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बच्चों में बिस्तर गीला करने की बीमारी क्या है? कारण व इलाज

बच्चों में बिस्तर गीला करने की बीमारी क्या है? कारण व इलाज

17 Feb 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 279 Articles

नवजात बच्चों में बिस्तर गीला करना यानी बेड वेटिंग काफी सामान्य मानी जाती है। अमूनन, जब तक बच्चा खुद से इस बारे में बताना नहीं सीखते हैं, तब तक बच्चों में बिस्तर पर पेशाब करने की आदत बनी रहती है। धीरे-धीरे बढ़ती उम्र के साथ अक्सर उनकी इस आदत में सुधार आ जाती है, लेकिन कुछ बच्चों में बड़े होने पर भी यह आदत बनी रह सकती है। ऐसे में पेरेंट्स कैसे अपने बच्चे की इस आदत को सुधार सकते हैं, इससे जुड़ी जानकारी इस लेख में पढ़ें। 

बच्चों में बिस्तर गीला करना क्या है?

बच्चों में बिस्तर गीला करना या बेड वेटिंग (Bed Wetting) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चा सोते समय अपने पेशाब पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। मेडिकल टर्म में इसे नाइट टाइम इनकंटीनेंस (Nighttime Incontinence) या नॉक्टनल एन्यूरेसिस (Nocturnal Enuresis) भी कहा जाता है। ऐसा करते समय बच्चे को खुद भी इसका पता नहीं होता है कि उसने सोते समय बिस्तर गीला कर दिया है। 

बच्चों में बिस्तर पर पेशाब करने की आदत कितना सामान्य है?

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की शोध के अनुसार, भारत में लगभग 7.61 से 16.3% बच्चों में नींद में बिस्तर पर पेशाब करने की बीमारी देखी जाती है। इसमें 5 से 12 साल तक की उम्र के बच्चे शामिल हैं। यानी इसकी संभावना है कि अगर बच्चा 12 साल तक की उम्र तक बिस्तर पर बेशाब करता है, तो यह सामान्य हो सकती है। इसके अलावा, बिस्तर गीला करने की बीमारी लड़कियों के मुकाबले लड़कों में अधिक देखी जा सकती है। 

बच्चों में बिस्तर गीला करने की बीमारी के कारण क्या हैं?

बच्चों में बिस्तर गीला करने की बीमारी के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं, जो नीचे हम रिसर्च के आधार पर बता रहे हैं:

  • छोटा मूत्राशय होना या मूत्राशय का पूरी तरह से विकसित न होना
  • बच्चे में मूत्राशय के भरे रहने की पहचान कम होना
  • मूत्र उत्पादन को धीमा करने वाले हार्मोन में असंतुलन होना
  • मूत्र पथ का संक्रमण होना
  • स्लीप एप्निया होना
  • बच्चों में मधुमेह होना
  • लंब समय से कब्ज की समस्या होना
  • तंत्रिका तंत्र में विकास से जुड़ी समस्या होना 

बच्चों में बेड वेटिंग का निदान कैसे किया जाता है?

सोते समय बच्चों में बिस्तर पर पेशाब करने की आदत का अगर निदान सही तरीके से किया जाए, तो जल्द ही इसका सही इलाज किया जा सकता है। इसके लिए बेट वेटिंग का कारण पता करके उसी आधार पर इसका निदान किया जाता है:

1. यूरिन टेस्ट : यूरिन टेस्ट में बच्चे की पेशाब की जांच की जाती है। इसके आधार पर मूत्र संक्रमण या मूत्राशय से जुड़ी किसी संक्रमण का पता लगाया जाता है।

2. स्कैन : अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, यूरोडायनामिक टेस्टिंग (Urodynamic Testing) जैसे स्कैन भी किए जा सकते हैं। ये स्कैन बच्चे में मूत्राशय या यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़े जन्म दोष या ब्लॉकेज की पुष्टि करते हैं।

3. यूरिनरी डायरी बनाना : कुछ मामलों में डॉक्टर बच्चे से जुड़ी सामान्य गतिविधियां भी पूछ सकते हैं, जैसे – बच्चा दिनभर में या सोते समय किस तरह के तरल पदार्थ व कितनी मात्रा में इनका सेवन करता है। वह कितनी बार बाथरूम जाता है या सप्ताह में कितनी बार बिस्तर गीला करता है। 

नींद में पेशाब करने की बीमारी का इलाज करने व बचाव के टिप्स

बच्चों में बेड वेटिंग का इलाज कई तरीकों से किया जा सकता है। यह बच्चे की स्थिति और उसके कारण के आधार पर निर्भर कर सकता है।

1. दवाएं : एंटीबायोटिक समेत मूत्र का उत्पादन कम करने वाली दवाओं की खुराक बच्चे को दी जा सकती है। इनकी खुराक डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दें।

2. बेडवेटिंग अलार्म : रात में बच्चा कितनी बार बाथरूम जाएगा, इसके लिए अलार्म सेट करें। इससे कुछ ही दिनों में बच्चे को रात में उठकर बाथरूम जाने की आदत हो सकती है।

3. आदत सिखाएं : बच्चे को सोने से पहले बाथरूम जाने की आदत सिखाएं। ऐसे में इसकी संभावना कम हो सकती है कि बच्चा सोते समय बिस्तर गीला करेगा।

4. तरल पेय कम करें : सोते समय या रात के भोजन में बच्चे को तरल पेय का सेवन कम से कम कराएं।

5. पेय में बदलाव : बच्चे को कॉफी, साइट्रस जूस या स्पोर्ट्स ड्रिंक्स कम से कम पीने के लिए दें। इस तरह के पेय शरीर में यूरिन का उत्पादन अधिक करते हैं।

6. उचित इलाज : अगर बच्चे को कब्ज है या मूत्राशय के पथ से जुड़ी कोई बीमारी है, तो उसका उचित इलाज कराएं।

7. एक्सरसाइज : बच्चे को ब्लैडर एक्सरसाइज करना सिखाएं। इससे मूत्राशय मजबूत होगा और उसमें अधिक समय तक यूरिन रोकने की क्षमता होगी।

8. दालचीनी : मधुमेह होने से भी बच्चे में बेड वेटिंग की समस्या हो सकती है। ऐसे में घरेलू तौर पर बच्चे को दालचीनी खिलाएं। अध्ययन के अनुसार, यह शरीर में इंसुलिन का प्रभाव बेहतर करके ब्लड ग्लूकोज का स्तर कम कर सकती है।

9. करौंदे का जूस : यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण होने पर बच्चे के आहार में करौंदे का जूस शामिल करें। शोध बताते हैं कि यह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का इलाज करने में प्रभावी होता है।

बच्चों में नींद में पेशाब करने की बीमारी का इलाज कराने के कई तरीके हैं। हालांकि, ये तभी प्रभावी होंगे जब उन्हें उसके कारण के आधार पर अपनाया जाए। अगर बच्चे में पेशाब करने की आदत है, तो यहां बताए गए इलाज व उपाय के जरिए इस समस्या को दूर कर सकती हैं। ध्यान रखें कि इनका प्रभाव दिखने में कुछ सप्ताह तक का समय लग सकता है। इसके अलावा, बिस्तर गीला करने पर बच्चे को डांटें नहीं। इससे बच्चे का आत्मविश्वास कम हो सकता है और पेरेंट्स से उसका मन-मुटाव भी बढ़ सकता है। इसकी जगह बच्चे से बात करें और उसे भी उसकी इस समस्या के बारे में बताएं।

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