प्रेग्नेंट होने का सही समय क्या होता है?

प्रेग्नेंट होने का सही समय क्या होता है?

12 Feb 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

किसी भी महिला के जीवन में गर्भधारण करने की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है, लेकिन सबकी इच्छा यही होती है कि सही जानकारी के द्वारा इस सौभाग्य को आसानी से पा सके। इस लेख में हम प्रेग्नेंट होने का सही समय क्या होता है, इस बारे में बताने की कोशिश करेंगे। शायद आपको पता नहीं कि गर्भधारण का सीधा संबंध ‘ओव्यूलेशन’से होता है। इसलिए सबसे पहले ‘ओव्यूलेशन’ क्या होता है और ‘गर्भधारण की प्रक्रिया’ क्या है या प्रेग्नेंट कब और कैसे होता है -इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

ओवुलेशन (Ovulation) :

असल में पीरियड्स के चक्र का अंग ओवुलेशन होता है। ओवुलेशन को डिंबोत्सर्जन भी कहते हैं, यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब अंडाशय (Ovary) में से अंडा निकलता है। वैसे तो हर बार पीरियड्स के दौरान शरीर से रिप्रोडक्शन हार्मोन्स ओवरी को सक्रिय करते हैं ताकि अपरिपक्व 15-20 अंडे जिन्हें ओसाइट्स (oocytes) कहा जाता हैं, उनमें मैच्योर होने की प्रक्रिया शुरू हो जाए। पर सच तो यह है कि उनमें से एक ही अंडा मैच्योर हो पाता है, जो स्पर्म के साथ मिल पाता है यानि वह फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू कर पाने में सक्षम होता है। अगर अंडा फर्टिलाइज्ड हो गया तो वह गर्भाशय में चला जाता है और फिर विकसित होने लगता है। जो अंडा फर्टिलाइज्ड नहीं होता है, वह पीरियड्स के माध्यम से निकल जाता है। यानि महिला के ओवरी से अंडे के निकलने की इस प्रक्रिया को ओवुलेशन कहते हैं।

प्रेग्नेंट कब और कैसे होता है यानि गर्भधारण करने की प्रक्रिया ( Process of Pregnancy) :

प्रेग्नेंट कब और कैसे होता है यह जानने के लिए गर्भधारण करने के प्रक्रिया को समझना बहुत जरूरी है। ओव्यूलेशन की प्रक्रिया के बिना किसी भी महिला का प्रेग्नेंट होना असंभव होता है।

जैसा कि सभी जानते हैं कि प्रत्येक महिला का मासिक चक्र भिन्न-भिन्न होता है। किसी का 28 दिनों का होता है तो किसी का 21 दिन, 35 दिन या 36 दिन। इसलिए ओव्यूलेशन की प्रक्रिया पीरियड्स के डेट के हिसाब से अलग-अलग समय पर पूरी होती है। यह प्रक्रिया जब शुरू होती है तब उनमें से एक अंडा मैच्योर होकर फैलोपियन ट्यूब में चला जाता है। उसके बाद वह अंडा शुक्राणु के साथ मिलन के लिए इंतजार करता है। अंडाशय से निकलने के बाद इस अंडे का जीवनकाल बहुत ही छोटा होता है यानि सिर्फ 12 से 24 घंटे का होता है। सेक्स करने के बाद जब अंडा शुक्राणु के साथ मिलता है तभी गर्भधारण की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके विपरीत सही समय पर अगर एग और स्पर्म का मिलन नहीं हुआ तो प्रेग्नेंट होने की सारी संभावनाएं खत्म हो जाती है। एक बार जब एग बेकार हो जाता है तब गर्भधारण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अगले मासिक धर्मचक्र का इंतजार करना पड़ता है।

प्रेग्नेंट होने का सही समय जानने के लिए ओव्यूलेशन को कैसे ट्रैक करें? (How to track Ovulation?)

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि प्रेग्नेंट होने के लिए ओव्यूलेशन को ट्रैक करना कितना जरूरी होता है। इसके मदद से महिला को पता चल पाता है कि गर्भधारण करने के लिए कौन-सा समय अंतराल सबसे ज्यादा फर्टाइल होता है। ओव्यूलेशन को ट्रैक करने से पहले ये जान लेते हैं कि महिलाओं का मासिक धर्मचक्र लगभग कितने दिनों का होता है, यह ऋतुचक्र 21 दिन से लेकर 35 और 38 दिनों का होता है। पीरियड के कितने दिन बाद ओवुलेशन होता है, यह आगे पढ़कर समझ सकते है-

  • जिन महिलाओं का मासिक धर्मचक्र 35 या 36 दिनों का होता है 21वें या 22वें दिन ओव्यूलेट करती हैं।
  • जिन महिलाओं का मासिक धर्मचक्र 21 दिनों का होता है, वह 7 वें दिन ओव्यूलेट करती हैं।
  • जिन महिलाओं का मासिक धर्मचक्र 28 दिनों का होता है, वह 14वें दिन ओव्यूलेट करती हैं।

प्रेग्नेंट होने का सही समय (Fertile period of Pregnancy)

सेक्स करने के बाद जब पुरूष का स्पर्म प्रजनन क्षेत्र में चला जाता है, वह 3–5 दिनों तक ही जीवित रहता है। अंडा और शुक्राणु के संयोग का समय कम से कम 10 घंटे का होता है। इसलिए ओव्यूलेशन के पहले के पाँच दिन गर्भधारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऊपर के विश्लेषण से आप समझ ही चुके होंगे कि यदि मासिक धर्मचक्र 28 दिन का है तो 10-17वें दिन के बीच गर्भधारण करने का सबसे सही समय होता है। कहने का मतलब है कि 17वें दिन के बाद ओव्यूलेशन का समय खत्म हो जाता है और प्रेग्नेंट होने की संभावना भी नष्ट हो जाती है।

इन सब के अलावा ओव्यूलेशन को ट्रैक करने के लिए ‘ओवुलेशन प्रेडिक्टर किट’ (ovulation predictor kit) या यूरिन बेस्ड एलएच किट्स (Urine based LH kits) का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

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