शिशु को शहद किस उम्र से देना चाहिए?

शिशु को शहद किस उम्र से देना चाहिए?

17 Feb 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 279 Articles

शहद न सिर्फ स्वाद में मीठा होता है, बल्कि यह अपने स्वास्थ्यकारी गुणों से भी जीवन में मिठास घोलता है। वैसे तो वयस्कों के लिए शहद का सेवन लाभकारी माना गया है, लेकिन क्या बच्चों के लिए भी शहद इतनी ही गुणकारी है? इसी से जुड़ी जानकारी हम इस लेख में पेरेंट्स के साथ साझा कर रहे हैं। अपने शिशु को किस उम्र में खिलाएं शहद इस सवाल से लेकर आप शिशु को शहद खिलाने की सही मात्रा और इसका सही तरीका भी पढ़ेंगे। साथ ही, बच्चों को शहद खिलाने के फायदे और नुकसान के बारे में भी जानेंगे। 

शिशु को शहद किस उम्र से देना चाहिए?

डॉक्टर्स के अनुसार, 1 साल की उम्र या उससे अधिक उम्र के छोटे बच्चों को शहद देने की शुरुआत की जा सकती है। हालांकि, अगर शिशु एक वर्ष से छोटी उम्र का है, तो बच्चे को शहद नहीं खिलाना चाहिए। 1 साल से छोटी उम्र के बच्चों के लिए शहद के नुकसान हो सकते हैं, जिनके बारे में हमनें नीचे विस्तार से बताया हुआ है।

छोटे बच्चों में शहद के नुकसान क्या हैं?

बच्चों को शहद खिलाने के फायदे की जानकारी पढ़ें, इससे पहले हम 1 वर्ष से छोटे बच्चों को शहद खिलाने के नुकसान की जानकारी दे रहे हैं।

1. बच्चों में शहद से इन्फेंट बॉटुलिज्म 

1 साल की छोटी आयु के शिशु को शहद खिलाने से उसे इन्फेंट बॉटुलिज्म (Infant Botulism) हो सकता है। यह संक्रामक रोग शिशुओं के लिए घातक हो सकती है। बता दें कि शहद में क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम (Clostridium Botulinum) नामक बैक्टीरिया होता है, जो छोटे शिशुओं के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) में संक्रमण फैला कर बॉटुलिज्म का जोखिम बढ़ा सकता है।

छोटे शिशुओं में उनके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट का विकास जारी होता है, जिस वजह से उनका शरीर संक्रामक रोगों से बचाव करने में सक्षम नहीं होता है। इसी वजह से शहद में पाए जाने वाला यह बैक्टीरिया बच्चों को तेजी से बीमारी की चेपट में ला सकता है।

बच्चों में शहद से इन्फेंट बॉटुलिज्म के लक्षण

छोटे शिशुओं में बॉटुलिज्म के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • कब्ज होना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • सुस्ती होना
  • पलकों का बार-बार बंद होना
  • शरीर के निचले हिस्से में पैरालिसिस होना
  • स्तनपान करते समय शिशु का अधिक रोना

2. छोटे बच्चों को शहद से एलर्जी

छोटे बच्चों को शहद देने के नुकसान में दूसरी वजह शामिल है शहद के सेवन से बच्चे को एलर्जी होना। शहद को एक एलर्जीनिक खाद्य माना जाता है। वहीं, कुछ बच्चे कुछ तरह के खाद्य पदार्थों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इसी वजह से ऐसे बच्चों को शहद से एलर्जी भी हो सकती है।

बच्चों में शहद से एलर्जी के लक्षण

छोटे शिशुओं में शहद देने के एलर्जी के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

हालांकि, अगर वहीं 1 साल से बड़ी उम्र के बच्चों को शहद दिया जाए, तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी हो सकता है, जिसके बारे में नीचे विस्तार से पढ़ें।

बच्चों को शहद खिलाने के फायदे

शिशु को शहद के फायदे निम्नलिखित हैं, जैसेः

  1. सूजन में शहद के फायदेशहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण होता है, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके सूजन की समस्या ठीक कर सकता है। इससे बच्चा कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Heart Disease), न्यूरोलॉजिकल (Neurological Disorder) की समस्या व कैंसर जैसी बीमारियों से सुरक्षित रह सकता है।
  2. घाव भरने के लिए शहद के फायदे – शहद में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जिस वजह से इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप त्वचा पर लगे घावों को भरने के लिए किया जा सकता है। यह त्वचा में जलन, फोड़े-फुंसी व स्किन डिसऑर्डर के इलाज में मदद कर सकता है।
  3. बच्चे की शारीरिक ऊर्जा बढ़ाएशहद में खाने से शरीर को ऊर्जा मिल सकती है। इस वजह से यह बच्चे को ऊर्जावान, चुस्त व तंदुरुस्त बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।
  4. शिशु के ओरल हेल्थ के लिए शहद – शहद के एंटीबैक्टीरियल और एंटी इंफ्लामेटरी गुण सूजन व बैक्टीरिया नष्ट करने में मददगार माने जा सकते हैं। ऐसे में अगर बच्चे को शहद का सेवन कराया जाए, तो वे मसूड़ों से संबंधित बीमारियों, मुंह के अंदर सूजन, छाले होना या मुंह से दुर्गंध आने जैसी समस्याओं से बचे रह सकते हैं।
  5. हृदय स्वास्थ्य के लिए शहद – शहद में हृदय संबंधी समस्याओं का इलाज करने वाले गुण भी होते हैं, जिस वजह से यह बच्चे के हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।
  6. सर्दी-जुकाम में शहद – शहद में इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने का गुण होता है। इस वजह से इसके सेवन से बच्चे में सर्दी-जुकाम, फ्लू व खांसी की समस्या का उपचार किया जा सकता है।
  7. एसिडिटी में शहद का सेवन – शहद में पेट की सूजन या किसी आंतरिक चोट को ठीक करने का प्रभाव पाया जाता है। इसका यही गुण पेट में पाचन की क्रिया को बढ़ा सकता है, जिससे बच्चे को गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (Gastroesophageal Reflux Disease) व सीने में जलन की समस्या से राहत मिल सकती है।

बच्चों को शहद कैसे खिलाना चाहिए?

शिशु को शहद के फायदे पाना चाहते हैं, तो शुरू में बच्चे को थोड़ी मात्रा में शहद खिलाएं। उसे सादा शहद खिलाने के बजाय निम्नलिखित तरीकों से शहद खिला सकती हैं, जैसेः

  • ओटमील में मिलाकर बच्चों के खिला सकती हैं शहद।
  • दूध में चीनी की जगह शहद मिलाकर बच्चे को पिला सकती हैं।
  • ब्रेड पर शहद लगाकर बच्चे को खिला सकती हैं।
  • फलों व सब्जियों के स्मूदी में शहद में मिलाकर बच्चों को पीने के लिए दे सकती हैं।
  • पैनकेक के सजाने में शहद का इस्तेमाल कर सकती हैं और उसे बच्चे को खाने के लिए दे सकती हैं।

बच्चों के लिए कौन-सा शहद अच्छा है प्राकृतिक या प्रोसेस्ड?

अपने बच्चे को हमेशा प्राकृतिक शहद ही खिलाएं, क्योंकि प्रोसेस्ड शहद को बनाते समय इसके विभिन्न पौष्टिक तत्व नष्ट हो सकते हैं। इसलिए, बच्चे के लिए प्राकृतिक शहद को अच्छा माना जा सकता है।

क्या छोटे शिशु को शहद चुसनी (पेसिफायर) के जरिए दे सकते हैं?

नहीं, विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों के लिए चुसनी यानी पेसिफायर का इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं होता है। इसलिए, छोटे शिशु को चुसनी या निप्पल द्वारा शहद नहीं खिलाया जा सकता है।

बच्चे को कितनी मात्रा में शहद खिलाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार, 1 वर्ष से बड़े छोटे बच्चे को दिनभर में 1 से 2 चम्मच की मात्रा में शहद खिला सकती हैं। पर ध्यान रखें कि इससे अधिक मात्रा में बच्चे को शहद नहीं खिलाना चाहिए।

छोटे बच्चों को शहद देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

छोटे बच्चों को शहद देते समय पेरेंट्स कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं, जैसेः

  • बच्चों को हमेशा शुद्ध प्राकृतिक शहद ही खिलाएं।
  • बाजार से शहद खरीदते समय उसकी पैकेजिंग की अच्छे से जांच करें।
  • शहद को किसी एयरटाइट कांच की शीशी में स्टोर करके रखें। हवा लगने पर यह खराब हो सकता है।
  • लंबे समय से खुले में पड़ा शहद बच्चे को न खिलाएं।

शिशु को किस उम्र में खिलाएं शहद इससे जुड़ी बातें आपने इस लेख में विस्तार से पढ़ी। उम्मीद है कि आप बच्चे को शहद देते समय इस लेख में बताई गई बातों का ध्यान रखेंगे। इसके अलावा, बच्चों को शहद खिलाने के फायदे और नुकसान के बारे में आप बाल विशेषज्ञ की भी सलाह ले सकते हैं।

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