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बच्चों के जीवन में परिवार का कितना योगदान होता है?

बच्चों के जीवन में परिवार का कितना योगदान होता है?

10 May 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 421 Articles

बच्चे के जीवन में परिवार का अहम योगदान होता है। एक कुम्हार की तरह परिवार बच्चे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करते हुए उन्हें व्यावहारिकता और संवेदनात्मकता के खांचे में ढालते हैं। 

किस समय बच्चों को किस बात का ज्ञान देना है, कितना ज्ञान देना है, किस बात को किस तरह से बताया जाना चाहिए, ये सब माता-पिता या परिवार ही तय करता है। बच्चे के लिए भरा-पूरा और उनका सहयोग किसी आशीर्वाद से कम नहीं।

आज इंटरनेशनल डे ऑफ फेमिलिज के मौके पर हम इसी विषय पर बात करेंगे। बेबीचक्रा आपको इस बात से वाकिफ कराएगा कि परिवार, बच्चों के जीवन में क्या भूमिका निभाता है। कैसे एक अच्छा परिवार बच्चे के विकास में और उसे दुनियादारी समझाने में मदद करता है।

बच्चों के जीवन में परिवार की भूमिका 

बच्चा आगे चलकर किस तरह से चीजों को संभालेगा, इसकी बुनियाम हम बचपन में ही रख देते हैं। बाहरी दुनिया का सामना करना हो या अपने जीवन में आने वाली परेशानियों से निपटना हो, इन सबके लिए बचपन से ही बच्चे तैयार हो जाते हैं। इसके लिए उन्हें स्वस्थ पारिवारिक माहौल की जरूरत पड़ती है।

सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि समाज का निर्माण करने में भी सबसे अहम भागीदारी परिवार की ही होती है। कैसे? देखिए बच्चे ही आगे चलकर समाज का हिस्सा बनते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से समाज कहलाते हैं। ऐसे में परिवार उनकी बढ़ती उम्र में जिस तरह से उन्हें बाहरी दुनिया से जोड़े रखता है या तोड़े रखता है, उसी पर बच्चे का सामाजिक विकास निर्भर करता है।  

घर के छोटे-बड़े कामों को निपुणता से पूरा करके बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। खामियों को जानकर उन्हें सुधारने और बेहतर रणनीति बनाने में बच्चे निपुण होते हैं। लेकिन, इन सबके लिए परिवार को बेहतर तरीके से बच्चों को चीजें बतानी और सिखानी जरूरी है।

थोड़ी-सी भी नकारात्मकता बच्चे को जीवनभर के लिए कायर या डरपोक बना सकती है। यही परिवार का योगदान नजर आता है। अंजाने में ही कई बार परिवार बच्चे के आत्मविश्वास को घटाने और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का काम करते हैं। इससे बड़े होकर उनमें खुद से अपने फैसले लेने की क्षमता और खुद का सम्मान करने का हुनर कहीं खो-सा जाता है। 

बच्चे को स्वस्थ पारिवारिक माहौल मिलता रहे, तो उसका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। जीवन की हर कड़ी मस्तिष्क से ही जुड़ी है। यही वजह है कि बच्चे को छोटी-छोटी चीजों की टेंशन देने से बचना चाहिए और उन्हें खुश मिजाज और जिंदादिली की अहमियत समझानी चाहिए।

बच्चे के जीवन में परिवार का योगदान
बच्चे के जीवन में परिवार का योगदान – स्रोत – पिक्सेल्स

अगर आसपास के लोग यानी परिवार के लोग हरदम हंसते-मुस्कुराते रहेंगे, तो बच्चे भी वही सिखेंगे। परिवार राई का पहाड़ बनाएगा, तो बच्चे भी वही सिखेंगे। परिवार एक पुरानी बात लंबे समय तक याद रखकर एक दूसरे से तानाकसी करेंगे, तो बच्चे भी वही सिखेंगे। इसलिए बच्चे का व्यवहार भी एक तरह से परिवार की आदतों पर ही निर्भर करता है। 

बच्चे को अच्छा परिवारिक माहौल न मिलने पर उसका सामाजिक जुड़ाव कम होने लगता है और उसे मस्तिष्क संबंधी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए कहा जाता है कि परिवार मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। सकारात्मक रवैये से बच्चे जीवन की हर मुश्किल का सामना करना सीख जाते हैं। वहीं, बचपन से देखते आ रहे नकारत्मक रवैये से उनके अंदर नकारात्मकता, डर, गुस्सा, असुरक्षा, ये सारी भावना जन्म लेने लगती है। 

इन सबसे ज्यादा जरूरी परिवार बच्चे की अच्छी पढ़ाई और खराब पढ़ाई दोनों में योगदान दे सकता है। बुरे माहौल से बच्चे की पढ़ाई प्रभावित होती है और अच्छे माहौल में बच्चा टेंशन फ्री होकर अच्छे से पढ़ सकता है। 

बचपन में परिवार से मिला सबकुछ बच्चे के साथ ताउम्र रहता है। चाहे वो प्यार हो, घर का माहौल हो, गुस्सा हो या नफरत। इसलिए बच्चे के सामने ऊंची आवाज में बात करना, लड़ाई-झगड़ा करने से परहेज करना चाहिए। बच्चे का दिमाग यह समझने लगता है कि परेशानी से निपटने के तरीके यही हैं, या तो गुस्सा करते हुए चीख या चिल्ला दो या फिर हिंसा करने लगो।

इसलिए बच्चों को ऐसे माहौल से दूर रखना चाहिए। वरना इसका असर उनके भविष्य में बनने वाले सभी रिश्तों पर पड़ सकता है। परिवार के इस तरह के व्यवहार से बच्चों के अंदर संवेदनशीलता भी खत्म व कम होने लगती है। कई बच्चे पारिवारिक माहौल के चलते खाना सही से नहीं खा पाते, पौष्टिक चीजें नहीं लेते, जिससे उनका शारीरिक विकास धीमा पड़ जाता है। परिवार में होने वाली हिस्सा या लड़ाई-झगड़े बच्चों को स्ट्रेस होने लगता है या फिर बच्चे सदमे में भी जा सकते हैं। 

परिवार का सकारात्मक व्यवहार बच्चे को गिली मिट्टी की तरह एक सुंदर सा आकार देता है। उन्हें जागरूक, जिम्मदेार और अच्छा इंसान बनाता है। परिवार का प्यार बच्चों को प्यार करना सिखाता है, परिवार के सभी सदस्यों द्वारा एक दूसरे को दी गई इज्जत उन्हें आदर-सम्मान का माहौल सिखाती है। एक दूसरे की मदद करते देख बच्चे भी अपने आसपास के लोगों की मदद करने के लिए आगे बढ़ते हैं। उनमें दयालुता का भाव आता है। 

परिवार के साथ समय बिताकर वो अपनों और रिश्तेदारों का महत्व समझते हैं। साथ खाने और हंसी-मजाक से वो जीवन जीने की कला सिखते हैं और दूसरों को सिखाते भी हैं। इस तरह परिवार सिर्फ एक बच्चे के जीवन में अहम योगदान नहीं रखता, बल्कि पूरे समाज के निर्माण में योगदान देता है।

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