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क्या बच्‍चों के लिए प्रीस्कूल जरूरी होता है?

क्या बच्‍चों के लिए प्रीस्कूल जरूरी होता है?

21 Feb 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 279 Articles

बचपन के शुरुआती साल बहुत ही महत्त्वपूर्ण होते हैं, खासतौर पर जन्म से लेकर 8 वर्ष की आयु तक। इस दौरान जीवन में होने वाली हर शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्थिति को सीखने के लिए हमारा मस्तिष्क तत्पर बना रहता है। शायद यही वजह है कि छोटी उम्र में ही शिक्षा देने के चलन को बढ़ावा देने के लिए बच्‍चों के लिए प्रीस्कूल का क्रेज बढ़ता जा रहा है। बच्‍चों के लिए प्रीस्कूल या किंडरगार्टन उनका पहला स्कूल माना जाता है। यहां पर बच्चे के मार्क्स के बदले उसके शुरुआती ज्ञान को समझने व उसे बढ़ाने पर जोर दिया है।

यही कारण भी है कि इस लेख में हम बच्चों के लिए प्री-स्कूल का महत्व विस्तार से बता रहे हैं। इस लेख के जरिए आप न सिर्फ प्रीस्कूल शिक्षा क्या है, इसके बारे में जानेंगे, बल्कि नन्हे बच्चों की प्राथमिक शिक्षा क्यों जरूरी है व प्रीस्कूल के लिए बच्चों की उम्र कितनी होनी चाहिए, इसके बारे में भी पढ़ेंगे।

प्री-स्कूल शिक्षा क्या है?

 

छोटे बच्चों के लिए बच्‍चों के लिए प्रीस्कूल शिक्षा क्या है, इसे आसान शब्दों में इस तरह समझा जा सकता है कि प्रीस्कूल बच्चों के दिमाग को स्कूल में पढ़ाई करने, प्रारंभिक शिक्षा के प्रति उनके उत्साह को बढ़ाने व उन्हें अच्छे स्वभाव के साथ ही अच्छे सामाजिक व्यवहार को सीखने में मदद कर सकती है।

आज के दौर में भले ही बच्‍चों के लिए प्रीस्कूल एक चलन और ट्रेंड बन गया है, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बच्चों के लिए प्रीस्कूल के फायदे भी कई हैं। बच्चों के लिए नर्सरी स्कूल या प्रीस्कूल के फायदे हर पेरेंट्स को पता होने चाहिए। इन्हीं के बारे में आप नीचे विस्तार से पढ़ सकते हैं।

बच्‍चों के लिए प्रीस्कूल के फायदे क्या हैं?

 

बच्चों के लिए प्री स्कूलिंग कई तरह के फायदेमंद माना गया है। यह न सिर्फ उनके शैक्षणिक ज्ञान को बढ़ा सकता है, बल्कि उनके निजी व सामाजिक ज्ञान को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। छोटे बच्चों के लिए प्रीस्कूल के फायदे ये रहेंः

1. सीखने की योग्यता की पहचान करना

प्री-स्कूल की शिक्षा सुनिश्चित करती है कि बच्चा आगे की उम्र में किस तरह की विषयों, बातों व चीजों को तेजी से सीख सकता है। इसके अलावा, अगर बच्चा किसी विषय को सीखने व पढ़ने में कमजोर है, तो उसे समय रहते उस विषय में कैसे बेहतर बनाएं, इसमें भी मदद कर सकती है।

2. ज्ञान का विकास करना

प्री-स्कूलिंग शिक्षा से आधारभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान का विकास हो सकता है। दरअसल, प्रीस्कूल ही छोटे बच्चों की पहली पाठशाला होती है। यहां पर बच्चे हर दिन नई-नई जानकारियों, बातों व व्यवहारों के बारे में ज्ञान सीखते हैं। इससे बच्चा बहुत ही कम उम्र में विभिन्न विषयों से जुड़े ज्ञान को प्राप्त कर सकता है और आगे की उम्र में अपनी पसंदीदा विषय के बारे में खुद से विचार भी कर सकता है।

3. कौशल का पता चलना

हर बच्चा अपने आप में एक-दूसरे से भिन्न होता है। कोई पढ़ने में होशियार होता है, तो कोई खेल-कूद में। इसी तरह कुछ बच्चे अपने हमउम्र बच्चे के मुकाबले कुछ कौशल में अधिक होशियार भी हो सकते हैं। ऐसे में अगर कोई बच्चा किसी विषय या किसी अन्य कौशल में अपने हमउम्र के बच्चों से अधिक होशियार हैं, तो प्रीस्कूल के जरिए उसका आसानी से पता लगाया जा सकता है।

4. शुरुआती पढ़ाई का स्तर समझ आना

वैसे तो शिक्षा का मकसद एक ही है कि बच्चे के सीखने व समझने की योग्यता तो बेहतर बनाना, लेकिन आजकी शिक्षा सीखने के बजाय मॉर्क्स लाने पर अधिक जोर देने के पहलू से जुड़ गई है। ऐसे में बच्चा अगर प्रीस्कूल जाता है, तो वह वहां पर धीरे-धीरे व आसान तरीकों से शुरुआती पढ़ाई का स्तर समझ सकता है। एक तरह से प्रीस्कूल बच्चों को पढ़ाई के मैदान में अपनी कमर कस करने की ट्रेनिंग देने का भी काम कर सकता है।

5. मोटर स्किल का विकास करना

बच्‍चों के लिए प्रीस्कूल के फायदे उनके मोटर स्किल यानी मोटर कौशल को भी विकसित कर सकते हैं। मोटर स्किल का तात्पर्य उन कार्यों से होता जिसे करने के लिए बच्चा अपनी हाथों और कलाईयों का इस्तेमाल करता है। इस तरह नर्सरी स्कूल व प्रीस्कूल के फायदे बातचीत करने, लिखने, पढ़ने व खेलने-कूदने से लेकर सामाजिक शिक्षा को बेहतर कर सकते हैं।

6. बोलना सीखना

प्री-स्कूल जाने से बच्चा लोगों के बीच में बोलना सीख सकते हैं। प्रीस्कूल में बच्चों को कक्षा में कविता, कहानी, पार्थना, एक्टिंग जैसे विभिन्न मौखिक गतिविधियों में शामिल किया जाता है, ताकि बच्चे की पर्सनालिटी को बेहतर बनाया जा सके। इस दौरान बच्चे ये सभी गतिविधियां समूह में करते हैं। ऐसे में वो लोगों के सामने बिना डरे अपनी मन की बात रखने, उनसे बातचीत करने का हुनर भी सीख सकते हैं।

7. सामाजिक-भावनात्मक विकास को बेहतर करना

बच्चों के लिए प्रीस्कूल के फायदे उनके सामाजिक भावना को व्यक्त करने में मदद कर सकते हैं। इससे बच्चे का पढ़ाई के साथ ही सामाजिक तौर पर आत्मविश्वास भी बढ़ सकता है।

8. अनुशासन व टाइम मैनेजमेंट सीखना

प्री स्कूल में बच्चे विभिन्न गतिविधियों के साथ ही, अनुशासन व टाइम मैनेजमेंट का पाठ भी सीख सकते हैं। यहां पर रहते हुए बच्चे को हर कार्य को करने के लिए अपने शिक्षक की अनुमति लेनी होती है। इसके अलावा, उन्हें कार्य को एक तय समय पर शुरू और पूरा करना भी होता है।

क्या बच्चों के लिए प्रीस्कूल के नुकसान हो सकते हैं?

कुछ मामलों में प्रीस्कूल के नुकसान भी हो सकते हैं, जो निम्नलिखित हो सकते हैं, जैसेः

  • लोगों द्वारा बच्चे का बाल यौन शोषण होना। ऐसे में प्रीस्कूल के बच्चे बहुत ही छोटी उम्र के होते हैं, जिस वजह से वे अपने साथ हो रही घटनाओं के बारे में बताने में भी असमर्थ हो सकते हैं।
  • प्रीस्कूल के नुकसान में बच्चे का अभिभावकों से दूर होने का डर भी शामिल किया जा सकता है। भले ही प्रीस्कूल में बच्चे हमउम्र के साथ रहते व खेलते-कूदते हैं, लेकिन शुरू-शुरू में बच्चे को पेरेंट्स से दूर जाने का डिप्रेशन हो सकता है।
  • कुछ बच्चे अन्य बच्चों के मुकाबले पढ़ाई या खेल-कूद में कमजोर हो सकते हैं, तो ऐसी स्थिति में होशियार बच्चे उनका उपहास भी बना सकते हैं।
  • प्रीस्कूल में होने वाली गतिविधियों के कारण बच्चा खेल-कूद में अधिक दिलचस्पी ले सकता है। इससे उसके मन पढ़ाई से हट भी सकता है।

नर्सरी स्कूल या प्राथमिक विद्यालय स्तर की आयु सीमा क्या है?

 

प्राथमिक विद्यालय स्तर के लिए बच्चे की उम्र 6 से 14 वर्ष की आयु को अच्छी मानी जा सकती है। वहीं, प्रीक्सूल के बच्चे में भाषा का विकास होने पर व बातों को समझना शुरू करने से प्रीस्कूल में एडमिशन दिला सकते हैं।

बच्चों के लिए प्री-स्कूल कई तरह से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, बच्चे के लिए प्रीस्कूल का चयन करते समय कुछ जरूरी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए, जैसे – बच्चे के लिए प्रीस्कूल घर के नजदीक होना चाहिए, उस प्रीस्कूल में दी जाने वाली शिक्षा का स्तर, वहां के शिक्षकों का रवैया आदि। साथ ही पेरेंट्स को भी कभी-कभी बच्चे के प्रीस्कूल में जाना चाहिए और वहां पर कुछ समय बिताना चाहिए, तक वह उस स्कूल के नियम-कानूनों को अच्छे से समझ सकते हैं।

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