मूत्र मार्ग संक्रमण और उसका इलाज

महिलाओं को मूत्र मार्ग संक्रमण (यू टी आई इन्फेक्शन) होने की अधिक संभावनाएं होती हैं, और कुछ को कई वर्षों तक यह समस्या रहती है | यदि आपको लगातार मूत्र मार्ग संक्रमण की परेशानी होती है तो आगे पढ़ें और जानें कि इस समस्या से दूर कैसे रहा जा सकता है |

 

मूत्र मार्ग संक्रमण क्या होता है ?

जब मूत्र मार्ग के आसपास कीटाणुओं की वृद्धि होती है तब यह संक्रमण की समस्या उत्पन्न होती है, जैसे की गुर्दा, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय, मूत्रमार्ग, इत्यादि | नैदानिक कारण से मूत्र मार्ग को दो हिस्सों में बांटा गया है - ऊपरी हिस्सा जिसमे गुर्दे और मूत्रवाहिनी हैं और निचला हिस्सा जिसमे मूत्राशय और मूत्रमार्ग आते हैं |

 

मूत्र मार्ग संक्रमण 50 वर्ष से कम आयु के पुरुषों और बालकों से अधिक महिलाओं और बालिकाओं को होता है | महिलाओं में मूत्रमार्ग छोटा होने की वजह से उन्हें मूत्र संक्रमण होने की सम्भावना अधिक होती है |

 

मूत्र मार्ग संक्रमण के कारण क्या हैं ?


मूत्र आमतौर पर जीवाणुरहित अथवा बंजर होता है | जब इसमें कीटाणु प्रवेश करते हैं तो संक्रमण शुरू हो जाता है | कीटाणुओं का प्रवेश मूत्राशय से होकर ऊपर मूत्रमार्ग में हो जाता है |

 

इस समस्या के कारण निम्नलिखित हैं

  • सबसे सामान्य कारण है एस्चेरिचिआ कोली नमक कीटाणु | यह कीटाणु सामान्यतः आँतों और गुदा के पास पाए जाते हैं | यह कीटाणु सम्भोग अथवा ठीक से सफाई न रखने के कारण मूत्रमार्ग के मुख तक पहुंच जाते हैं और वहां अपनी संख्या बढ़ा कर संक्रमण के लक्षण पैदा करते हैं |

 

नीचे लिखी हुई वजहों से मूर्त्र मार्ग संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है :

  • परिस्थितियां जो मूत्र मार्ग को बंद कर देती हैं, जैसे कि गुर्दे में पथरी होना
  • चिकिस्तिक परिस्थितियां जिनकी वजह से मूत्राशय पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता, जैसे कि रीढ़ कि हड्डी की चोट
  • महिलाओं में एस्ट्रोजन के प्रसार में कमी होने से माहवारी का रुक जाना
  • लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का क्षीण हो जाना
  • बहुत ही अधिक सम्भोग
  • पौरुष ग्रंथि का आकार बढ़ जाना या फिर सूजन होना
  • छोटे बच्चे जिन्हे शौच के बाद पोछने धोने में तकलीफ होती है
  • अस्पताल में भर्ती रोगी जिनके मूत्राशय में ट्यूब लगी हो

 

मूत्र संक्रमण के लक्षण क्या हैं ?

  • तेज़ बुखार
  • ठण्ड लगना
  • दिमाग घूमना
  • उबकाई आना अथवा उल्टियां होना
  • पेट में किनारे पर दर्द होना, पेडू या फिर कमर के एक तरफ
  • बार बार पेशाब आना
  • पेशाब में रक्त का होना
  • पेशाब करते समय जलन और दर्द होना

 

इस संक्रमण का सबसे अच्छा इलाज क्या है ?

आमतौर पर मूत्र संक्रमण का इलाज सामान्य चिकित्सक या फिर प्रसूतिशास्री करते हैं | यदि संक्रमण बार बार हो रहा है तो आपके चिकित्सक आपको किसी विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं | साधारण या जटिल संक्रमण कर इलाज एंटीबायोटिक्स से होता है | पर कौन सी एंटीबायोटिक और कितने दिन के लिए देनी है, यह रोगी पर निर्भर होता है | चिकित्सक सबसे अच्छी और मारक दवाई देगा जो हर रोगी के अनुसार होगी | आमतौर पर तीन दिन की दवा बहुत होती है पर कुछ रोगियों को सात दिन दवाई खानी पड़ सकती है | बच्चों को दस दिन के एंटीबायोटिक कोर्स दिए जाते हैं |

 

 

मूत्राशय मार्ग को स्वस्थ और स्वच्छ कैसे रखें ?

  • महिलाओं, और ख़ास तौर पर युवतियों को शौच के बाद अपने योनिक क्षेत्र को आगे से पीछे तक ठीक से पोछना चाहिए | इससे कीटाणु गुदा से होकर मूत्र मार्ग में प्रवेश नहीं कर पाते
  • हर सम्भोग की क्रिया के बाद मूत्राशय को खाली अवश्य करें
  • पानी अथवा अन्य तरल पदार्थों का अधिक सेवन करने की आदत डाल लीजिये
  • कपास के ढीले अंतर्वस्त्र पेहेनना आवश्यक है क्यूंकि इससे गुप्त क्षेत्रों में नमी नहीं आती जिससे कवक संक्रमण बढ़ नहीं पाता

 

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स्वस्थ जीवन

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Comments (3)



Anju Srivastava

Pragnancy ke 7th week me ribs me pain hona nd baar baar toilet Ana kya common h

Piyush Anajwala

15 hafteme Kaya mahesus hota he

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