अब तक तो आप समझ ही चुके होंगें कि वर्निक्स केसोसा के अनगिनत फायदे होते हैं। वर्निक्स केसोसा शिशु की त्वचा को मॉइश्चराइज रखने के साथ-साथ शिशु के शरीर के तापमान को संतुलित करता है। डिलीवरी के दौरान बर्थ कैनल को लुब्रिकेंट करने में भी मदद करता है। इसका माइक्रोबायल गुण शिशु को जन्म के बाद इंफेक्शन होने के खतरे से बचाता है। क्योंकि परत में एन्टी ऑक्सिडेंट, एंटी इंफ्लामेटोरी और एंटी बैक्टीरियल गुण होता है।

वर्निक्स केसोसा (Vernix Caseosa) को धो देना क्या नवजात शिशु के लिए सेफ होता है?

जी नहीं, इसको शिशु के जन्म के तुरन्त बाद शरीर से धो देना सही नहीं है। जन्म लेने के कुछ देर बाद पोंछ देना ठीक होगा। उसके बाद 6 घंटे या 24 घंटे बाद नहलाने से उसको इंफेक्शन होने के खतरा से बचाने से और शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा शिशु का मॉइश्चराइज भी देर तक रहता है। वर्निक्स केसोसा के फायदे जन्म के तुरन्त बाद शिशु को कई प्रकार के इंफेक्शन्स से बचाता है।

अब तक के चर्चा से आप समझ ही गए होंगे कि वर्निक्स केसोसा का शिशु के जीवन में क्या भूमिका है। यह शिशु के लिए कितना उपयोगी है।

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