बच्चो के डरावने चार साल : मुह चलाना और रोना कैसे रोके

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बच्चो के डरावने चार साल : मुह चलाना और रोना कैसे रोके

जिसने ये शब्द बनाया उसने बच्चे के इस व्यवहार के साथ ही उम्मीद छोड दी. मुझे लगता है कि एक बच्चा जीवन को रोकना शुरू कर देता है जब वह व्यवहार करना सीखता है और समझने लगता है कि हम वयस्क दुनिया मे कैसे काम करते है. लेकीन इससे पहले कि बच्चा 6 साल का हो जाये, उसके लिये कई चुनौतिया है. सबसे खराब ‘फोरसोम फोरास’- यह शब्द मैने बच्चो की उम्र के बारे मे बताने के लिये बनाया है.इससे पहले कि मै पहले चरण को संभालना शुरू कर दु, मै आपको संक्षेप मे बता दू कि इस उम्र को वास्तव मे क्या डरावना बनाता है.


सबसे पहले, एक चार साल पुराना सवाल प्राधिकरण के लिये काफी पुराना है लेकीन इसको समझने के लिये बच्चा इतना समझदार नही है.


ये उम्र वह उम्र है जब बच्चे को लगता है कि वह कुछ भी और सबकुछ कर सकता है. जिसमे सीमाओ का हर वक़्त इम्तिहान शामिल है.


साथ के बच्चो और अन्य माता पिता के साथ परवरीश एवं विचार धाराओ और नजरीये पर सवाल उठाने वाले बच्चे के बीच ,संघर्ष मे बदल जाती है.


गुस्सा, निराशा, निराशा जैसी भावनाए इस उम्र मे बहुत आती है और अक्सर मन को यही बाते घेरे रहती है. वे बच्चे एक चलने फिरने वाली शिकायत पेटी है.


इस उम्र के बच्चो के साथ और भी आश्चर्य की बात यह है कि उनके पास सही और गलत मे फरक करने की समझ है लेकीन फिर भी वे गलत को ही चुनते है. जैसे कि वे जानते है चिल्लाना गलत आदत है लेकीन फिर भी वो ऐसा करते ही रेहते है. ऐसा व्यवहार जिसमे बच्चा चिल्ला कर बात करे या बात का पलट के जवाब दे, बहुत बुरी आदत है ये.


ऐसी मानसिकता वाले बच्चे को संभालना थोडा कठीन हो सकता है या असंभव भी हो सकता है, लेकीन मेरे अनुभव ने मुझे सिखाया है कि इस व्यवहार का मुकाबला करने के लिये हम बहुत कुछ कर सकते है. 4 साल की उम्र मे आपका धेर्य और परीक्षण की लगातार जांच होगी. आपको धेर्य रखना होगा .मैने सीखा है कि नकारात्मकता के साथ नकारत्मक बयानो पर प्रक्रिया करना बेकार है.दो नकारात्मक स्तिथी को बदतर बना देते है. और केवल सकारात्मक रूप से प्रक्रिया करना भी बच्चो की भावनाओ को संबोधित करने मे विफल हो सकते है.


अब हमारे सामने दो विकल्प होते है:


1. नजरअंदाज और विचलित करना:

 

यह बहुत असरदार और मददगार नुस्खा है. जब तक बच्चा चार साल का नही हो जाता तब तक ज्यादातर माता पिता व्याकुलता कि शक्ती को भूल जाते है ,मैने खुद 2 साल के बच्चे के लिये इसे गलत समझा. जब बच्चा कहता है कि मम्मा आप मतलबी हो ,तो इस बात पर गुस्सा होने या प्रतिक्रिया देने की बजाय उसे अनदेखा करके और बातो मे लगाकर जबाव दे. बच्चे से पुछे कि उसकी मनपसंद कहानी कोनसी थी जब वह 2 साल का था, या उसका वो कंबल या खिलोना कितना प्यारा था जिसको वो हर जगह अपने साथ ले जाया करता था.यह विचार उसको एक सुखद याद दिलायेगा और नकारात्मक भावना को कम कर देगा या भुला देगा.यह तकनीक आपको अपने बच्चे मे डालनी है.साथ ही बच्चे अपने बचपन की कहानी सुनना पसंद करते है आप उसको जरूर सुनाये.


2. जब बच्चे एक कठीन परिस्थिती से गुजरते है और जटील भावनाओ से निपटने मे परेशानी महसूस करते है, तो बुरा और गलत काम करते है. हालांकी आपको पता होना चाहिये कि अपने बच्चे के साथ भावनाओ को कैसे प्रतिबंधित करे.आपको अपना आपा नही खोना चाहिये, जब भी बच्चे को मदद की जरुरत है आप उसकी मदद करे या देखभाल करने वाली को कहे ,और निम्नलिखित बातो पर भी विचार करे:

  • बच्चा: आप मतलबी हो
  • देखभाल करने वाला: आप मुझसे परेशान है. प्लीस मुझे बताये मैने आपको किस प्रकार परेशान किया? मुझे इसे सही करने की अनुमती दे.
  • बच्चा: मम्मी, मम्मी,मम्मी ( चिल्लाना, और बात चित मे बाधा डालना)
  • मां: तुम चाहते हो कि मै तुम्हारे साथ बात करू, है ना? मुझे अपनी बात खतम करने दो फिर हम एक लंबी बातचीत करेंगे
  • बच्चा: मुझे उससे नफरत है.
  • देखभाल करने वाला: ओह्ह अभी आप गुस्से मे है.उसने आपको इतना बुरा करने के लिये कुछ किया होगा
  • बच्चा: आप हमेशा मुझे टोकते रहते है कि मुझे काम कैसे करना है.
  • देखभाल करने वाला: मै जानती हू कि आप चीजो को खुद आजमाना चाहते हो लेकीन मुझे चिंता है कि काही आपको किसी चीज से चोट ना लग जाये या आपको कोई नुकसान ना हो जाये. आप मुझे बताये ताकी मै आपकी मदद कर सकू
  • बच्चा: यह बहुत कठीन है, मै यह नही कर सकता
  • देखभाल करने वाला: मुझे पता है यह कठीन है और आप इसे कितना करना चाहते है. शायद थोडा और अभ्यास के साथ आप इसे सीखेंगे. मेरे पास इसे करने के लिये बहुत समय था.और मेने बहुत प्रयास किया.

 

बडो की तरह बच्चे भी अपने आत्मसम्मान के लिये खुद को साबित करना चाहते है जिसके लिये वो चील्लाते है, अपनी बात मानवते है, और खुद को साबित करने की आवश्यकता महसूस करते है जो बार बार संघर्ष, व्यवहार, और अवज्ञा की ओर जाता है.

 

इन दोनो नजरीये को अभ्यास और धैर्य की आवश्यकता होती है. और माता पिता की दैनिक अराजकता  मे अपनी शांती को खोना बहुत स्वाभाविक है. अगर आप इसका पालन हर एक समय के माध्यम से नही कर सकते तो चिंता ना करे. लेकीन इन कदमो का पालन करके निश्चित रूप से मै और मेरा बच्चा दोनो शांत हो गये है. एक दुसरे के प्रति सहानुभूती एवं बेहतर व्यवहार रखते है. तो अब, सिर्फ मै अकेली नही हू जो इस नजरीये से अभ्यास कर रही हु ,मेरा बच्चा भी मेरे साथ अभ्यास कर रहा है. और यह बात मुझे अंदर से खुश और सकारात्मक बनाती है.

 

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