बच्चों के कान छिदवाते समय बरते सावधानियां

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बच्चों के कान छिदवाते समय बरते सावधानियां

शिशुओं के कान छेदने से पहले माताएं ध्यान दे ।


कान छेदना बाइबिल के समय से किया गया है और यह एक आम बात है । यहां तक कि लड़को को भी बचपन में कान छिदवायें जाते है । इसके बावजूद माता पिता के लिये यह कठिन निर्णय है, बच्चें को होने वाले दर्द का कारण ।
कई विशेषज्ञ असल में कान छेदने के खिलाफ है वह इसे क्रुरता का एक रूप मानते है । हालांकि यदि आवश्यक है तो निम्नलिखित युक्तियों के साथ प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है ।
किस उम्र में मुझे अपने बच्चों के कान छिदवाने चाहिये


अमेरिकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार बच्चें के कान छिदवाने  की कोई विशेष उम्र नहीं है । कान छिदवाना काफी सुरक्षित होता है । जब वो हाइजिनिक रूप से और सही तरिके से किये जाते है । कुछ माता पिता अपने बच्चों के कान जल्दी छिदवा देते है जब बच्चा सिर्फ 12 दिन का होता है । जबकि कुछ बच्चें के पहले जन्मदिन तक इंतजार करते है ।


अमेरिकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स तब तक इंतजार करने की सलाह देती है जबतक बच्चें को छेदने वाले कानो की देखभाल कर सके । जो लगभग 2 से 3 साल होती है । यह कान छिदवाने के लिये सही उम्र मानी जा सकती है क्योंकि बच्चा भाषा और निर्देश समझने लग जाता है । इसके अलावा कान की त्वचा अभी भी नरम है लेकिन पहले जैसी नाजुक नही है इसके अलावा उस उम्र तक टीकाकरण किया गया होगा जो आगे चलकर संक्रमण को रोकता है ।


कान कहां छिदवाना है ?


कुछ माता पिता अपने जौहरी पर अपने बच्चें के कान छिदवाना पसंद करते है जबकि कुछ चिकित्सक से छिदवाना पसंद करते है । इसमें कोई प्रतिबंध नही है बस व्यक्ति अनुभवी हो ।
कान छेदना बच्चों और बड़ो के लिये कुछ मामलो में अलग है इसलिए निम्नलिखित युक्तियों को ध्यान में रखेः
प्रक्रिया के दौरान उपयोग किये जाने वाले सभी उपकरण साफ है । अच्छी प्रतिष्ठा के लिये एक जगह ओर अच्छा पेशेवर खोजे ।


कान छिदवाने की प्रक्रिया क्या है ?


चरण 1- कान की त्वचा को एन्टीसेप्टीक से साफ किया जाता है स्वच्छता बनाये रखने के लिये दस्ताने पहनने चाहिए ।
चरण 2- कान छेदना सुई या छेदने वाली बन्दुक से किया जाता है । यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है दोनो में दर्द होता है जो कि एक या दो सेंकण्ड तक रहता है ।
चरण 3- झुमके को बन्द करने के लिए छेद के भीतर रखा जाता है । बाली के रूप में सोना पसंद किया जाता है क्योकिं इससे संक्रमण नही होता है । गोल्ड प्लेटेड इयरिंग्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है ।
चरण 4- किटाणुनाशक एक सप्ताह में दो बार लगायें प्रत्येक सप्ताह बालियों को एक कान से दूसरे कान में बदले ।


बच्चें के कान छिदवाने के लिये सबसे अच्छी जगह नीचे कान का लोभ है इसके अलावा बचपन के दौरान छेदने के लिये नही है ।

 

  • कान छिदवाने के बाद क्या सावधानी बरतनी चाहिए
  • हर हफ्ते बालियों को एक कान से दूसरे कान पर स्वैप करें ।
  • छेदी हुई जगह को अच्छी तरह से धोयें और सुखायें ।
  • संक्रमण से बचने के लिए 6 से 8 सप्ताह में दो बार किटाणुनाशक उपयोग करें । बच्चों के कानो को सुरक्षित साबुन से धोयें ।
  • बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं जो कानो पर फसंने से बचें और आसानी से निकाले जा सकें ।

 

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