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मालिश करने से मिलता है तन-मन को आराम

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मालिश करने से मिलता है तन-मन को आराम

शरीर की तेल मालिश करने से त्वचा का पोषण होता है। मालिश करने से शरीर त्वचा के सभी बंद रोम क्षिद्र खुलने लगतें है। इसके साथ ही त्वचा में रक्त का संचार सुचारू रूप से होने लगता है। हर रोज मालिश करने से आपका चेहरा चमकने लगता है। ज्यादा चलने या काम करने से शरीर दर्द हो तो तेल गर्म करके मालिश करने से आराम मिलता है। हर बार किसी और से मालिश नहीं करवाई जा सकती है इसलिए जरूरत पड़ने पर खुद ही मालिश कर लेना चाहिए। बस इसके लिए आपको मालिश करने का सही तरीका आना चाहिए।

सिर से पैरों की ओर करें मालिश

  • मालिश करने की शुरुआत सबसे पहले सिर के मसाज करनी चाहिए। हल्के-हल्के हाथों से मालिश करें।
  • सिर के बाद चेहरे की भी मालिश करें। इसके बाद हल्के हाथों से गर्दन पर मालिश करें।
  • गर्दन के बाद कंधों पर गोल-गोल तरीके से मालिश करें। फिर हाथों पर उंगलियों की दिशा में मालिश करें। कोहनियों और कलाइयों पर भी गोल-गोल मसाज करें।
  • इसके बाद शरीर के आगे के हिस्से - सीने और पेट की हल्के हाथों से मालिश करें।
  • फिर पीठ की मालिश करें। पीठ पर उपर गर्दन, कंधों, बाहों को अच्छी तरह तेल लगा कर अच्छी तरह मालिश करें। कमर पर नीचे से ऊपर की ओर मालिश करना बेहतर माना जाता है। कमर पर मालिश के दौरान उंगलियों से थोड़ा दबाव बनाना बेहतर रहता है।
  • टांग पर मालिश जांघ से पैर की ओर करनी चाहिए। घुटनों पर गोल-गोल मालिश करें। तलुवों पर एड़ी से उंगलियों की ओर मसाल करें।

मालिश होने के अगर आपके पास समय हो तो एक घंटे तक लेट कर शरीर की मांस-पेशियों को  रिलैक्स होने दें। अगर समय कम हो तो करीब 15 मिनट बाद नहाया जा सकता है। नहाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। साबुन की जगह उबटन लगाएं।

उबटन लगाएं

उबटन बनाने के लिए 1 छोटा चम्मच जौ या चोकर,  आधा छोटा चम्मच बेसन, चौथाई छोटा चम्मच हल्दी और चौथाई छोटा चम्मच चंदन पाउडर लें। इसमें दही या गुलाब जल या साधारण पानी मिलाकर घोल बना दें। उबटन को शरीर पर रगड़ें और फिर पानी से धो दें। इसके बाद साफ तौलिए से शरीर पोंछ लें। नहाने के करीब 15 मिनट बाद ब्रेकफस्ट करें। ब्रेकफास्ट में हल्का खाना जैसे दलिया, पोहा, स्प्राउट आदि खाएं। बाद में अपनी रुटीन दिनचर्या शुरू कर दें।
मालिश से शरीर को दर्द से राहत तो मिलती ही है मालिश के बहुत सारे फायदे भी हैं। इससे मानसिक आराम भी मिलता है। आइए जानते हैं मालिश के फायदे-

तनाव-चिंता में राहत मिलती है

कभी ज्यादा चिंता या तनाव हो तो मालिश करते हुए सिर पर तेल रख कर मालिश की जाए तो रात मिलती है। नियमित रूप से मालिश करने से अन्य मानसिक असामान्यताएं भी दूर हो सकती हैं क्योंकि यह कुछ अन्य शारीरिक क्रियाओं को भी नियंत्रित करती है। एक नियमित मालिश सत्र नींद विकारों को रोकने, तनाव, चिंता और अवसाद को कम करता है।

त्वचा को निखारे

लगातार मालिश त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाने और त्वचा को स्वस्थ और युवा बनाए रखने का एक शानदार तरीका है। इससे न केवल मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है बल्कि त्वचा की परतों में रक्त के प्रवाह भी नियंत्रित होता है। मालिश से शरीर में हार्मोन भी संतुलित रहते हैं जिससे त्वचा का रंग निखरता है। अलग-अलग तेल से मालिश आपकी त्वचा पर अलग-अलग फायदे मिलते हैं। इससे आपकी त्वचा चिकनी और चमकदार बनती है। इससे बाल भी मजबूत होते हैं।

रक्त संचार बढ़ाता है

यह एक मालिश के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है। मालिश से शरीर में रक्त परिसंचरण बढ़ता है और शरीर के सभी विषैले तत्त्व बहार निकल जाते हैं। व्यायाम करने से पहले यह मालिश करना बहुत अच्छा है।
यह पूरे शरीर में रक्त का संचार करता है जिससे पूरे शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति होती है। शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है और शरीर में स्फुर्ति आती है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता भी बढ़ती है।

मांसपेशियों को राहत

मालिश में मांसपेशियों की मालिश होती है जिससे त्वचा में लचीलापन आता है। स्वीडिश मसाज में मांसपेशियों में तनाव ठीक किया जाता है। मालिश से शरीर में खिंचाव दे कर दर्द को दूर किया जाता है।

पाचन और मूत्र प्रणाली में सुधार

सही ढंग से की गई मालिश शरीर के आंतरिक अंगों के कार्यों में सुधार लाती है, जैसे कि पाचन तंत्र, यकृत और मूत्र प्रणाली। मालिश तनाव दूर करता है, यह पूरे शरीर के संचालन का अनुकूल करता है। मालिश से दबाव पड़ने पेट की गैस निकलती है।

इन स्थितियों में मालिश करने से बचना चाहिए-

  • महिलाओं को पीरियड्स के समय मालिश नहीं करवानी चाहिए क्योंकि आगे विषाक्त पदार्थों की रिहाई को ट्रिगर कर सकता है और शरीर में तनाव आ सकता है जबकि शरीर पहले से ही तनाव से गुजर रहा होता है।
  • गर्भावस्था के दौरान किसी भी डिटॉक्स प्रक्रिया को शुरू करना अच्छा नहीं है। गर्भ और मां की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतना चाहिए।
  • फ्लू, ठंड लगना और बुखार होने पर मालिश नहीं करवानी चाहिए।
  • अपच और गैस्ट्रिक विकार से ग्रस्त लोगों को मालिश करने से बचना चाहिए।
  • संक्रमित, घाव होने या क्षतिग्रस्त त्वचा जैसी बीमारी होने पर मालिश नहीं करना चाहिए।
  • शरीर में सूजन वाली जगहों पर मालिश नहीं करना चाहिए।
  • अगर कोई भी लगातार मेडिकल हिस्ट्री हो तो मालिश करने से बचना चाहिए।

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