प्रसवोत्तर मालिश के फायदे

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प्रसवोत्तर मालिश के फायदे

 

प्रसवोत्तर मालिश क्या होती है?

 

नवजात शिशु को जन्म देने के बाद नई माँ को रोजाना ४० दिनों तक पुरे शरीर की मालिश की जाती है, इसे ही प्रसवोत्तर मालिश कहा जाता है।

 

ऐसी बहुत सी मालिशवाली महिलाएँ हैं, जो प्रसव के बाद की मालिश और  नवजात शिशु की मालिश में निपुण होती हैं। घर पर वे नवजात शिशु की देखभाल से जुड़े कामों में भी हाथ बंटाती हैं। वे आमतौर पर पहले पैरों से मालिश करना शुरु करती हैं और फिर शरीर के ऊपरी हिस्सों की ओर जाते हुए सिर तक मालिश करती हैं। प्रसवोत्तर मालिश नई माँओं को आराम पहुंचाने की एक शानदार परंपरा है।

 

नवजात शिशु के घर में आ जाने की व्यस्तता के बीच यह मालिश नई माँ के लिए काफी आरामदायक हो सकती है। लेकिन, आपको कुछ मदद का इंतजाम करना होगा, क्योंकि घर में नवजात शिशु के साथ अपनी मालिश के लिए पूरा एक घंटा निकालना मुश्किल हो सकता है। अगर, आपकी मालिश के दौरान शिशु की दादी-नानी या फिर कोई अन्य विश्ववसनीय व्यक्ति शिशु की देखरेख कर सके, तो आप चिंतामुक्त हो सकती हैं।

 

प्रसवोत्तर मालिश के क्या फायदे हैं?

 

प्रसव के बाद मालिश करवाना निम्नांकित तरीकों से फायदेमंद साबित हो सकता है:


शरीर में जिन जगहों पर दर्द है, वहां मालिश से आराम मिलता है। साथ ही मांसपेशियों का कसाव भी कम होता है। शिशु के जन्म की पूरी प्रक्रिया से आपके शरीर पर काफी जोर पड़ता है, खासकर कि पेट, पीठ के निचले हिस्से और कूल्हों पर। अगर आप सही अवस्था में शिशु को स्तनपान नहीं करवाती हैं, तो आपकी पीठ में ऊपर की तरफ भी दर्द हो सकता है।

 

मालिश से मांसपेशियों में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। माना जाता है कि यह प्रसव से उबरने में भी मदद करता है, साथ ही आपकी सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बेहतर करता है।आप काफी आराम महसूस करती हैं।

 

मालिश आपके शरीर को एंडोर्फिन बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह प्राकृतिक दर्द निवारक और अच्छा महसूस कराने वाला हॉर्मोन है, जिसका प्रवाह दिमाग से होता है। यह आपको अच्छी नींद पाने में भी मदद कर सकता है।

 

अवरुद्ध नलिकाओं को खुलने और गांठों या कठोर जगहों के ढीला होने में मदद मिलती है। साथ ही, यह स्तनों की सूजन (मैस्टाइटिस) के खतरे को भी कम करता है। हालांकि, बलपूर्वक मालिश करने से मैस्टाइटिस की स्थिति बिगड़ भी सकती है, क्योंकि यह रिस रहे दूध को स्तन उत्तकों के भीतर ढकेल देती है। यदि आपका ​सीजेरियन ओपरेशन हुआ है, तो घाव की जगह पर मालिश न करवाएं।

 

सीजेरियन के बाद मालिश के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए, हमारे इस लेख में जानें।

 

लसिका प्रवाह को उत्तेजित कर सेहत और प्रतिरक्षण क्षमता को बेहतर बनाता है। बेबी ब्ल्यूज और प्रसवोत्तर अवसाद का सामना करने में सहायता मिलती है। मालिश, तनाव दूर करने और मनोदशा को बेहतर करने का अच्छा तरीका है।

 

और कुछ नहीं, तो प्रसवोत्तर मालिश आपको कुछ समय अकेला रहने का अवसर तो देती है। यह अंतराल आपको शिशु और घर की कई जरुरतें पूरी करने की शक्ति प्रदान करेगा। और यदि आपका शिशु सो रहा है या फिर कोई और उसकी देखभाल कर रहा है तो यह आपको भी तनावमुक्त होकर सोने में मदद करेगी, ताकि आप भी अपने शिशु के साथ थोड़ी झपकी ले सकते है ।

 

प्रसवोत्तर मालिश के लिए कौन सी अवस्थाएं सबसे अच्छी हैं?

 

कोई ऐसी एक अवस्था नहीं है, जो बेहतर रहती है। जैसे-जैसे आपकी मालिशवाली शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से की मालिश करती जाती है, आपको इसी अनुसार अपनी अवस्था भी बदलनी पड़ती है।

 

आपके अपने आराम के हिसाब से भी अवस्था में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर कुछ मांओं को मुंह नीचे की तरफ करके पेट के बल लेटकर मालिश करवाना अच्छा लगता है। मगर कई मांओं को यह अवस्था असहज लगती है, खासकर उनके स्तन ​अतिपूरित हों या फिर उनमें से रिसाव होता हो तो।

 

करवट लेकर लेटना या बैठी हुई अवस्था आमतौर पर उनके लिए अच्छी रहती है, जिनका सीजेरियन ओपरेशन हुआ हो। कुछ माताओं को अपनी पीठ, स्तनों और पेट को सहारा देने के लिए अतिरिक्त तकिये लगाना बेहतर हो सकता हैं।

 

महत्वपूर्ण यह है कि यदि आप किसी अवस्था में असहज महसूस कर रही हों, तो इस बारे मे मालिश वाली को बताएं। साथ ही, यदि दबाव बहुत ज्यादा लग रहा हो या मालिश से आपको असहजता हो रही हो, तो भी मालिशवाली को इस बारे में कहें।

 

मैं प्रसवोत्तर मालिश के लिए समय कैसे निकालूं?

 

शिशु के जन्म के बाद आप ज्यादा व्यस्त हो जाएंगी। आपकी जिंदगी अब शिशु की नैपी बदलने, देर रात में उठकर दूध पिलाने, शिशु को नहलाने और उसकी मालिश करने, गंदे कपड़े धोने और ऐसे बहुत से कामों में बंध जाएगी। इन सब चीजों की व्यस्तता आपके लिए काफी तनावपूर्ण हो सकती है।;

 

इसलिए अपने लिए कुछ समय निकालना बहुत जरुरी है, चाहे यह कितना भी मुश्किल लग रहा हो। आप निम्नांकित कुछ चीजें आजमा सकती हैं:

 

मदद के लिए कहें: जब आपको मालिश करवानी हो, तो अपने पति, माँ, सास या परिवार के किसी अन्य विश्वसनीय सदस्य से शिशु की देखभाल के लिए मदद लें। या फिर मालिश तब करवाएं, जब शिशु सो रहा हो। आप भी शायद यह देखकर आश्चर्य करेंगी कि कितने सारे लोग आपकी मदद को तैयार हैं। शिशु की देखभाल की जिम्मेदारी किसी विश्वस्नीय व्यक्ति को सौंपकर आप भी​ चिंतामुक्त हो सकेंगी। निश्चित है कि मालिश करवाते समय आप किसी भी बारे में चिंता तो नहीं करना चाहेंगी।

 

सही समय चुनें: शिशु को दूध पिलाने और उसकी नैपी और कपड़े बदलने के तुरंत बाद ही मालिश करवाना शुरु करें। अगर, शिशु की सारी जरुरतें पूरी हो गई हों, तो शायद फिर वह एक या दो घंटे तक आपसे कुछ नहीं चाहेगा। इस तरह आपके लिए शिशु को कुछ समय के लिए परिवार के किसी सदस्य या किसी विश्वसनीय आया के पास छोड़ना आसान रहेगा।

 

यह भी पढ़ें: सी सेक्शन के बाद प्रसव मालिश की संस्तुति

 

 

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