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कोरोना के नए वेरिएंट (ओमिक्रॉन) से शिशु को रखना है दूर तो पिलाएं माँ का दूध

कोरोना के नए वेरिएंट (ओमिक्रॉन) से शिशु को रखना है दूर तो पिलाएं माँ का दूध

21 Feb 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 279 Articles

कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन में स्तनपान के फायदे हो सकते हैं। यह जानकारी नई व हैरानी भरी जरूर है, लेकिन बता दें कि माँ के दूध में कुछ ऐसे पौष्टिक तत्व होते हैं, जो शिशु में ओमिक्रॉन के जोखिम को कम कर सकता है। ओमिक्रॉन या कोरोना संक्रमण में माँ का दूध किस तरह बच्चे के लिए फायदेमंद हो सकता है, इसी की जानकारी हम यहां दे रहे हैं। 

ध्यान रखें कि इस लेख में दी गई जानकारी माँ के दूध के गुणों व उसके सकारात्मक प्रभाव से जुड़ी है। इसलिए, शिशु में ओमिक्रॉन के इलाज के लिए माँ के दूध के सेवन को पूर्ण इलाज नहीं माना जा सकता है। बच्चे में कोरोना संक्रमण के कोई भी लक्षण होने पर तत्काल डॉक्टरी इलाज कराएं।

ओमिक्रॉन में स्तनपान के फायदे और माँ के दूध का कनेक्शन

सबसे पहले इस बात को समझें कि माँ के स्तनों में बनने वाले पहले दूध को कोलोस्ट्रम (Colostrum) कहा जाता है। इसे कोलोस्ट्रम के अलावा, मां का पहला दूध भी कहा जाता है। माँ के स्तनों में इसका निर्माण शिशु के जन्म के अगले 2 से 3 दिनों तक होता रहता है। वहीं, अगर ओमिक्रॉन में स्तनपान के फायदे की बात करें, तो इसके लिए कोलोस्ट्रम में मौजूद एंटीबॉडीज मददगार हो सकते हैं। 

दरअसल, कोलोस्ट्रम में मौजूद एंटीबॉडीज नवजात शिशु के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता के निर्माण में मदद कर सकते हैं। साथ ही, माँ का पहला दूध कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, एनर्जी, विटामिन व मिनरल से भी समृद्ध होता है, जो बच्चे के शरीर को उचित पोषण देने के लिए साथ ही उसे स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद कर सकते हैं। 

इसके अलावा, मां का पहला दूध लो फैट भी होता है। इस वजह से यह शरीर में इम्यूनिटी के निर्माण में आने वाली समस्याओं को कम कर सकता है और बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास को बढ़ावा दे सकता है। इससे बच्चे का शरीर विभिन्न संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित बना रह सकता है।

कोरोना संक्रमण में माँ का दूध नवजा​त शिशुओं के लिए बनेगा सुपरफूड 

एक तरह जहां शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करके कोरोना संक्रमण में माँ का दूध लाभकारी साबित हो सकता है। वहीं, दूसरी तरफ ओमिक्रॉन में स्तनपान के फायदे शिशु के लिए सुपरफूड का भी काम कर सकते हैं। इसके पीछे की वजह है कोलोस्ट्रम में मौजूद इसके विभिन्न विटामिन्स और मिनरल्स। 

इसके यही गुण बच्चे के शरीर को भरपूर ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं और उसके शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में सुपरफूड की भूमिका को भी निभा सकते हैं। 

वहीं, शिशुओं में ओमिक्रॉन या कोविड-19 के जोखिम को कम करने के लिए मजबूत प्रतिक्षा प्रणाली व पौष्टिक तत्वों से भरे सुपरफूड को प्रभावकारी माना जा सकता है। यानी अगर बच्चे का आहार पौष्टिक व स्वस्थ होगा, साथ ही उससे उसकी इम्यूनिटी भी बढ़ती है, तो यह शिशु में ओमिक्रॉन के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

शिशु में ओमिक्रॉन है या नहीं इसका पता कैसे चलेगा?

ओमिक्रॉन का जिक्र करें, तो यह कोरोनावायरस का ही नया वेरिएंट है। इसके सभी लक्षण लगभग कोविड-19 के लक्षण के जैसे ही हो सकते हैं, हालांकि उन लक्षणों की स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। इसके लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं, जैसेः

  • बुखार या कंपकंपी होना
  • खांसी आना
  • सांस लेने में परेशानी होना
  • थकान होना
  • शरीर व मांसपेशियों में दर्द होना
  • सिरदर्द होना
  • स्वाद व सुगंध न आना
  • गले में खराश होना
  • कंजेशन या बहती नाक की समस्या
  • मतली या उल्टी होना 
  • दस्त लगना

अगर ऊपर बताए गए कोविड-19 के लक्षण एक साथ बच्चे में होते हैं और उनकी स्थिति सामान्य से अधिक गंभीर है, तो वह शिशु में ओमिक्रॉन के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में बच्चे को तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट दें। इसमें संदेह नहीं किया जा सकता है कि माँ का दूध पौष्टिक और एंटीबॉटीज से भरपूर होता है, जिस वजह से ओमिक्रॉन में स्तनपान के फायदे हो सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि माँ के दूध के साथ ही शिशु के आहार में अन्य पौष्टिक खाद्य व पेय पदार्थ भी उचित मात्रा में जरूर शामिल करें।

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