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क्या ब्रेस्टफीडिंग से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है?

क्या ब्रेस्टफीडिंग से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है?

15 Feb 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

यह तो सभी को पता है कि शिशु के लिए माँ का दूध उसकी जिंदगी के लिए कितना जरूरी होता है। जन्म से लेकर छह महीने तक शिशु माँ के दूध पर ही निर्भर रहता है। शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध मिलता रहे, इसके लिए माँ को हमेशा अपने खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देते रहने की जरूरत हैं। ब्रेस्टफीडिंग कराने पर माँ को भरपूर मात्रा में पानी पीनी चाहिए, नहीं तो डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जिसका सीधा असर शिशु के आहार पर पड़ता है।

शायद आपको पता नहीं कि पानी की जरूरत जितनी गर्भवती महिला को होती है, उतनी ही दूध पिलाने वाली माँ को भी होती है। आपके जानकारी के लिए बता दें कि माँ के दूध में 87% पानी होता है, इसलिए इस अनुपात को बनाए रखने के लिए माँ को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की जरूरत है।

क्या ब्रेस्टफीडिंग से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती हैं?

जी हाँ, यह ब्रेस्टफीडिंग कराने से माँ को डिहाइड्रेशन के खतरे का सामना करना पड़ सकता है। अगर माँ कम मात्रा में पानी पीती हैं या किसी बीमारी के कारण शरीर से जल की मात्रा कम हो जाती है तो डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। इसलिए ब्रेस्टफीड कराने वाली माँ को कम से कम 3.1 लीटर (13 कप) पानी पीने की जरूरत होती है, तभी शरीर में जल की कमी को मैनेज किया जा सकता है।

पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए खाना-खाने के पहले पानी पिएं और जब भी माँ बच्चे को दूध पिलाने जाए तब पानी पीना न भूलें। दिन में जब भी याद आए पानी पीते रहें। इसका मतलब आप यह न समझे कि बहुत ज्यादा तरल पदार्थ पीने से दूध का उत्पादन ज्यादा होगा।

क्या डिहाइड्रेशन होने पर इसका असर स्तनपान (Breastfeeding) कराने वाली माँ और शिशु दोनों पर होता है?

बिल्कुल, अगर माँ को बहुत ज्यादा डिहाइड्रेशन की समस्या हो गई है तो दूध की आपूर्ति कम हो जाएगी। ब्रेस्टमिल्क कम हो जाने पर शिशु का न पेट भरेगा और न ही पौष्टिकता मिलेगी। इसलिए माँ को अपने खान-पान का विशेष रूप से ध्यान रखना पड़ेगा।

माँ में डिहाइड्रेशन के कारण शिशुओं में हाइपरनाट्रेमिक डिहाइड्रेशन (hypernatremic dehydration) होने की समस्या होती है। इस अवस्था में ब्लड में सीरम सोडियम का कंसन्ट्रेशन लेवल बढ़ जाने के कारण अगर सही समय पर इलाज नहीं करवाया गया तो गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

ब्रेस्टफीडिंग से डिहाइड्रेशन होने के संकेत

अगर माँ को किसी कारणवश डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है तो सबसे पहला संकेत है ब्रेस्टमिल्क का उत्पादन कम होना। उसके अलावा जो लक्षण माँ में दिखाई देते हैं, वह हैं-

  • मुँह सूख जाना
  • पेशाब का रंग गहरा होना
  • सामान्य की तुलना में पेशाब और पसीना कम होना
  • थकान और चिड़चिड़ापन’
  • मसल क्रैम्स
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • हाइपरटेंशन

शिशु में डिहाइड्रेशन के संकेत

  • जीभ और मुँह का सूख जाना
  • तेज बुखार
  • 3 घंटे तक पेशाब न होना’
  • निस्तेज होकर पड़े रहना
  • चिड़चिड़ापन

ब्रेस्टफीडिंग से डिहाइड्रेशन होने के कारण

डिहाइड्रेशन होने का मूल कारणों में जल का सेवन कम करने के अलावा और भी कारण है-

  • अनावश्यक डाइटिंग
  • उपवास
  • उल्टी
  • फ्लू
  • दस्त

ब्रेस्टफीडिंग से डिहाइड्रेशन होने पर क्या इलाज करवाना चाहिए?

अगर माँ को सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, जैसी समस्याएं महसूस होने लगे तो तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर रिहाइड्रेशन थेरेपी की शुरूआत कर सकता है। इस थेरेपी में शरीर में जितने इलेक्ट्रोलाइट और फ्लूइड की कमी होती है, उसको पूरा किया जाता है।

डिहाइड्रेशन से बचने के सरल उपाय

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
  • डायट में हमेशा सूप, सलाद, दही, खरबूजा आदि का सेवन करें।
  • नींबू पानी या फलों का रस नियमपूर्वक पीना चाहिए
  • चाय-कॉफी से दूरी बरतनी चाहिए।

अब तक के विश्लेषण से आप समझ ही गए होंगे कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान माँ को पर्याप्त मात्रा में पानी क्यों पीनी चाहिए।

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