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“अपने बच्चे के लिए दूसरों की नहीं खुद की सुनें”, इंफ्लुएंसर मृदुला खन्ना अरोड़ा

“अपने बच्चे के लिए दूसरों की नहीं खुद की सुनें”, इंफ्लुएंसर मृदुला खन्ना अरोड़ा

30 Jun 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 550 Articles

एक माँ की जिंदगी चुनौतियों से भरी होती है। इन चुनौतियों से जुड़ी कहानी जानकर हर दूसरी माँ अपने जीवन में कोई-न-कोई सीख जरूर ले पाती है। ऐसी ही कुछ चुनौतियां का सामना किया है मृदुला खन्ना अरोड़ा ने। इंफ्लुएंसर के रूप में करियर शुरू करना हो या एक सफल माँ बनना हो। ये सफर कभी आसान नहीं था। इसी वजह से आज हम मृदुला खन्ना अरोड़ा की जीवन की कहानी आपके लिए लेकर आए हैं।

मृदुला खन्ना अरोड़ा ने बताया, “मैं दिल्ली से हूँ और यही से मैंने इंग्लिश लिटरेचर और एमबीए किया। कई प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करने के बाद मुझे अपनी शादी के लिए जॉब छोड़नी पड़ी। मुझे शादी के बाद कुछ अधूरा-सा लगता था। मैं पूरे दो साल बाद किसी तरह ससुराल वालों से अपनी नौकरी पर जाने की मंजूरी ले पाई। मैं अपने पूरे परिवार की इकलौती महिला थी, जो  नौकरी पर जाती हूं। बतौर मैनेजर कुछ साल काम करने के बाद मुझे दोबारा नौकरी छोड़नी पड़ी। मैंने बेबी कंसीव कर लिया था और डॉक्टर ने मुझे ट्रैवल न करने की सलाह दी थी। 

रोज सताने वाला डर

मुझे फिर लगा कि अब क्या होगा। साल 2019 में मेरी बेटी जीवा पैदा हुई। उसके बाद फिर मुझे एक डर सताने लगा कि जब जीवा बड़ी हो जाएगी, तब मैं क्या करूंगी। जीवा कहेगी कि मम्मा आप हाउस वाइफ हो, आप कुछ काम नहीं करते हो। आप सिर्फ घर में ही बैठे रहते हो। मैंने बहुत से पैरेंट्स को इस स्थिति से गुजरते देखा है, जहां बच्चे उनसे ऐसे सवाल करते हैं। 

तभी मेरे भाई ने मुझसे पूछा कि आप ब्लॉगिंग पर अपना हाथ क्यों नहीं आजमाती हो। मैं हमेशा से अपनी चीजें निजी रखने वालों में से थी। इतनी पर्सनल इंसान का अपने अकाउंट को पब्लिक करके ब्लॉगिंग शुरू करना, यह काफी मुश्किल था।

मुझे थोड़ा साहस जुटाना पड़ा और मैंने ब्लॉगिंग का सफर शुरू कर दिया। उसके बाद एक वेबसाइट की तरफ से कॉन्टेस्ट हुआ, जिसे मैंने जीत लिया। मैं इकलौती ब्लॉगर थी, जिसे उस वेबसाइट ने फीचर किया था। यह मेरे लिए एक अचीवमेंट था। इससे मुझे काफी साहस मिला।

मृदुला खन्ना अरोड़ा
मृदुला खन्ना अरोड़ा अपने क्यूट-सी बेटी जीवा के साथ

किरण बेदी से मिला अवॉर्ड बना टर्निंग पॉइंट

साल 2021 मेरी लाइफ का टर्निंग पॉइंट था। इस समय मुझे किरण बेदी जी से ‘मॉम इंफ्लुएंसर अवॉर्ड’ मिला था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतनी बड़ी पर्सनेलिटी से कोई अवॉर्ड मिलेगा। इसके बाद से मुझे लोगों से बहुत मैसेज आते थे कि जीवा क्या खाती है, टॉडलर्स को क्या खिलाना चाहिए। तब मैंने एक सीरीज ही तैयार की थी। उसमें मैंने बताया था कि बच्चे को क्या खिलाना चाहिए। मैं अभी एक आर्टिस्ट मैनेजर भी हूं। मैं अपनी जॉब और ब्लॉगिंग दोनों को संभाल रही हूं।

आगे मृदुला ने कहा कि हर मॉम को ब्लॉगिंग करते समय किसी एक या दो मुद्दे पर ध्यान देते हुए अपना कंटेंट बनाना चाहिए। आप सबकुछ नहीं कर सकते हैं। अगर करेंगे, तो आपके दर्शक कंफ्यूज हो जाएंगे। मैंने अपनी आजतक की ब्लॉगिंग जर्नी से यही सीखा है।

लोगों से मिलने वाली सरहाना

बेबीचक्रा ने मृदुला खन्ना अरोड़ा से पूछा कि उन्हें इतना अच्छा कंटेंट बनाने की प्रेरणा कहा से मिलती है? इसपर मृदुला ने एकदम सीधा जवाब देते हुए कहा, “किसी भी जॉब में इतना फेम नहीं मिलता, जितना वीडियो ब्लॉगिंग से मिलता है। अब मुझे सभी लोग जीवा के नाम से जानते हैं। मिलने वाले बहुत-से लोग कहते हैं कि हमने आपको इंस्टाग्राम में देखा था। यही फेम और लोगों से मिलने वाली सरहाना मुझे वीडियो ब्लॉगिंग करने की प्रेरणा देती है।”

जीवा भी मुझे पूरी तरह शूट करती है। मैं जब भी वीडियो शूट करने के लिए जीवा से कहती हूं कि मुझे आपकी मदद चाहिए, तो वो कहती है मम्मी आप चाहते हो कि मैं शूट करूं।

मृदुला खन्ना अरोड़ा
मृदुला खन्ना अरोड़ा अपनी बटी जीवा को सहानुभूति और दूसरों की मदद करने वाला इंसान बनाना चाहती हैं।

प्रेगनेंसी के खट्टे-मीठे पल

इतनी बातचीत के बाद मृदुला से हमने उनकी प्रेगनेंसी जर्नी की बात की। उन्होंने बताया, “मेरी जर्नी अच्छी-बुरी दोनों रही है। जीवा जब मेरे गर्भ में थी, तो मुझे पूरे परिवार से काफी सपोर्ट मिला। प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव और परेशानियां तो लगी रहती थीं, लेकिन मेरे पति और परिवार ने इसे काफी आसान बना दिया। मैं उल्टी के चलते चार-से-पांच महीने तक कुछ भी ठीक से नहीं खा पाती थी। अजवाइन, हिंग गोली और संतरों से थोड़ी मदद मिलती थी। मेरे पति पैरों की मसाज करते था, ताकि मुझे थोड़ा आराम मिले”

प्रसव की बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं नॉर्मल डिलीवरी चाहती थी, लेकिन जीवा के गले में गर्भनाल लिपट गई थी। मेरा पेल्विक ज्यादा चौड़ी  साथ ही मेरे बगल में एक महिला का केस नॉर्मल डिलीवरी की जिद्द के चलते उनका केस खराब हो गया था। उससे मैं डर गई थी। मेरे पति ने भी सलाह दी कि नॉर्मल डिलीवरी की हम जिद्द नहीं करेंगे, हम सी-सेक्शन करवा लेते हैं। मैंने जीवा के बाद एक मिसकैरेज भी फेस किया है। वो मेरे लिए काफी कठिन समय था। मेरे परिवार के साथ की वजह से मैं उस दौर से उबरी हूं।”

मृदुला खन्ना अरोड़ा अपने पति और बेटे के संग
मृदुला खन्ना अरोड़ा अपने पति और बेटे के संग

धैर्य

प्रेगनेंसी के बाद उनमें क्या बदलाव आया यह सवाल जब मृदुला से किया गया, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि मेरे साथ थोड़ा उल्टा है। मैं डिलीवरी के बाद अपना धैर्य खोने लगी। वैसे मैं हमेशा से एक धैर्यवान (Patience) इंसान रही हूं। लेकिन पता नहीं क्यों मेरा धैर्य जवाब देने लग जाता था। लेकिन जब-जब मैं जीवा को देखती थी, तो थोड़ा धैर्य आ जाता था। 

मैं जीवा को बहुत डिसीप्लिन में रखने की कोशिश करती थी। मुझे फिर एहसास हुआ कि बच्चे को छोटी-सी उम्र से डिसीप्लिन सीखाने लगना काम नहीं करता है। हर माँ को समझना चाहिए कि हमेशा बच्चा आपकी सारी बातें सुने ऐसा नहीं होता। हमें उनके साथ धैर्यवान बनना होगा। हमें उनकी बातें, सुननी और समझनी होगी। साथ ही उनके दिमाग में क्या चल रहा है, यह पढ़ना और उन्हें समय देना यह जरूरी है।

दूसरों के लिए सहानुभूति रखना, लोगों को समझना, मदद करना, जो कुछ भी जिंदगी में मिला है उसका शुक्रगुजार होना। अपने आसपास के लोगों को थैंक्यू कहना। बच्चे पढ़ाई और दूसरी चीजें, तो समय के साथ सीख ही लेते हैं, लेकिन आजकल बच्चों में ये आदतें मीसिंग हैं। मैं बिल्कुल नहीं चाहती कि जीवा स्वार्थी बनें, जो आजकल के अधिकतर बच्चों में देखने को मिलता है।

बॉन्ड है जरूरी 

जीवा के साथ बॉन्ड को लेकर हुए सवाल पर मृदुला ने कहा, “जीवा के साथ उसके पसंदीदा कार्यक्रम देखकर मैं बॉन्ड बनाती हूं। वो मुझे अपने फेवरेट कैरेक्टर के बारे में बताती है और मैं उसे ध्यान से सुनती हूं। साथ में खाना और रात का स्टोरी टाइम, ये सब मेरे और जीवा के बीच बॉन्ड बनाता है। उसके साथ बॉन्ड बनाना कभी मुश्किल नहीं रहा। हर माता-पिता को अपने बच्चे के साथ बॉन्ड बनाना जरूरी है। तभी वो आपसे अपनी बातें शेयर करेंगे और आपके साथ कनेक्ट हो पाएंगे।

जीवा तो मैं जो भी करती हूं वो सबकुछ कॉपी करती है। इसलिए मैं हरदम अपने एक्शन और शब्दों पर बहुत ध्यान देती हूं। बच्चे एकदम कांच की तरह होते हैं। नाजुक और आप जो करते हैं, उसे दोहराने वाले। कभी-कभी तो समझना भी मुश्किल हो जाता है कि उन्होंने कोई बात आपसे सीखी है। हम तो चीजें भूल जाते हैं, लेकिन ये उनके ग्रोइंग ईयर हैं, इसलिए वो सब याद रखते हैं और ठीक वैसा ही करते हैं।

बच्चे के लिए अपने अंदर से आने वाली आवाज को सुनें। दादी-नानी-आंटी सब कुछ-न-कुछ बताएंगे, लेकिन आप अपने ऊपर भरोसा रखें। आप से ज्यादा अच्छा आपके बच्चे के लिए कोई नहीं सोच सकता है।

चित्र स्रोत : Mridula Khanna Arora

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