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विटामिन डी के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

विटामिन डी के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

7 May 2018 | 1 min Read

Aditi Ahuja

Author | 72 Articles

कुछ साल पहले जब लोग पोषण की कमी से संबंधित बीमारियों के बारे में बात करते थे, तो चर्चा और संबंधित चिंता एनीमिया, स्कार्वी, बेरी-बेरी आदि जैसी बीमारियों पर केंद्रित थी। 20 वीं शताब्दी के एक बड़े हिस्से में वैज्ञानिकों, चिकित्सा समुदाय और सरकारें इन बीमीरियों के उन्मूलन की दिशा में काम कर रही थीं। लेकिन एक और विटामिन की कमी है जो हर किसी के लिए बहस और चिंता का विषय बन गई है। अगर हम अपने देश के बारे में बात करते हैं, विटामिन डी या “सनशाइन विटामिन” की कमी महामारी के स्तर तक पहुंच गई है। कई सर्वेक्षणों के अनुसार, विभिन्न संगठनों द्वारा समय-समय पर किए गए परीक्षणों और रिपोर्टों से पता चलता है कि लगभग 70% भारतीय विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं और 15% में यह अपर्याप्त है । निचले आयु वर्ग (यहां तक ​​कि छोटे बच्चों और मध्यम आयु की महिलाएं) में मरीजों की बढ़ती संख्या है जो ऑस्टियोपोरोसिस या मुलायम हड्डियों और थकान संबंधी मुद्दों से पीड़ित है । डॉक्टरों ने इस संक्रमण को अन्य संक्रमणों और कैंसर, हृदय रोग और तपेदिक जैसी बीमारियों से भी सहसंबंधित किया है जो हमारे देश में एक और महामारी है।

 

क्या यह अजीब बात नहीं है कि यूरोप या अमेरिका के विपरीत जहां धूप सीमित है, हमारे देश में प्रचुर मात्रा में धूप है और फिर भी हम इसकी कमी से जूझ रहे हैं ? क्या इस विटामिन के बारे में अल्प जानकारी और घरों के अंदर बंद रहने की आदतें इसके लिए ज़िम्मेदार हैं ? तो ऐसा क्या है जो आपके और मेरे जैसे साधारण जनमानस को विटामिन डी के बारे में पता होना चाहिए? इस लेख में मैंने कुछ प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया है जिसके माध्यम से हम इस विषय के बारे में और जान सकते हैं।

 

विटामिन डी क्या हैं और इसके प्रकार क्या हैं ?

विकिपीडिआ के अनुसार विटामिन डी एक फैट (वसा) में घुलने वाले सेकोस्टेरॉइड्स का समूह हैं जिसका काम मानव शरीर में आँतों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फेट का अवशोषण करना है जो की हड्डियों के सामान्य विकास और अन्य जैविक प्रभावों के लिए आवश्यक है |  मनुष्यों में इस समूह में सबसे महत्वपूर्ण यौगिक विटामिन डी 3 (cholecalciferol) हमारे शरीर द्वारा सूरज की रोशनी और डी 2 (ergocalciferol) के संपर्क के माध्यम से संश्लेषित किया जाता है जिसे हम भोजन से प्राप्त कर सकते हैं। इस विटामिन का प्रमुख प्राकृतिक स्रोत डी 3 का संश्लेषण है, जो सूरज के संपर्क में होता है और बहुत कम खाद्य पदार्थों में यह होता है।

 

विटामिन डी महत्वपूर्ण क्यों है? गर्भवती महिलाओं और नई नवेली माताओं के लिए यह महत्वपूर्ण क्यों है?

विटामिन डी शरीर में कैल्शियम अवशोषण और चयापचय में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह प्रतिरक्षा कार्य को भी बढ़ावा देता है, कैंसर जैसी घातक बीमारियों के खतरे को दूर करता है और न्यूरोलॉजिकल विकारों और ऑटोम्यून्यून बीमारियों को दूर रखने में भी  मदद करता है। यह शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है (टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम करता है) और अच्छे दाँतों के गठन और मौखिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। इसकी कमी मुख्य रूप से छोटे बच्चों में रिकेट्स (घुमावदार हड्डियां)  और वयस्कों, खासकर रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के लिए ज़िम्मेदार हैं । हड्डियों के असामान्य विकास के अलावा दुखती मांसपेशियों, नरम हड्डियां (फ्रैक्चर के कारण), संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता कुछ अन्य समस्याएं हैं जो इसकी कमी के कारण होती हैं ।

 

हालांकि प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर में इस विटामिन की सही मात्रा में आवश्यकता होती है, परन्तु गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को अपने स्वयं के कल्याण  और बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए इसकी अधिक आवश्यकता होती है। एक गर्भवती महिला में अधिक पेशाब करने की आवश्यकता और भ्रूण के पोषण की वजह से अधिक आवश्यकता होती हैं । नवजात शिशु और भ्रूण को यह अपनी मां के द्वारा मिलता है। अध्ययनों से पता चला है कि गर्भावस्था में इस विटामिन की कमी से प्री-टर्म लेबर, प्री एक्लेम्पसिया और मां और बच्चे में प्रसव के दौरान या उसके बाद संक्रमण की संभावनाएं होती हैं। बच्चे के जन्म के समय कम वजन, नवजात शिशुओं में कमजोर हड्डियों, अनुचित भ्रूण वृद्धि और बच्चों में दातों का जल्दी सड़ना इसी की कमी से जुड़ा हुआ है। वयस्कों के लिए सामान्यतः दैनिक रूप से 600 अंतर्राष्ट्रीय इकाइयों या 15 एमसीजी विटामिन डी की आवश्यकता है, इस पर बहुत सारे शोध और बहसें हुई है कि क्या यह मात्रा गर्भवती महिलाओं के लिए पर्याप्त है या उन्हें और अधिक की आवश्यकता हैं ? लेकिन ऐसे कारक हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि इस विटामिन की व्यक्तिगत रूप से कितनी ज़रुरत है, जिन्हें हम अगले प्रश्न में देखेंगे।

 

ऐसे कारक जो निर्धारित करते हैं कि विटामिन डी की किसको कितनी जरूरत है:

  1. आप कहाँ रहते हैं पहला कारक है? प्रचुर मात्रा में धूप वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में सूर्य के संपर्क में आने की संभावना अधिक होती है और इस प्रकार स्वाभाविक रूप से इस विटामिन का अधिक संश्लेषण होता है।
  2. यह सर्वविदित है कि सूर्य या यूवी किरणों के अत्यधिक संपर्क में आने से कैंसर का खतरा बन जाता है। लोग आमतौर पर सूरज के संपर्क में डरते हैं, लेकिन, सही समय पर सूर्य की रौशनी में रहने से इस समस्या को हल किया जा सकता हैं |
  3. त्वचा पिग्मेंटेशन एक और कारक है। सांवली त्वचा वाले लोगों में अधिक मेलेनिन होता है, जो शरीर में विटामिन डी के गठन को रोकता है, जिसका अर्थ है कि गोरी त्वचा वाले लोगों को सांवले की तुलना में सूर्य में कम समय व्यतीत करने की आवश्यकता होती है ताकि विटामिन डी बराबर मात्रा में मिल सके।
  4. आयु, मोटापे (वसा ऊतक विटामिन डी के गठन को रोकते हैं), प्रदूषण कुछ अन्य कारक हैं जो लोगों में विटामिन डी की परिवर्तनीय आवश्यकता के लिए जिम्मेदार होते हैं।

 

तो, अब तक हमने देखा है कि विटामिन डी एक आवश्यक पोषक तत्व है और अधिकांश लोगों में इसकी कमी है। तो इसकी कमी को पूरा कैसे किया जाए यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है?

 

  1. जब सूर्य अपने चरम पर नहीं होता हैं तब उसकी रौशनी में बैठना पहला तरीका हैं । प्रत्येक व्यक्ति और विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और नई माताओं को रोजाना कम से कम 5-10 मिनट सूर्य के संपर्क में आने की कोशिश करनी चाहिए। यहां तक ​​कि उनके नवजात बच्चों को भी सूर्य के प्रकाश के संपर्क में लाया जा सकता है। आप कहाँ रहते हैं, इस पर काफी कुछ निर्भर है कि चुने गए समय सुबह 8 बजे से 12 बजे तक बिना सनस्क्रीन के हाथ, पैर और चेहरे को बिना ढंके सूर्य के समक्ष होना चाहिए।

 

  1. विटामिन डी का दूसरा स्रोत कुछ निश्चित खाद्य पदार्थ होते है। अंडा का योल्क अथवा जर्दी,  सल्मॉन मछली, कॉड लिवर तेल, सार्डिन मछली आदि कुछ माँसाहारी विकल्प हैं। शाकाहारियों के लिए, दूध के लिए जो कि विटामिन युक्त होता हैं और अन्य खाद्य पदार्थों जैसे कि रस, अनाज, आदि का सेवन उचित हैं । उत्पाद लेबल की जांच करने पर यह जानकारी मिल जाती है। वेगन्स और जो लोग दूध नहीं लेते हैं, उनके लिए मशरूम और सूरजमुखी के बीज उपयुक्त है क्यूंकि इनमें भी यह विटामिन पाया जाता हैं |

 

वास्तव में वह भोजन विकल्प सीमित हैं जिनसे आपको विटामिन मिलता है, तो यदि आवश्यकता हो, तो इसकी कमी की जांच करवा सकते हैं और चिकित्सकीय सलाह पर सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं |

 

इस प्रकार, जहां तक ​​विटामिन डी का संबंध है, ये कुछ चीजें हैं जिन्हें हमें ध्यान में रखना चाहिए । बचपन में और यहां तक ​​कि छोटी उम्र में समय पर हस्तक्षेप से इसकी कमी से उत्पन्न समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह ज्ञान भ्रूण के उचित विकास में मदद कर सकता है और जन्म समय की संभावित जटिलताओं को भी दरकिनार किया जा सकता है और नई माएँ स्वयं के साथ-साथ अपने बच्चों की भी अच्छी देखभाल कर सकती हैं। मुझे आशा है कि यह जानकारी कई लोगों की मदद करेगी।

 

अस्वीकरण: लेख में दी गई जानकारी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के लिए एक विकल्प के रूप में लक्षित या अंतर्निहित नहीं है। हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लें।

 

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