kya surya grahan ishwar ki adhwitiya shakti ka pratik hai

kya surya grahan ishwar ki adhwitiya shakti ka pratik hai

14 Apr 2022 | 1 min Read

Tinystep

Author | 2578 Articles

सूर्य ग्रहण वर्षों में एक बार होने वाली प्रक्रिया है। इसका अनुभव करना किसी अचम्भे से कम नहीं है। यह ईश्वर की असीमित ताकत का संकेत है। ईश्वर हमारे आस पास ही मौजूद है, बस हमारे पास भक्ति होनी चाहिए। 21 अगस्त में अमेरिका के निवासियों ने अद्भुत दर्शन प्राप्त किये। पिछली बार अमेरिका में 1979 में सूर्य ग्रहण हुआ था और अगला सूर्य ग्रहण 2024 से पहले नही होगा।

सूर्य ग्रहण क्या होता है?

 

सूर्य ग्रहण में चाँद सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य कुछ समय के लिए आधा या पूरा छुप जाता है। यह 3 घंटे तक कायम रह सकता है। परन्तु इस सोमवार, 21 अगस्त का सूर्य ग्रहण पूरे विश्व के किसी भी स्थान में 2 मिनट 40 सेकण्ड तक ही हुआ।

सूर्य ग्रहण से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:

1. पृथ्वी न सिर्फ एक ग्रह है जिसपर सूर्य ग्रहण पड़ता है परन्तु इस गृह से सूर्य ग्रहण देखा भी जा सकता है।

2. कुछ ईसाई धर्म के लोग ये समझेंगे की सूर्य ग्रहण मनहूसियत और इंसानों के अंत निकट होने का संकेत है परन्तु ज़्यादातर ईसाई लोग ये मानेगे की यह ईश्वर की विस्तृत शक्ति का संकेत है।

दरअसल ने मनुष्यों को पृथ्वी पर विनाश देखने के लिए नहीं बल्कि उन्नति और विकाशन अनुभव करने के लिए रखा है। सूर्य ग्रहण सुंदर और चमत्कारी दृश्य होता है। ईश्वर मनुष्य को कुदरत का करिश्मा और इससे सीख लेने के लिए ग्रहण दिखाता है।

3. सूर्य पर सीधा नहीं देखना चाहिए। यह हानिकारक होता है। अगर देखना है तो इसके लिए विशेष गॉगल्स आते हैं जिन्हे पहन कर ग्रहण देखा जा सकता है। सूर्य को सीधा न देखने का वैज्ञानिक कारण है उससे निकलनी वाली electromagnetic radiations जो मनुष्यों की दृष्टी पर दुष्प्रभाव डालती हैं।

4. सूर्य ग्रहण बहुत ही खूबसूरत दृश्य होता है क्योंकि यह सालों में एक बार होने वाली चीज़ है। इस दौरान सितारों की खूबसूरती अधिक निखर क्र आती है। आसमन ने तारों की चादर ओढ़ी है ऐसा प्रतीत होता है। यह एक जादुई पल होता है और स्वप्न जैसा आभास होता है।

5. कुछ ग्रहों पर चाँद ही नही होता जिस कारण वहाँ ग्रहण होने का सवाल ही नहीं पैदा होता। कुछ ग्रहों पर चाँद होता है परन्तु उसका आकार इतना छोटा होता है की वह सूरज ढकने के काबिल नहीं होता। परिणामस्वरूप कोई भी ग्रहण नही होता।

6. मरकरी और वीनस ग्रह पर चाँद नही है, इसलिए वहाँ कोई ग्रहण नही होता। मार्स पर दो चाँद हैं परन्तु वह इतने छोटे हैं की वह सूरज को ढँक नहीं सकते। जुपिटर, सैटर्न और नेप्ट्यून गृह के चाँद इतने बड़े हैं की वह सूर्य ग्रहण कर सकते हैं परन्तु उन ग्रहों पर गैस की भरी मात्रा के कारण उनकी ज़मीन पर खड़ा होना नामुमकिन है। इसलिए वहाँ आप सूर्य ग्रहण को पूर्ण रूप से देख नहीं देख सकते।

यह हमारा सौभाग्य है कि हम पृथ्वी पर जन्मे है जिस गृह पर रह कर हम सूर्य ग्रहण जैसे अतुलनीय दृश्य को अनुभव कर पाते हैं।

सूर्य ग्रहण के पीछे ईश्वरीय शक्तियों का हाथ माना है। इस अखंड ब्रह्माण्ड की डोर ईश्वर के हाथ में है। वही इस दुनिया को चला रहा है।

जी हाँ, यह सच है..कुदरत की इन शक्तियों को समझें। आप ज़रूर इसे शेयर करके लोगों को इसका वैज्ञानिक रूप दिखाएं।

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