वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे- मानसिक समस्याओं को अनदेखा नहीं करे

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वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे- मानसिक समस्याओं को अनदेखा नहीं करे

मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जिसको लेकर लोग इतना जागरूक नहीं है। एंजाइटी डिप्रेशन, फोबिया, डर, डिमेंशिया जैसी और भी मानसिक बीमारियां बहुत तेजी से लोगों में बढ़ रही है। इन मानसिक बीमारियों का शिकार बड़े ही नहीं बच्चे भी हो रहे है। खासतौर से कोविड के समय लोगों में मानसिक समस्या देखी गई है।

मेंटली हेल्थ को लेकर लोग बहुत ज्यादा सचेत नहीं रहते है। लोगों को मानसिक रोगों के प्रति जागरूक करने के लिए वर्ष 1992 में वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे की शुरुआत की गई। यूनाइटेड नेशन्स के उप महासचिव रिचर्ड हंटर ने सबसे पहले इस दिन की शुरुआत की थी। वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ 150 से अधिक सदस्य देशों वाला एक मानसिक स्वास्थ्य का संगठन है। इस संगठन का उद्देश्य लोगों को मानसिक परेशानियों के बारे में सजग करना है।

हमारे मानसिक स्वास्थ्य का असर पूरी तरह से हमारे आस-पास के लोगों पर भी पड़ता है। अगर आप प्रेग्नेंट है तो और आपको अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना पड़ेगा। क्योंकि आप जो भी सोचती है उसका असर आपके बच्चे पर भी पड़ता है। अगर आप किसी मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं तो अपने परिवार से अवश्य इसके बारे में बात करे।

मानसिक बीमारियों के शुरुआत मां के गर्भ से ही होती है। क्योंकि एक मां अपनी गर्भावस्था के दौरान जितना तनाव, अवसाद में रहती है उसका सबसे ज्यादा असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है। यह एक सबसे बड़ा कारण है मानसिक बीमारी का। अकेलापन एक ऐसी समस्या है जो मानसिक तौर से काफी परेशान करती है। अपने ही परिवार के लोगों दारा उपेक्षा करना, अक्सर ऐसा होता है कि अगर आपकी ही फैमिली का कोई सदस्य आपके अंदर कमी निकाले, किसी के भी सामने चिल्लाए। आप इस बात का विरोध नहीं कर पाते तो कहीं ना कहीं आप मानसिक तौर से परेशान रहेंगे।

कभी आपने यह ध्यान दिया है कि बच्चे अक्सर अकेले में बात करते हैं। यह बात करना कब मानसिक बीमारी में बदल जाता है पता ही नहीं चलता। उसकी वजह है कि पेरेंट्स अपने बच्चों को समय नहीं दे पा रहे हैं ना ही बच्चो की बात सुन पा रहे है। इसके अलावा शारीरिक तौर से कमजोर होना भी मानसिक समस्या का बडा कारण हो सकता है।

मानसिक परेशानी से उबरने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत होती है फैमिली के सपोर्ट की। बच्ची के लिए उनके पेरेंट्स का सपोर्ट बहुत जरूरी होता है। क्योंकि बच्चे जब भी अकेलापन महसूस करते हैं तो कहीं ना कहीं डिप्रेशन में जाते है। इसलिए अपने बच्चों के लिए समय निकालना बहुत आवश्यक है। अगर आप प्रेग्नेंट है कोई भी बात आपको मेंटली परेशान कर रही है तो अपने पति से अवश्य बात करे। क्योंकि प्रेगनेंसी में तनाव लेना ठीक नहीं है।


अपने मेंटल हेल्थ को स्ट्रांग रखने के लिए योग और मेडिटेशन को अपनी रूटीन में शामिल करे। रोजाना वॉक करे, अच्छी किताब पढ़ें अगर मन में कोई परेशानी है और आप किसी से नहीं कह पा रहे तो एक डायरी में अपनी बात अवश्य लिखे। किसी भी तरह के मानसिक तनाव से आप अपनी बात कहने से डर नहीं और मन में सकारात्मक सोच रखे।

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