shishu ki garbhnaal umbilical cord ko bachane ke 5 mukhy kaaran

shishu ki garbhnaal umbilical cord ko bachane ke 5 mukhy kaaran

19 Apr 2022 | 1 min Read

Tinystep

Author | 2578 Articles

आपको शिशु के जन्म के लिए कई फैसले लेने होंगे। इसमें से एक महत्वपूर्ण फैसला होगा उसके स्टेम सेल को बचाने का। लेकिन आप ऐसा क्यों करें इसका जवाब हम आपको देंगे।

कॉर्ड ब्लड क्या होता है ?

स्टेम सेल को समझने से पहले हमें कॉर्ड ब्लड को समझना होगा। शिशु जब माँ के गर्भ में पल रहा होता है तब उसके शरीर के बाहर जो सुरक्षा कवच बनता है उसे प्लासेंटा कहते हैं। प्लासेंटा के अंदर रक्त होता है जो शिशु को बाहरी झटकों से बचाता है व माँ के शरीर से पोषक तत्व भी प्रदान करता है। शिशु के जन्म पश्चात जो रक्त महिला के प्लासेंटा में रह जाता है उसे कॉर्ड ब्लड कहते हैं।

कॉर्ड ब्लड की खासियत

कॉर्ड ब्लड में स्टेम सेल पाए जाते हैं । इनमें नए सेल्स को जन्म देने की अद्वितीय शक्ति होती है। भविष्य में इन सेल्स को ब्लड बैंक से निकालकर डॉक्टर मरीज़ के शरीर में डालकर नए अंग, रक्त या कोशिका का निर्माण कर सकते हैं।

नवजात शिशु की मूल कोशिका(stem cell) को परिरक्षित (स्टोर) करने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं।

1. अपने परिवार के स्वस्थ्य भविष्य के लिए

स्टेम सेल्स गर्भनाल(umbilical cord) में भारी मात्रा में पाए जाते हैं। इन कोशिकाओं में आपके शिशु का रक्त, अंग, रोग-प्रतिरोधक क्षमता व मांसपेशियां पैदा करने की शक्ति होती है। यह आपके शिशु की चोटों और घाव को ठीक करने (भरने) में मदद करते हैं। यह शरीर के बिगड़ें अंगों का पुनःनिर्माण करने में सहायक होते हैं। स्टेम सेल्स को हॉस्पिटल में रखवा कर आप अपने परिवार के सदस्यों व शिशु का भविष्य सुरक्षित कर लेती हैं। गर्भनाल का रक्त कैंसर से लड़ने में मदद करता है। अक्सर रक्त कैंसर में मरीज़ को उसके घर के शिशु का स्टेम सेल दिया जा सकता है। यह सेल्स नए रक्त का पुनःनिर्माण करते हैं।

2. आज कल तकनीकी तरक्कियों के कारण कई रोग स्टेम सेल से ठीक किये जा सकते हैं

गर्भनाल के रक्त में मूल कोशिका होते हैं। यह 80 से भी ज़्यादा रोगों से निजात दिला सकते हैं। आज के दौर में डॉक्टर्स इससे कैंसर तथा अन्य रोग जैसे ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, स्व-प्रतिरिक्षित रोग जिसे ऑटो इम्यून डिजीज कहते हैं का इलाज करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इनसे बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने में सहायता मिलती है।

शोधकर्ता तो अब अधुमेह, पार्किन्सन डिसीज़, अल्ज़ाइमर डिजीज, टूटी हुई रीढ़ की हड्डी का इलाज स्टेम सेल द्वारा करने में लगे हैं।

3. ब्लड ट्रांसफ्यूजन में आपके शिशु का रक्त लेना ही सर्वश्रेष्ठ रहेगा

अगर जन्म के बाद शिशु को रक्त की ज़रूरत है तो उसके लिए एक ही ग्रुप का रक्त मिलना चाहिए। अगर देने वाले का रक्त दूसरे ग्रुप का है तो इससे शिशु को रक्त देना जानलेवा हो सकता है क्योंकि दूसरे ग्रुप का रक्त इंसान के शरीर में अनचाही प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है। प्रीमैच्योर बेबी को, एड्स से ग्रसित शिशु, लो बर्थ वेट बेबी हो तो इन सभी को मूल कोशिका द्वारा नया शुद्ध रक्त प्रदान किया जा सकता है।

4 . जेनेटिक बीमारी का इलाज मुमकिन है

आपके घर में अगर पहले किसी को कोई ला-इलाज या घातक बीमारी हुई है तो शिशु में इसका खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में शिशु का इलाज उसके पुनःनिर्मित स्टेम सेल्स से किया जा सकता है। अगर आपने अपने पहले शिशु के स्टेम सेल्स को बैंक में सुरक्षित रूप से रखवा दिया है तो भविष्य में आपके दूसरी संतान में होने वाली विकृति का बचाव उन सेल्स से मुमकिन है। क्योंकि कभी कभी शिशु के खुद के सेल्स से बेहतर उसके भाई-बहन के सेल्स होते हैं।

5. इनमें ग्राफ्ट के मुकाबले कम खर्चा होता है

सालों से नए अंग के पुनःनिर्माण में डॉक्टरों को ग्राफ्ट की सहायता लेनी पड़ती थी। इसमें जिस अंग का ऑपरेशन करना होता था वह किसी दुसरे व्यक्ति से ले कर एक अन्य मरीज़ के बदन में टाँके लगा कर फिट कर दिया जाता था। लेकिन अब स्टेम सेल की खोज से डॉक्टर को मरीज़ के बदन के स्टेम सेल्स को ही उसके बदन में पुनःर्जागृत करना होता है। मूल कोशिका सही वातावरण पाने पर खुद बढ़ने लगते हैं। इस क्रिया में ग्राफ्ट की तुलना कम खर्च आता है।

मूल कोशिका को शिशु के जन्म के कुछ ही मिनटों तक संभाल कर रखा जा सकता है। मूल कोशिका को लम्बे समय तक जीवित रखने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन में रखा जाता है । सरल शब्दों में इसका अर्थ हैं की डॉक्टर शिशु की मूल कोशिका निकालकर बहुत कम/ फ्रिज के तापमान में रख देते हैं। इससे वे संक्रमण या अन्य जीवाणुओं के आक्रमण से बच जाते हैं। इसलिए आपको तीसरे तिमाही में ही फैसला कर लेना चाहिए। इन कोशिकाओं को स्टोर कर के रखने के लिए विशेष स्टेम सेल बैंक होते हैं। और इसे आप एक स्मार्ट और उपयोगी निवेश मान सकती हैं।

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