नवजात शिशुओं को भी हो सकती है प्रदूषण से एलर्जी

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नवजात शिशुओं को भी हो सकती है प्रदूषण से एलर्जी

नवजात शिशुओं के लिए प्रदूषण से होने वाली एलर्जी सामान्य नहीं है। क्योंकि प्रदूषण के असर की वजह से नवजात शिशु को सर्दी खांसी, आंखों में जलन हो सकती है। दीवाली में पटाखों से निकलने वाला धुआं बहुत ही हानिकारक होता है। इस धुएं से नवजात शिशु को त्वचा संबंधी भी एलर्जी हो सकती है।

नवजात शिशु में प्रदूषण से किस तरह की एलर्जी होती है।

  • शिशु की आंखों में जलन हो सकती है। पटाखों से निकलने वाले धुएं में कई हानिकारक केमिकल होते हैं। जिनकी वजह से आंखों में खुजली और जलन बहुत ज्यादा हो सकती है।
  • नवजात शिशु के हाथ पैर की त्वचा बहुत ही नाजुक होती है। प्रदषूण से निकलने वाला धुआं त्वचा को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे शिशु की स्किन में चकत्ते और लाल दाने हो सकते हैं।
  • पटाखों के शोर से शिशु के कानों में भी परेशानी हो सकती है।
  • प्रदूषण के धुएं का असर शिशु की इम्युनिटी पर भी पड़ता है। जिसकी वजह से शिशुओं को जल्दी-जल्दी सर्दी जुकाम हो सकता है।


प्रदूषण से होने वाली एलर्जी से बचाव कैसे करे

प्रदूषण का असर हमारी पूरी सेहत पर पड़ता है। नवजात के लिए तो प्रदूषण और भी खतरनाक है। पटाखों के शोर का असर शिशु के कानों पर पडता है इससे शिशु बहुत ज्यादा रोते हैं। इसलिए शिशु के कानों में रुई लगाएं, इससे शिशु को कम शोर सुनाई देगा। प्रदूषण की वजह से शिशु को खांसी जुकाम हो जाता है। इसलिए शिशु को सरसों और अजवाइन के तेल से मालिश करे। शिशु के कमरे को साफ रखें, घर के खिड़की दरवाजे बंद ही रखे जब ज्यादा प्रदूषण हो। कोशिश करें कि आप अपने आस-पास ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाएं। क्योंकि पेड़ पौधे प्रदूषण को काफी हद तक कम करते है।

अगर आपके शिशु को बहुत ज्यादा एलर्जी है तो डॉक्टर से अवश्य संपर्क करे।

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