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बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत: कारण, नुकसान और छुड़ाने के 10 तरीके

बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत: कारण, नुकसान और छुड़ाने के 10 तरीके

28 Jun 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 408 Articles

छोटे बच्चों में ऐसी कई आदतें होती हैं, जिनके पीछे के कारण को समझना पहेली जैसा हो सकता है। इसी तरह आपने छोटे बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत भी देखी होगी। अंगूठा चूसने वाले बच्चे से परेशान पेरेंट्स अक्सर बच्चों का अंगूठा पीना कैसे छुड़ाएं इसके उपाय ढूंढते रहते हैं। पर बता दें कि किसी भी समस्या का हल उसके कारणों के आधार पर ही किया जा सकता है। 

यही वजह है कि इस लेख में हम आपको न सिर्फ बच्चे का अंगूठा चूसना कैसे छुड़ाएं इसके उपाय बता रहे हैं, बल्कि बच्चों के अंगूठा चूसने के कारण भी बता रहे हैं। तो स्क्रॉल करें और पढ़ें बच्चों का अंगूठा चूसना और उसके कारण।

क्या बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत सामान्य है?

बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत
अंगूठा चूसते हुए बच्चा/चित्र स्रोतः all-free-download.com

हां, छोटे बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत सामान्य व प्राकृतिक होती है। इसे भी उसने शारीरिक विकास का एक पड़ाव माना जा सकता है। इतना ही नहीं, अधिकांश बच्चे माँ के गर्भ से ही अंगूठा चूसने की आदत विकसित कर लेते हैं। ऐसे में अगर बच्चा अंगूठा चूसता है, तो इसके प्रति चिंतित न हो। हालांकि, बच्चे को दिनभर या बार-बार अंगूठा चूसने से रोकने का प्रयास जरूर करना चाहिए। 

नवजात बच्चे अंगूठा क्यों पीते हैं या बच्चों के अंगूठा चूसने के कारण क्या हैं? (Bacha Angutha Kyo Chusta Hai in Hindi)

छोटे बच्चे अंगूठा क्यों पीते हैं या बच्चों के अंगूठा चूसने के कारण क्या हैं, इसके पीछे निम्नलिखित कारक हो सकते हैं, जैसेः

  • खुद को सुरक्षित महसूस करने पर
  • खुशी महसूस करने पर
  • थके होने पर
  • भूख लगने पर
  • बोर होने पर
  • खुद को शांत करने के लिए
  • सोने के लिए 
  • कोई मानसिक विकार होना

इसके अलावा, रिसर्च यह भी बताते हैं कि बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत तनाव कम करने से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि छोटे बच्चे अंगूठा चूसने के लिए जरिए ट्रिगेमिनल नर्व (Trigeminus and Obtain Muscular) को उत्तेजित कर सकते हैं। इससे मांसपेशियों में संतुलन हो सकता है और मानसिक तनाव भी दूर हो सकता है। 

बच्चों का अंगूठा चूसना किस उम्र से शुरू होता है?

अधिकांश बच्चे माँ के गर्भ में ही अंगूठा चूसना शुरू कर देते हैं। खासकर, गर्भावस्था के 29वें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड के लिए इसकी छवि भी देखी जा सकता है। वहीं, जन्म के तुरंत बाद बच्चे का अंगूठा चूसना देखा जा सकता है। लगभग 10 से 34% बच्चे जन्म से ही अंगूठा चूसते रहते हैं।

बच्चे का अंगूठा चूसना कब तक चलता है? 

बच्चे का अंगूठा चूसना कब तक जारी रह सकता है, इस बार में कोई विशिष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि, ऐसा माना जा सकता है कि बढ़ती उम्र व अच्छी आदतों के जरिए बच्चे का अंगूठा चूसना बंद हो सकता है। लेकिन, अगर 5 साल की उम्र के बाद भी बच्चे का अंगूठा चूसना जारी रहता है, तो यह पेरेंट्स के लिए चिंता का विषय बन सकता है। ऐसे में कम उम्र में बच्चों का अंगूठा पीना कैसे छुड़ाएं, इसके उपाय जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें।

बच्चों का अंगूठा पीना कैसे छुड़ाएं? (Bachon Ka Angutha Peena Kaise Chudaye in Hindi)

बच्चे को अंगूठा चूसने से कैसे रोकें? या बच्चों का अंगूठा पीना कैसे छुड़ाएं? इसके उपाय को लेकर अक्सर पेरेंट्स चिंतित हो जाते हैं। कई बार पेरेंट्स परेशान होकर बच्चे को डांटना भी शुरू कर देते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि बच्चे को डांटना अंगूठा चूसने की आदत का उपाय नहीं है। नीच पढ़ें बच्चे को अंगूठा चूसने से कैसे रोकें, इसके कारगर उपाय।

बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत
बच्चे का खिलौना/चित्र स्रोतः फ्रीपिक
  1. दस्ताने पहना – नवजात बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत छुड़ाने के लिए उन्हें हाथों में दस्ताने पहना सकते हैं। 
  1. खिलौना देना – बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत छुड़ाने के लिए उन्हें कोई बजने वाला खिलौना दे सकते हैं। इससे बच्चे का ध्यान खिलौने की तरफ अधिक आकर्षित हो सकता है और वह अंगूठा चूसना भूल सकता है।
  1. पेसिफायर – पेसिफायर (Pacifier) के जरिए भी बच्चे का अंगूठा चूसना बंद कराया जा सकता है। हालांकि, जब भी बच्चे को पेसिफायर दें, तो हमेशा उसके आस-पास ही रहें और लंबे समय के लिए पेसिफायर न दें।
  1. अंगूठे पर लेप लगाना – ऐसा अक्सर दादी-नानी करती हैं। वे बच्चे के अंगूठे में कड़वी खाद्य चीजों का लेप लगाती है, ताकि कड़वे स्वाद की वजह से बच्चों का अंगूठा चूसना बंद हो जाए।
  1. बात करें – अगर बच्चा 3 साल से बड़ी उम्र का है और बातों को समझ सकता है, तो उसे अंगूठा चूसने के नुकसान व बैड हैबिट के बारे में बताएं। 
  1. बच्चे को टोकना – बच्चा जब भी अपने मुंह में अंगूठा डाले, तो उसे तुरंत टोकें और ऐसा न करने के लिए कहें। 
  1. यूट्यूब वीडियो दिखाएं – आजकल यूट्यूब पर ऐसे कई वीडियो मौजूद हैं, जो बच्चे को दिखा सकते हैं और अंगूठा न चूसने के प्रति उनमें अच्छी आदत विकसित कर सकते हैं।
  1. तारीफ करना – जैसे-जैसे बच्चा अपने अंगूठा चूसने की आदत पर कंट्रोल करने लगे, तो उसकी तारीफ जरूर करें। ऐसा करने से बच्चे को प्रोत्साहन मिलेगा और वह खुद भी अंगूठा चूसने की आदत छोड़ने के प्रति मन लगा सकता है।
  1. कारण को समझें – पेरेंट्स को इस बात पर ध्यान देना चाहिए उनके बच्चों के अंगूठा चूसने के कारण क्या हैं। उन कारणों के आधार पर भी बच्चों का अंगूठा चूसना बंद कराया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बच्चा भूख लगने पर अंगूठा चूसता है या नींद लगने पर, आदि।
  1. समय पर स्तनपान कराना या भोजन खिलाना – बच्चे के पहले से दूसरे आहार या स्तनपान के बीच में अधिक गैप न रखें। बच्चे का पेट भरा रहेगा, तो वह खुद की अंगूठा चूसने की आदत धीरे-धीरे कम कर सकता है।

क्या बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है?

कुछ स्थितियों में बच्चे का अंगूठा चूसना उसके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही सामाजिक विकास के लिए भी हानिकारक हो सकता है, जैसेः

  • बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत से उनके सामने के दांत अंदर की तरफ धंस सकते हैं या बाहर की तरफ निकल सकते हैं। 
  • अंगूठा चूसने वाले बच्चे तोतले हो सकते हैं। ऐसा मुंह में अक्सर अंगूठा होने की वजह से हो सकता है। इसकी वजह से बच्चा शब्दो को साफ-साफ बोलने में परेशानी महसूस कर सकता है। 
  • नाखूनों में मौजूद बैक्टीरिया के कारण अंगूठा चूसने से बच्चे को पेट में पैरोनीचिया (Paronychia) नामक संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा, अंगूठा चूसने वाले बच्चे में हर्पेटिक व्हिटलो (Herpetic Whitlow) नामक संक्रमण भी हो सकता है। यह नाखूनों और उंगलियों छाले व फफोले की समस्या उत्पन्न कर सकता है। 
  • लंबे समय तक अंगूठा चूसने वाले बच्चे के हाथों की हड्डियां पतली, लंबी व टेढ़ी-मेढ़ी हो सकती है। 
  • ऐसा भी माना जाता है कि अंगूठा चूसने वाले बच्चे मानसिक कमजोरी वाले भी हो सकते हैं। 

वैसे तो बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत सामान्य व सुरक्षित मानी जा सकती है, लेकिन अगर समय रहते बच्चों का अंगूठा पीना कैसे छुड़ाएं, इसके उपाय न किए जाए, तो यह पेरेंट्स के साथ ही बच्चे के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। इससे जहां बच्चे को शारीरिक तौर पर परेशानी हो सकती है, वहीं सामाजिक तौर पर हमउम्र बच्चे उसका उपहास भी बना सकते हैं।

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