ek aurat se maa banane ka mera safar

ek aurat se maa banane ka mera safar

19 Apr 2022 | 1 min Read

Tinystep

Author | 2578 Articles


एक साल पहले जब मैंने पाया कि मैं माँ बनने जा रहीं हूँ, तो मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना न रहा! किसी जिंदगी को इस दुनियाँ में लाना, जो मेरे शरीर में पल रहा है, एक ऐसी भावना है, जो मेरे कल्पना से परे थी| इस खुशखबरी ने हमारे ज़िंदगी को खुशियों से भर दिया और वो भी 10 साल के लम्बे इंतज़ार के बाद! 10 साल!

मेरी माँ बनने की यात्रा!

इन गुज़रते 10 सालों में हम दोनों पति पत्नी ने तो अपना बच्चा पाने की सारी उम्मींदें ही छोड़ दी थी! ऐसा कहा जाता है कि चमत्कार होतें हैं, और हमारे जिंदगी में ऐसा ही हुआ| जब भी किसी बच्चे को माँ से लिपटते देखती, तो मन में हूक सी उठती| जब भी ऑफिस में बच्चों से जुडी चर्चा चलती, मुझे अपनी कमी का अहसास होता| 

अब मैं जानती हूँ कि मैं इस खबर के बाद खुश रहने वालीं हूँ| मैंने माँ बनने की अनुभूति की,जब मेरी प्रेगनेंसी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी| मुझे यह खबर ऑफिस के शुरुआती घंटे में ही मिल गयी थी| मैं आज भी 9 मार्च 2016 का वो दिन नहीं भूल सकती !मैं मीटिंग रूम में जा ही रही थी क मेरे मोबाइल में पैथोलॉजी लेबोरेटरी के खून के जाँच की रिपोर्ट आयी| सच बताऊँ तो उस दिन मीटिंग में मेरा ध्यान ही नहीं लगा | मेरा मन ख़ुशी से नाच रहा था| मीटिंग खत्म होते ही, मैंने सबसे पहले यह ख़ुशख़बरी अपने पति को दी और दूसरा कॉल मैंने अपने पापा को किय |

10 साल एक लम्बा इंतज़ार था हमारे लिए और मेरे लिए नौ महीने और इंतज़ार करना थोड़ा मुश्किल था| हर नयी माँ की तरह मैंने प्रेगनेंसी के खूबसूरत सफर की शुरुआत की और इसके हर पल का मज़ा लेना शुरू कर दिया| मेरे पति, परिवार, मेरे सहयोगी, मेरे पडोसी, मेरे ज़ीवन में जैसे वरदान की तरह थे! मेरी जरूरतों का हर वक़्त ख्याल रखा गया| मेरी उम्र ज्यादा होने के बावजूद मुझमे पल रही नन्हीं सी ज़ान मेरे शरीर में ठीक से पल-बढ़ रही थी| सच पूछो तो अपने अंदर एक जिंदगी का साँसे लेना एक अद्वितीय अहसास है! हम दोनों पति-पत्नी अपने बच्चे को देखने के लिए बहुत बैचैन थे|

ज़टिल परिस्तिथियों का सामना

29 सप्ताह में मेरी प्रेगनेंसी में जटिलताएँ आने लगीं| अचानक से मुझे लगा कि शरीर के अंदर बच्चे की गति कम हो गयी है| डॉक्टर ने मुझे NST स्कैन, हर दुसरे दिन सोनोग्राफी और सप्ताह में डोप्पलर कराने की सलाह दी| अगर कुछ जटिलता है तो हमें प्रे-टर्म डिलीवरी के लिए जाना होगा ,अब हम यह जानतें थे|

हम दोनों पति पत्नी बहुत तनाव में थे, पर कहीं न कहीं दिल में यह विश्वास था कि सब ठीक रहेगा| हमने डॉक्टर के दिए गए सारे निर्देशों का पालन किया| हम दिल ही दिल ईश्वर से मना रहे थे, कि यह 1 महीने का सफर ठीक से बीत जाए| ईश्वर दयालु है! उसने हमारी सुनी और हम इस मुश्किल वक़्त से निकल गए| इस समय आर्ट ऑफ़ लिविंग की टीम ने मुझे तनाव से दूर रखा|

किसी तरह यह 35 सप्ताह बीतें| इस समय एक और जटिलता का मैंने सामना किया और वो था मेरा बढ़ता हुआ ब्लड प्रेशर! हमें हर सुबह ब्लड प्रेशर लेने की सलाह दी गयी| अगर ब्लड प्रेशर तीन बार ऊपर रहा तो सिजेरियन ऑपरेशन की बात कही गयी| मुझे हॉस्पिटल में एडमिट कर लिया गया ताकि मेरे ब्लड प्रेशर पर नज़र रखी जा सके| सब ठीक रहने पर मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया| मेरा 36 सफ्ताह शुरू हो गया था| अचानक एक रात में मुझे बच्चे की गति कम लगी और हमने तुंरत डॉक्टर से संपर्क किया और मैं हॉस्पिटल में एडमिट हो गयी| नर्स के NSTस्कैन से हमें पता लगा कि सब ठीक है| डॉक्टर ने हमें तारीख तय करने की बात कही| मेरा सिजेरियन ऑपेरशन अगली सुबह होना था और मैंने वो सारी रात अपने बच्चे के सुरक्षित होने की दुआ माँगीं |

अंत में इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म हुईं ……..

आखिर हमारा इंतज़ार खत्म हुआ! मैं ऑपरेशन टेबल पर थी और डॉक्टर ने मुझे आँखे बंद रखने की सलाह दी थी, पर मेरे कान उनकी ही बातें सुन रहे थे| मैंने पहली बार अपने बच्चे का रोना सुना और मेरी सारी तकलीफ जैसे छू हो गयी| डॉक्टर ने मुझे बधाइयाँ दी और बतलाया कि मैं एक प्यारी सी बच्ची की माँ बन चुकीं हूँ| मुझपर एनेस्थीसिया का प्रभाव था, पर मैं सो ना सकी| मैं जब ऑपरेशन रूम से बाहर निकली तो हरे कपडे में लिपटी में अपनी बच्ची को देखा| मेरे हाथो में मेरी बिटिया को पाकर, ईश्वर को लाख लाख धन्यवाद किया, उसने मुझे इतनी प्यारी बेटी का माँ बनाया| मेरी बेटी दुनियाँ की सबसे खूबसूरत बच्ची है| मुझे लगा मेरा नया जन्म हुआ हो जैसे! अब मैं अपनी प्यारी सी शहज़ादी की माँ हूँ!

मुझे पता है कि मै परफेक्ट नहीं पर मैं उससे बहुत प्यार करती हूँ और पूरी कोशिश करुँगी कि मैं उसकी अच्छी माँ बनूँ| हर परिस्थिति में मै उसके साथ हूँ हरदम! 

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