सयुंक्त परिवार और संभोग की दुविधा

जैसे जैसे समय बदल रहा है , सयुंक्त परिवार कहीं विलुप्त होते जा रहे हैं ,और एकाकी परिवारों की संख्या बढ़ती जा रही है। पर मैं हमेशा से एक बड़े परिवार का हिस्सा रही। मायके में माता पिता , भाई बहन , चाचा चाची सबके बीच पली बड़ी। पढाई के साथ साथ जैसे की हर लड़की के मन में बचपन से अपने सपनो के राजकुमार के सपने सजने लगते हैं , मेरे भी थे। मैंने अपनी पढाई पूरी की , अच्छी नौकरी भी की कुछ साल और उसके बाद मेरे लिए एक रिश्ता आया। और हम दोनों ने एक नज़र में एक दूसरे को पसंद कर लिया था। सौभाग्यशाली रही मैं ,की ससुराल में भी एक बड़ा परिवार मिला।

शुरआती समय शहर से कई बार बाहर घूमने जाते हुए बीत गया और शादी के दो साल के अंदर ही मैं एक प्यारी सी बिटिया की माँ बन गयी। मेरे और मेरे पति दोनों के लिए ये नयी ज़िम्मेदारी और माता पिता का दायित्व निभाना कठिन लग रहा था। क्यूंकि घर में हम दोनों ही सबसे छोटे थे। पर जैसे की मैंने कहा सयुंक्त परिवार में रहने के बहुत से फायदे हैं , बच्चे कब दादा दादी और बुआ चाची के साथ खेलते खेलते बड़े हो जातें हैं , पता ही नहीं चलता। पर साथ ही बड़े परिवार की ज़िम्मेदारियाँ भी कम नहीं होती , सारा दिन कैसे घर के काम निपटाने में बीतता है , पता नहीं चलता। मेरी बिटिया एक साल की हो चुकी है ,उसका खाना , उसकी देखभाल की फ़िक्र ने हम दोनों पति पत्नी को इतना मशरूफ कर दिया था की साथ बैठकर चाय की एक चुस्की लेना भी मुमकिन नहीं था।

ऊपर से इनका बार बार काम के सिलसिले में शहर से बाहर जाना , वो भी १५ या २० दिन के लिए ! गुड़िया के होने से पहले अकसर मैं भी उनके साथ चली जाया करती थी ,इसी बहाने हम दोनों को वक़्त एक दूसरे के साथ वक़्त बिताने का मौका मिल जाता था। मगर अब ऐसा नहीं हो पाता। वो भी अब कुछ कहते नहीं हैं , या तो अपने काम के सिलसिले में बाहर रहतें हैं या फिर घर आकर गुड़िया और बाकी परिवार के साथ बातें करते हैं ! शायद आज भी समाज में ये धारणा है ,की संभोग केवल बच्चे के जन्म के लिए किया जाता है !

मैं उनसे अपने मन की करने का प्रयास करती हूँ ,मगर उनके पास समय होता ही कहाँ है ? गुड़िया रात को कभी भी उठकर रोने लग जाती है , इसलिए वो अब किसी एक या दूसरे कारण से कमरे में ज़्यादा रहते भी नहीं। अक्सर माँ , मैं और गुड़िया होते हैं कमरे में। हमारा शादीशुदा जीवन खत्म सा हो चुका था। 

एक दिन दोपहर में गुड़िया के सो जाने के बाद मैंने मेरी सहेली फ़ोन लगाया , बातों बातों में मैंने उसे अपने मन की बात कही ,की कैसे गुड़िया ले जन्म के बाद से हमारी शादीशुदा ज़िंदगी से संभोग बिल्कुल जा चुका है । समय की कमी हो या इनका अक्सर शहर से बाहर जाना , संभोग हमारे जीवन से जा चुका था। मेरी सहेली ने मेरी सारी बात बहुत ध्यान से सुनी और समझाया की मैं थोडा धैर्य रखूं , बच्चे के जन्म के बाद अक्सर ऐसे बदलाव पति पत्नी के जीवन में आते हैं और ये महज़ मन को रखने वाली बात नहीं है बल्कि कई विशेषज्ञों द्वारा कई शोधो में प्रमाणित भी है। जिस तरह बच्चे के जन्म के बाद एक स्त्री के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है ,उसी तरह एक पुरुष के विचारों में भी बदलाव आते हैं।

एक स्त्री के शरीर में आये बदलाव और बदलते मनोभावों को अक्सर आसानी से समझा जा सकता है , मगर पिता बनने के बाद एक पुरुष के मन में हो रही उथल पुथल को समझना हम सबकी समझ से परे है। जैसे एक नई माँ की ज़िम्मेदारी अब उसका पति और घर के बाकि सदस्य ही नहीं , बल्कि बच्चा भी होता है , ठीक वैसे ही पिता बनने बनने के बाद एक पुरुष खुद को पिता के रूप मई पहले देखतें हैं और एक पति के रूप में बाद में। बात सिर्फ समझ की है , थोड़ा आत्मविश्वास , थोड़ा धैर्य किसी भी समस्या का हल कर सकता है।

मेरी सहेली के द्वारा समझायी हुई कुछ आसान सी बातों ने मुझे मेरे पति को और बेहतर तरीके से समझने का मौका दिया। अब उनका यूँ हमेशा गुड़िया के साथ समय बिताना और उसके भविष्य की फ़िक्र करना मैं आसानी से देख और समझ पा रही थी। जैसे जैसे थोड़ा और समय बीता और गुड़िया २ साल की हुई , हमने फिर से बाहर घूमना शुरू किया , एक दूसरे को समय देना शुरू किया। बच्चे के आने बाद बदलती ज़िम्मेदारियाँ और व्यस्तता के चलते कभी कभी हमे मन में लगने लगता है की शादीशुदा जीवन बहुत नीरस हो चुका है , मगर ऐसा नहीं है , समय के साथ चीज़े सुधरती चली जाती हैं ,ज़रूरत है तो पति पत्नी को एक दूसरे की भावनात्मक सहयोग की।

आप के जीवन में भी माता पिता बनने के बाद ऐसी परिस्तिथियाँ ज़रूर आयीं होंगी या आ अभी आ रही हैं ,तो परेशान ना हो , अपने दिल की बात किसी अपने के साथ बांटें , और हल ढूढ़ने का प्रयास करें।

 

यह भी पढ़ें: सम्भोग: मेरी पति की परिभाषा

 

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Comments (7)



Varsha Rao

Very informative post

Amandeep Kaur

Knowledgeable post

Isha Pal

Ma also suffer This situation... And Don't know... Ki kab sab Kuch thek Hoga...

Krishna kumar

बहुत खूब लिखा गया है

Sunita Pawar

Nicely written

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