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केवल माँ को नहीं बल्कि पिता को भी गर्भवस्था की बीमारियों से गुज़रना पड़ता है

केवल माँ को नहीं बल्कि पिता को भी गर्भवस्था की बीमारियों से गुज़रना पड़ता है

12 Apr 2022 | 1 min Read

Tinystep

Author | 2578 Articles

1. दर्द

बाप बनने पर मर्दों को दांत में दर्द, पीठ दर्द, सर दर्द, पैर दर्द और भी कई दर्द से गुज़रना पड़ता है| कई पुरुषों को ठीक उसी समय और उसी जगह पर दर्द होता है जहाँ उनकी पत्नियों को दर्द महसूस होता है| इस दर्द का कारण अब तक पता नहीं चला है लेकिन ऐसा मानना है की ये दर्द केवल साइकोलॉजिकल होता है|

2. वज़न बढ़ना

आपको ये लगता होगा की गर्भवस्था के समय बड़ा पेट माओं का ही होता है लेकिन गर्भावस्था के समय पिताओं का भी कुछ वज़न बढ़ता है| ये केवल कोर्टिसोल के कारण होता है क्योंकि उस समय कोर्टिसोल की मात्रा बढ़ी होती है और इस वजह से आपके पति को भूक लगती है जिसके कारण वो बिना कुछ सोचे ढेर सारा खाना खा बैठते हैं और इसी वजह से उनका वज़न बढ़ जाता है|

3. सेक्स करने की अधिक मनोकामना ना होना

गर्भवस्था के समय एक महिला का या तो सेक्स करने का बहुत मन हो सकता है या बिलकुल भी नहीं| यही चीज़ पिताओं के साथ भी है, उनका मूड अपनी गर्भवस्था पत्नी के मूड से बड़ा प्रभावित होता है और अगर उनकी पत्नियों को सेक्स करने का दिल नहीं करता तो उस समय उन्हें भी वैसा कुछ करने का दिल नहीं करेगा क्योंकि उनके दिमाग में ये बात भी चलती है की सेक्स कर के वो अपने होने वाले बच्चे को चोट नहीं पहुँचा सकते(हालंकि गर्भावस्था के समय सेक्स करने से बच्चे को कोई नुक्सान नहीं पहुचँता)

4. मूड स्विंग

आपके पति को यही ख्याल सताता है की बच्चे के आ जाने के बाद अब आप दोनों का जीवन पहली तरह नहीं रहेगा| और कुछ हद्द तक उनका जीवन अभी से ही बदलने लगता है- ख़ुशी के मारे कम नींद आना और कम नींद आने से ये अनिवार्य है की उन्हें तनाव होगा और एक डर रहेगा की वो किस प्रकार के बाप बनेंगे, क्या उनका आने वाला बच्चा उन्हें उसी तरह स्वीकार करेगा या उन्हें उसके लिए बदलना पड़ेगा| खुदको परफ़ेक्ट बनाने के तनाव के कारण आपके पति का मूड बदलता रहता है|

5. जी मचलना

सुबह की बीमारी केवल माओं को नहीं बल्कि होने वाले पिताओं को भी होती है, उन्हें भी उल्टियां होती हैं लेकिन ये एस्ट्रोजेन के कारण नहीं बल्कि उनके खाना खाने की टाइमिंग में बदलाव और तनाव के कारण होता है| इसका इलाज है की वो खुदको किसी व्यायाम में व्यस्त रखें, सही आहार लें, सही वक़्त पर खाना खाएं और कोई भी बात जिसके कारण उन्हें तनाव हो रहा है उससे दूर रहें, उसके बारे में अधिक ना सोचें|

 

अब आपको पता चलेगा की केवल माँ को नहीं बल्कि पिता को भी गर्भवस्था की बीमारियों से गुज़रना पड़ता है!

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