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बच्चे को बोलने में देरी क्यों होती है? जानें बोलने के उपाय।

बच्चे को बोलने में देरी क्यों होती है? जानें बोलने के उपाय।

14 Feb 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

जब घर में बच्चे का जन्म होता है तो माता-पिता के साथ घर के सभी लोग खुशी से झुम उठते हैं। ठीक उसी तरह जब वही बच्चा पहली बार अपनी मीठी तोतली जुबान से माँ, पापा, दादा, दादी, नाना, नानी का नाम लेता है तो सबका दिल खुशी से भर आता है। सोचिए, जो बच्चा अपने उम्र के हिसाब से जितना बोलना चाहिए उतना बोल नहीं पा रहा है तो माता-पिता के दिल पर क्या गुजरती होगी। आज हम इसी विषय पर थोड़ी जानकारी देने की कोशिश करते हैं कि बच्चे बोलने में देरी क्यों करते हैं?

बच्चे बोलने में देरी क्यों करते हैं इस बात को समझने के लिए सबसे पहले यह समझते हैं कि बोली (Speech) और भाषा (Language) के बीच अंतर क्या है। इस अंतर को समझने पर ही माँ यह समझ सकेंगी कि उनके बच्चे की समस्या किस क्षेत्र में है, बोली में है या भाषा में।

बोली और भाषा के बीच क्या अंतर है?

बोली मन की वह अभिव्यक्ति होती है, जिसमें ध्वनी और शब्द का मेलबंधन होता है।

भाषा वह होती है,जहाँ शब्द वाक्यों के रूप में अपनी बात को सही तरह से समझाने में सक्षम होती है। वह मौखिक और लिखित दोनों हो सकती है।

वैसे तो हर बच्चे की क्षमता अलग-अलग होती है। उसके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर भी बोलने की क्षमता निर्भर करती है। विकास की गति में देरी होने पर बोलने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है-

  • सोचने की क्षमता
  • भावनात्मक और सामाजिक कौशल
  • ज्ञान लेने की क्षमता
  • बोलने और भाषा को व्यक्त करने की क्षमता

बच्चे कितने साल में बोलते हैं? समझे बच्चे को बोलने में देरी होने के संकेत

बच्चा अपनी सिखने की क्षमता के हिसाब से ही भावनात्मक और मानसिक रूप से विकसित हो सकता है। लेकिन यह माँ के लिए समझना मुश्किल हो जाता है कि उसके बच्चे की यह गति दूसरे बच्चों की तुलना में कम है। चलिए इसके लिए कुछ संकेतों को जान लेते हैं-

  • 12 महीने तक- इस महीने तक बच्चे को माँ, पापा, दादा, नाना आदि बोलना शुरू कर देना चाहिए। इसके अलावा अगर बच्चा इशारों में भी बात नहीं कर रहा है तो समझ जाइए कि उसकी बोलना सीखने की गति धीमी है।
  • 18 महीने तक- इस उम्र तक बच्चे थोड़ा-थोड़ा शब्दों को जोड़कर बोलना सीख लेते हैं। अपने आस-पास के ध्वनियों के आधार पर जवाब देने या प्रतिक्रिया देने की कोशिश करते हैं। ऐसा नहीं होने पर माँ को सचेत होने की जरूरत है।
  • 24 महीने तक- इतने महीने तक बच्चे 50-100 शब्द बोल लेते हैं। छोटे-छोटे वाक्यों में अपनी बात समझाने की कोशिश करने लगते हैं। लेकिन जो बच्चे अभी भी इशारों में अपनी बात ज्यादा समझाने की कोशिश करते हैं और बहुत ही कम शब्द बोलते हैं तो माँ को उनका इलाज करवाने के बारे में सोचने की जरूरत होती है।
  • 3 साल तक- इस उम्र के बच्चे लगभग 50% बातें समझने लगते हैं और समझा भी देते हैं। इसके विपरित अगर बच्चा अभी भी सब कुछ बोल या समझा नहीं पा रहा है तो माँ के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
  • 4 साल तक- अब तक बच्चा सब कुछ बोल पाता है, यहाँ तक अनजान भी उसकी बात समझ सकता है। जिस बच्चे की बात उसके माँ-पिता ही समझ नहीं पाते हैं, उनको तो तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

अब सवाल आता है कि बच्चे को बोलने में देरी क्यों होती है? आखिर ऐसी क्या वजह है कि बच्चे को अपनी बात समझाने में समस्या होने लगती है।

बच्चे को बोलने में देरी होने के कारण

  • सुनने में समस्या- कभी-कभी बच्चा अच्छी तरह से सुन नहीं पाता है या कम सुनता है। इस कारण से भी उसको बोलने में समस्या होती है।
  • कान में इंफेक्शन- यह क्रॉनिक समस्या होती है। इसके कारण भी बच्चे की बोलने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • समय से पहले पैदा होना- समय से पहले जन्म लेने के कारण शारीरिक और मानसिक विकास की गति धीमी होती है, इसलिए बच्चे को बोलने में देरी होती है।
  • बड़े-भाई बहन का ज्यादा बात करना- जिस घर में बच्चे से बड़े भाई-बहन होते हैं, उनके ज्यादा बात करने के कारण बच्चा देर से बात करना सीखता है।
  • मस्तिष्क को चोट लगना- अगर किसी कारण बच्चे के मस्तिष्क को चोट लगी है तो उसके दिमागी विकास पर असर पड़ता है। इसलिए बच्चे की सीखने की गति प्रभावित होती है।
  • कटा हुआ तालु- तालु के कटे होने के हवा का प्रवाह सही तरह से नहीं होता है, जिसके कारण बच्चा बात नहीं कर पाता है।
  • घर में दो भाषा का प्रयोग होना- अक्सर यह देखा जाता है कि माँ बात करने के लिए एक भाषा का प्रयोग करती है तो पिता दूसरी भाषा का यानि घर में द्विभाषा का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे हालातों में बच्चे को भाषा सीखने में देरी होती है।

बच्चे को बोलना सिखाने के लिए आप क्या कर सकते हैं? जानें बोलने के उपाय

बच्चे को बोलना सिखाने के लिए आप भी कुछ सिंपल और ईजी चीजें कर सकती हैं, जिससे बच्चे को जल्दी बात करना सीखने में मदद मिल सकती है। बच्चे जल्दी कैसे बोलते हैं, इसके लिए जाने कुछ ईजी ट्रिक्स-

  • जितना ज्यादा समय हो सके बच्चे के साथ समय बिताएं और उनसे बात करें।
  • बच्चे के साथ क्रिएटिव खेल खेलें, उनसे खेल-खेल में बात करना सिखाएं।
  • बच्चे को उसके हमउम्र बच्चों के साथ खेलने दें, उनके साथ समय बिताने का मौका दें।
  • रात को सोते समय बच्चे को लोरी सुनाएं या कहानी पढ़कर सुनाएं।

बच्चे को बोलने में देरी होने पर बोलने के उपाय के रूप में डॉक्टर क्या करते हैं?

आमतौर पर जो बच्चे बात करने में देरी करते हैं, उनको डॉक्टर स्पीच थेरेपी करवाने की सलाह देते हैं। स्पीच थेरेपिस्ट बच्चे की बोलने की क्षमता को बेहतर करवाने में मदद करते हैं और साथ में माता-पिता को सही निर्देश देते हैं कि कैसे बच्चे को बोलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

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