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जन्म के बाद शिशु में पीलिया का कारण, लक्षण और इलाज

जन्म के बाद शिशु में पीलिया का कारण, लक्षण और इलाज

24 Mar 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 549 Articles

हर माता पिता चाहते हैं कि उनका शिशु जन्म से ही स्वस्थ और सुरक्षित रहे। लेकिन अधिकांशत: नवजात शिशु में पीलिया होता है। यूं तो जन्म के दौरान शिशुओं में पीलिया होना काफी आम है और एक-दो हफ्ते में यह खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाता है। मगर ऐसा न होने पर पीलिया का इलाज करने की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से इस लेख में हम नवजात शिशुओं में पीलिया, इसके कारण, लक्षण के साथ ही पीलिया के उपचार के बारे में बता रहे हैं। 

शिशुओं में जॉन्डिस के कारण 

शिशु में पीलिया का कारण समझने के लिए इस लेख को आगे पढ़ें। इन कारणों में निम्नलिखित शामिल है।

  • लिवर की समस्या होने पर पीलिया का जोखिम बढ़ जाता है। दरअसल, लिवर शरीर से बिलीरुबिन (पीला पिगमेंटेशन) को फिल्टर करने का काम करता है। यदि लिवर ठीक से बिलीरुबिन फिल्टर नहीं कर पाता, तो पीलिया हो जाता है।
  • शिशुओं में पीलिया का कारण ब्रेस्ट मिल्क को भी माना जाता है।
  • यदि शिशु का जन्म समय से पहले हुआ है, तो उन्हें भी पीलिया का खतरा रहता है।
  • रक्त संबंधी समस्या होने पर पीलिया का जोखिम बढ़ सकता है।
  • कुछ शिशुओं में पीलिया होने का मुख्य कारण बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन को भी माना जाता है।
नवजात शिशु / स्रोत – पिक्साबे

नवजात शिशुओं में पीलिया के लक्षण 

पीलिया होने से पहले ही कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जिसपर ध्यान देकर समस्या के बारे  में पता लगाया जा सकता है। साथ ही समय पर जॉन्डिस का इलाज किया जा सकता है। पीलिया के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं। 

  • आंखों के सफेद भाग का पीला होना
  • हाथ-पैर और पेट का पीला दिखाई देना
  • पेशाब का रंग पीला होना
  • शिशु का सुस्त दिखाई देना
  • दूध कम पीना या भूख न लगना
  • बहुत ज्यादा रोना
  • उल्टी-मतली होना
  • बुखार आना

शिशुओं में पीलिया का इलाज  

शिशु को पीलिया की समस्या है, तो डॉक्टर इलाज की कुछ प्रक्रियाओं को अपना सकते हैं। पीलिया के उपचार कुछ इस तरह से किए जा सकते हैं। 

  • इम्यूनोग्लोबुलीन इंजेक्शन – इस इंजेक्शन को रक्त संबंधी विकार के कारण होने वाले पीलिया के लिए लगाया जाता है। यह शिशु के शरीर में एंटीबॉडीज के स्तर को बेहतर करने का काम कर सकता है। इससे पीलिया की स्थिति में सुधार हो सकता है।

इस थेरेपी के लिए शिशुओं को वेवलेंथ रे (Wavelength Ray) छोड़ने वाली मशीन के नीचे लिटाया जाता है। इस समय शिशु के आंखों को नुकसान न पहुंचे। इस बात को ध्यान रखते हुए आंखों पर पट्टी लगाया जाता है। इस थेरेपी को आधे घंटे तक किया जाता है।   

नवजात शिशु में पीलिया
नवजात शिशु में पीलिया का इलाज / स्रोत – फ्रीपिक
  • ब्लड चेंजेस – पीलिया की कुछ गंभीर स्थितियों का इलाज करने के लिए रक्त में बदलाव  किया जाता है। इस इलाज के लिए शिशु के रक्त को डोनर के रक्त के साथ बदला जाता है। इस प्रक्रिया को तब तक अपनाया  जाता है, जब तक शिशु के शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा कम न हो जाए।
  • बिली ब्लैंकेट फोटोथेरेपी – शिशुओं के पीलिया का इलाज करने के लिए बिली ब्लैंकेट फोटोथेरेपी से किया जा सकता है। इस इलाज के दौरान शिशु को एक फाइबरोपेटिक पैड में लपेटा जाता है, जो हाई इंटेंसिटी लाइट प्रदान करता है। इस लाइट से शिशु के पीलिया में सुधार हो सकता है।

नवजात शिशु में पीलिया कितने पॉइन्ट होना चाहिए | न्यूबॉर्न पीलिया लेवल चार्ट 

नवजात शिशु प्रति दिन लगभग 6 से 8 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बिलीरुबिन का उत्पादन करते हैं। यह वयस्कों में उत्पादन दर के दोगुना अधिक है। यह बिलीरुबिन का उत्पादन आमतौर पर जन्म के 10 से 14 दिनों में गिरना शुरू हो जाता है। आगे समझते हैं पीलिया चार्ट के बारे में, जिसे बिलीरुबिन की मात्रा के हिसाब से ही बनाया जाता है। नीचे बताया गया बिलीरुबिन व पीलिया का स्तर होने पर स्वस्थ शिशु को जांच की आवश्यकता पड़ सकती है।

बिलीरुबिन स्तरशिशु की उम्र
10 एमजी से ज्यादा24 घंटे से कम के नवजात शिशु
15 एमजी से ज्यादा24-48 घंटे तक के नवजात शिशु
18 एमजी से ज्यादा49-72 घंटे तक के नवजात शिशु
20 एमजी से ज्यादा72 घंटे से ऊपर के नवजात शिशु
न्यूबॉर्न पीलिया बिलीरुबिन चार्ट

नवजात शिशु में पीलिया कुछ दिनों में ठीक नहीं होता है, तो सतर्क हो जाएं। पीलिया एक खतरनाक समस्या है, जिसका समय रहते इलाज कराना जरूरी है। अगर किसी शिशु में पीलिया के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो उसे  तुंरत डॉक्टर को दिखाएं। साथ ही पीलिया के कारण को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज और देखभाल के तरीकों को अपनाएं।

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