प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन क्यों होता है?

प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन क्यों होता है?

20 Jan 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

आज के जमाने में डिप्रेशन या अवसाद एक ऐसी बीमारी बन गई है जिसने उम्र के बंधन को तोड़ दिया है। किसी भी उम्र में कोई भी डिप्रेशन का शिकार बन सकता है। लेकिन गर्भावस्था में डिप्रेशन वह अवस्था है जो माँ के साथ शिशु के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकता है। आज हम प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन क्यों होता है, अवसाद या तनाव कैसे गर्भावस्था में शिशु को प्रभावित करता है, कैसे प्रेग्नेंसी के दौरान डिप्रेशन को कंट्रोल किया जा सकता है- ऐसे सवालों के बारे में खुलकर बातें करेंगे।

गर्भावस्था में डिप्रेशन के बारे में बात करने के पहले डिप्रेशन क्या होता है, इसके बारे में थोड़ा जान लेते हैं।

 

डिप्रेशन (Depression) है क्या?

असल में डिप्रेशन मन की भावनात्मक स्थिति होती है। इस अवस्था में मन तो उदास रहता ही है, साथ में मरीज को ऐसा लगता है कि वह सबसे दूर होता जा रहा है, कोई उससे प्यार नहीं करता है या वह सबके लिए बेकार हो गया है। डिप्रेशन के मूड में छोटी-छोटी असफलता भी बड़ी लगने लगती है, जीवन से लड़ने की क्षमता या खुद पर आत्मविश्वास खोने लगता है। अगर समय रहते डिप्रेशन से मरीज को बाहर नहीं निकाला गया तो मानसिक स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि सामान्य जीवन से वह विरक्त होकर आत्महत्या करने के बारे में भी सोच सकता है या करने की कोशिश कर सकता है।
इसलिए समय रहते मरीज को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए या किसी अपने से इस बारे में बात करनी चाहिए। अगर किसी को डिप्रेशन के मरीज के बारे में पता चले तो बिना समय नष्ट किए उसका साथ देना चाहिए। आपका पल भर साथ या आश्वासन उसको जिंदगी दे सकता है।

 

प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन

आजकल की संघर्ष भरी जिंदगी के कारण डिप्रेशन का शिकार जिस तरह आम लोग अनायास ही होते जा रहे हैं, वैसे ही गर्भवती महिलाएं भी अवसाद से ग्रस्त हो सकती हैं। असल में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में तरह-तरह के बदलाव होते हैं, इन बदलावों के कारण प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन की समस्या हो जाती है। यहाँ तक कि आस-पास के सभी लोग दुश्मन और उसकी खुद की दुनिया बेरंग और बेकार लगने लगती है। मूड स्विंग ज्यादा होने के कारण उदास, निराश, चिंतित और खुद को दोषी महसूस करने लगती है। अगर गर्भावस्था में डिप्रेशन को नजरअंदाज किया गया तो हो सकता है डिलीवरी के बाद पोस्टपार्टम डिप्रेशन से भी जुझना पड़ सकता है।

 

प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन होने के कारण

प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन क्या होता है, यह तो आपने समझ लिया लेकिन आखिर किन कारणों से डिप्रेशन की अवस्था आती है, इस बात को समझने की भी जरूरत है। ऐसे बहुत सारे कारक हैं जिनके कारण मन की यह भावनात्मक स्थिति हो सकती है-

  • अगर किसी को पहले से डिप्रेशन या बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या है तो प्रेग्नेंसी में वह डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।
  • इसके अलावा अगर मरीज को पहले से ही प्रीमेन्स्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (Premenstrual dysphoric disorder) की समस्या है तो उसको गर्भावस्था के दौरान अवसाद की समस्या हो सकती है। इस डिसऑर्डर में मरीज को पीरियड्स के दौरान हद से ज्यादा मूड स्विंग होता है या पेट में दर्द बहुत ज्यादा होता है, उनको प्रेग्नेंसी के दौरान डिप्रेशन की परेशानी हो सकती है।
  • अगर प्रेगनेंट महिला ज्यादातर समय अकेली रहती हैं और समाज के दूसरे लोगों के साथ ज्यादा घुलती-मिलती नहीं है तो उनको यह समस्या हो सकती है।
  • अगर वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं है तो गर्भावस्था के दौरान महिला को अवसाद की समस्या हो सकती है।
  • यहाँ तक कि अगर कम उम्र में कोई लड़की माँ बनती है तो उसको भी तनाव और अवसाद का सामना करना पड़ सकता है।
  • इन सब के अलावा अगर किसी को जबरन प्रेग्नेंसी रखने के लिए दबाव दिया जा रहा है और वह मानसिक और शारीरिक तौर पर यह दायित्व लेने के लिए तैयार नहीं है तो डिप्रेशन का शिकार हो सकती है।
  • जिन महिलाओं को पहले से ही दो-तीन बच्चे हों उनको भी इस समस्या से जुझना पड़ सकता है।
  • जो महिलाएं शराब और धूम्रपान का सेवन ज्यादा करती है, उनको गर्भावस्था में डिप्रेशन से जुझना पड़ सकता है।

 

प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन के लक्षण

डिप्रेशन होने के क्या संभावित कारण हो सकते हैं, इस बारे में हमने बात की। लेकिन डिप्रेशन हुआ है, इस बारे में कैसे समझेंगे। इसको पहचानने के लिएप्रेग्नेंसी में डिप्रेशन के लक्षणों पर ध्यान देना होगा। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में बहुत सारे बदलाव होते रहते हैं, जिसका प्रभाव मन पर पड़ता है। कभी आपका मन खुशी से झुमने लग सकता है तो कभी डर से दिल बैठ जाता है। कभी लगता है कि आप माँ बनने के काबिल ही नहीं हैं या कभी लगेगा कि बच्चे को जन्म नहीं दे पाएंगी। ऐसे नकारात्मक भाव जब दिल में ज्यादा आने लगते हैं या बहुत दिनों तक रह जाते हैं तो यह प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन के लक्षणों में शुमार हो सकते हैं।

 

 

  • ज्यादातर समय मन का उदास रहना।
  • मन में हमेशा नकारात्मक भाव रहना।
  • हमेशा खुद को दोषी और बेकार महसूस करना।
  • मन में आत्मविश्वास की कमी होना।
  • कोई भी फैसला लेने में असमर्थ होना या किसी भी काम को करने में एकाग्रता महसूस नहीं करना।
  • बिना किसी कारण के हमेशा रोते रहना।
  • हमेशा थकान महसूस करना।
  • दूसरों से अलग, अंधेरे कमरे में ज्यादा रहना।
  • पहले की तुलना में कम खाना या किसी भी चीजों में रुचि नहीं लेना।
  • मन में बार-बार मरने या आत्महत्या का ख्याल आना।

अगर दो हफ्ते से ज्यादा दिनों तक आप इन सब लक्षणों को महसूस कर रहे हैं तो आप बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

 

प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन का प्रभाव माँ और शिशु पर कैसा पड़ेगा?

अब तक के चर्चा से आप समझ ही चुके होंगे कि प्रेग्नेंसी के दौरान डिप्रेशन होने पर माँ और शिशु दोनों पर प्रभाव पड़ सकता है। शोधों से यह पता चलता है कि अगर होने वाली माँ लंबे समय से डिप्रेशन में रही तो वह कम खाने, कम सोने और कम आराम करने के कारण बीमार पड़ सकती है और इसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ सकता है।
माँ मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ रहने के कारण अपने शिशु का ध्यान नहीं रख पाती है। माँ इस मानसिक स्थिति के कारण प्रीटर्म बर्थ यानि समय से पहले शिशु का जन्म (40 हफ्ता क्या 37 हफ्ता पहले ही शिशु का जन्म हो जाना) होना या लो बर्थ वेट (जन्म के समय शिशु का वजन कम होना) की समस्या हो सकती है। माँ की मानसिक अवस्था का असर बच्चे के मानसिक स्तर पर भी पड़ सकता है। इसके कारण शिशु की भविष्य में सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।

यहाँ तक माँ की इस भावनात्मक जटिलता का असर शिशु के भविष्य पर पड़ता है-

  • अपने माँ के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ाव में होगी कमी
  • बेवजह माँ से नाराजगी
  • अन्य बच्चों की तुलना में मानसिक विकास देर से होना
  • बच्चा भी अवसाद और तनाव से ग्रस्त हो सकता है
  • स्कूल में परफोर्मेंस अच्छा न होना
  • व्यवहार में गुस्से की अधिकता

 

प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन को कम करने के 5 आसान टिप्स

गर्भावस्था में डिप्रेशन को कम करने के लिए जिस तरह से सबसे पहले किसी अपने से दिल की बात शेयर करने की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह से और भी कुछ बातों पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है-

  • आराम करने की जरूरत- डिप्रेशन में जिस चीज की जरूरत है वह है भरपूर आराम और भरपूर नींद। अक्सर महिलाएं घर के काम-काज में इतना उलझ जाती हैं कि खुद पर ध्यान देने की बात भूल ही जाती हैं। यहाँ तक कि व्यस्तता के कारण होने वाली माँ सही तरह से अपने खान-पान पर भी ध्यान नहीं दे पाती है, फलस्वरूप एनर्जी की कमी उनको अवसाद की परिस्थिति में ला देता है। इसलिए मन को स्वस्थ रखने के लिए पेट को सबसे पहले स्वस्थ रखने की जरूरत होती है। माँ का पेट और मन खुश रहेगा तो बच्चा भी खुश रहेगा।
  • योग और व्यायाम- क्या आपको पता है कि पेरिनेटल क्लासेस होती है, जहाँ होने वाली माँ को एक्सरसाइज, योगासन आदि करवाया जाता है। वहाँ जाने से होने वाली माँ दूसरी प्रेगनेंट महिलाओं के साथ बात कर पाएंगी, अपनी बातें शेयर कर पाएंगी। साथ ही गर्भावस्था के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं इसके बारे में जानकारियाँ मिलेगी। इसलिए खुद के लिए थोड़ा समय निकालकर प्रेगनेंट महिलाओं को इस तरह की क्लासेस ज्वाइन करनी चाहिए।
  • पति-पत्नी के रिश्ते को और मजबूत करना- प्रेगनेंट होने पर पति को जितना पत्नी का ख्याल रखना चाहिए, ठीक उसी तरह से पत्नी को भी पति का भी ख्याल रखना चाहिए। इन पलों में पति-पत्नी के बीच अनूठा रिश्ता बनता है, जो माँ और शिशु दोनों को भावनात्मक रूप से स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।
  • माँ के डायट और न्यूट्रिशन का रखें ध्यान- यह तो सभी को पता है कि शिशु तभी स्वस्थ पैदा होगा जब माँ पौष्टिकयुक्त आहार का सेवन करेंगी। लेकिन आपको यह भी पता होना चाहिए कि प्रेग्नेंसी में अगर माँ डिप्रेशन का शिकार हैं तो उनको स्वस्थ मानसिक अवस्था में लाने के लिए हेल्दी और न्यूट्रिशियस डाइट देने की जरूरत होती है। जैसे ऑयली और सी फिश में जो ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, वह डिप्रेशन से लड़ने में मदद करता है।

 

  • खुश होने का तरीका ढूँढें और अपनाएं- अक्सर माँ घर-परिवार, बाहर-भीतर सबको खुश रखने के भाग-दौड़ में अपनी खुशी के बारे में सोचना ही छोड़ देती हैं। ऐसी अवहेलना के परिस्थिति में ही डिप्रेशन मन में घर जमाने लगता है।
    इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान जिन बातों से आपको दिल से खुशी मिलती है, वही करें,मसलन दोस्तों से मिले, अपने पार्टनर के साथ बाहर घुमने जाएं, अपने पसंद के अनुसार शॉपिंग कीजिए, अपने घर या कमरे को सजाएं, नए मेहमान को घर लाने के लिए घर को नया लुक दें। बस लक्ष्य यह होना चाहिए आपका दिल इतना खुश हो कि खुद ही होंठो पर मुस्कान आ जाए।

सच तो यह है कि आपकी जिंदगी की खुद की परेशानी ही प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन का कारण बन जाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन ने अगर दस्तक दे भी दिया तो क्या, आप खुद को खुश रखने के सारे टिप्स ट्राई कीजिए। फिर देखिए खुशी कैसे आपकी जिंदगी में अपना घर बना लेगी।

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