normal delivery karvayein ya cesarean section Zindagi

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20 Apr 2022 | 1 min Read

Tinystep

Author | 2578 Articles

क्या आप आने वाले शिशु की डिलीवरी की तैयारी में जुटी हैं? क्या आपने नॉर्मल डिलीवरी और सीज़ेरियन सेक्शन(सी-सेक्शन) के बारे में सुना है? क्या आपको इन दोनों के बीच तय करने में मुश्किल हो रही है? क्या आप इनकी सुरक्षा को लेकर असमंजस में हैं?

चिंता न करें। इस लेख में आपको अपनी शंका का निवारण मिल जायेगा। हम आपको इन दोनों के बारे में बताएँगे। यह कैसे होती हैं, एक दूसरे से कैसे भिन्न हैं और इनके क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं।

प्राकृतिक प्रसूति यानि योनि मार्ग से बच्चे का जन्म

प्राकृतिक कुछ भी हो वह हमेशा लाभदायक ही होता है। योनि से बच्चे के सर का बाहर आना प्राकृतिक प्रसूति माना जाता है। ज़्यादातर माँयें भी ऐसे ही शिशु को जन्म देना चाहती हैं।

प्राकृतिक प्रसूति के फायदे:

1. इस डिलीवरी के बाद आपको हॉस्पिटल में कम दिन रहना पड़ता है।

2. माँ का बदन जल्दी ठीक हो जाता है।

3. इसमें आपके शरीर में कोई काट-पीट या टांकें नहीं लगेंगे।

4. आपके शरीर पर कोई भद्दे दाग नहीं आते।

5. किसी भी लोहे के औज़ार का इस्तेमाल न होने के कारण संक्रमण से बचाव हो जाता है।

6. चूँकि इसमें सर्जरी नहीं की जाती इसलिए माँ को गंभीर परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

अमेरिकन प्रेगनेंसी असोसिएशन के मुताबिक योनि मार्ग से हुई डिलीवरी से माँ की जान बच जाती है।

योनि प्रसूति के लिए माँ और बच्चे का शरीर प्राकृतिक रूप में खुद को ढालने लगता है। इसके अतिरिक्त शिशु जब माँ की योनि से निकलता है तब उसके फेफड़ों में जो गर्भ के समय का रक्त होता है वह अपनेआप बाहर आ जाता है। शिशु कुछ ज़रूरी बैक्टेरिया भी अंदर लेता है जो उसकी आँतों के लिए काम आते हैं।शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

नैचुरल डिलीवरी के कॉम्प्लीकेशन्स:

यह पूरी तरह आपके शरीर की परिपक्वता पर निर्भर करती है। अगर आपका शरीर शिशु की डिलीवरी के लिए तैयार नही है तो आपकी जान जाने का खतरा हो सकता है। योनि प्रसूति से मूत्र न रुक पाने की सम्भावना अधिक बढ़ जाती है ।

योनि प्रसूति के कारण आपको बाद में सेक्स में रूचि कम हो सकती है। इस डिलीवरी में चूँकि शिशु के सर को बर्थ कैनाल से बाहर आना पड़ता है इसलिए उसके सर पर दबाव पड़ सकता है। आपके शिशु को निकालने के लिए हाथ या फोरसेप का प्रयोग करना पड़ सकता है।

सीज़ेरियन सेक्शन यानि सी-सेक्शन:

आज कल इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। इसमें आपके पेट और गर्भाशय को थोड़ा काटकर उसमें से शिशु को निकाला जाता है। सी-सेक्शन प्लान किया हुआ सर्जिकल प्रोसीजर होता है।

सीज़ेरियन सेक्शन का लाभ:

इसमें डॉक्टर आपको एनेस्थेसिया दे क्र बेहोश कर देंगे और आपको दर्द महसूस नहीं होगा। होश में आने तक आपके शरीर में टांकें लग जायेंगे।

इसमें आपके बच्चे को आपके योनि मार्ग से निकलने का खतरा कम होगा। इस प्रकार उसके सर पर अधिक दबाव/stress नहीं पड़ेगा।

सी-सेक्शन का खतरा:

सी-सेक्शन में डिलीवरी की गलत तारीक गिनने से गलत समय पर ऑपरेशन होता है। ऐसे में न तो आपकी बॉडी जन्म देने के लिए और न ही आपका बच्चा जन्म लेने के लिए तैयार होता है।

इसे सफल बनाने के लिए आपके शरीर से अधिक रक्त स्त्राव होता है।

इसमें बच्चे को अनचाहे संक्रमण होने का खतरा होता है। ऑपरेशन के बाद माँ को अधिक समय तक हॉस्पिटल में रहना पड़ सकता है।

आपको पेट खाली करने में दिक्कत आ सकती है क्योंकि आपके bowel के कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। आपको डिलीवरी के बाद अवसाद/तनाव हो सकता है। आपको स्तनपान कराने में दिक्कत आ सकती है।

शिशु को जन्म देना का फैसला पूर्ण रूप से आपका निजी फैसला है। हम तो बस यहीं चाहेंगे की आप और आपके पति आपकी और बच्चे की स्थिति को समझते हुआ श्रेष्ठ फैसला लें। आप डॉक्टर से मश्वरा लेने में परहेज़ न कीजियेगा।

पसंद आया हो तो इसे अन्य माँओं के साथ ज़रूर शेयर करें।

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