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मिसकैरेज और अबॉर्शन में क्या अंतर होता है?

मिसकैरेज और अबॉर्शन में क्या अंतर होता है?

9 Aug 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 554 Articles

हर बार प्रेग्नेंसी सुखद हो, जरूरी नहीं। कई बार महिलाओं को अबॉर्शन और मिसकैरेज का भी सामना करना पड़ता है। हिंदी में इन दोनों शब्दों को गर्भपात के ही नाम से जाना जाता है। यही कारण है कि काफी बड़े पैमाने में लोगों को इन शब्दों के बीच का अंतर नहीं पता होता। क्या है मिसकैरेज और अबॉर्शन में अंतर, यहां विस्तार से समझिए।

मिसकैरेज और अबॉर्शन में क्या अंतर होता है?

मिसकैरेज और अबॉर्शन दोनों में ही भ्रूण को नुकसान पहुंचता है और गर्भावस्था खत्म हो जाती है। लेकिन मिसकैरेज और अबॉर्शन में अंतर को समझने के लिए आपको हमारे साथ आगे बढ़ना पड़ेगा, जिस तरह इस अवस्था से बाहर निकलने के लिए हर माँ को अपने मन को समझाकर जिंदगी में आगे बढ़ना पड़ता है।

क्या है मिसकैरेज?

  • यह स्वाभाविक रूप से होने वाली घटना है, जिसे स्पॉन्टेनियस अबॉर्शन (Spontaneous Abortion) या सहज गर्भपात भी कहा जाता है। 
  • गर्भधारण के 20वें सप्ताह से पहले गर्भावस्था को नुकसान पहुंचने पर उसे मिसकैरेज कहते हैं। 
  • इस दौरान लगभग 26% गर्भों को नुकसान पहुंचता है। 
  • 20वें सप्ताह के बाद हुई भ्रूण की मृत्यु व गर्भ के नुकसान को स्टिलबर्थ कहते हैं। 
  • गर्भावस्था की पहली तिमाही में करीब 80 प्रतिशत महिलाओं का मिसकैरेज होता है। 
  • मिसकैरेज (Spontaneous Abortion) का रिस्क प्रेग्नेंसी के 12वें हफ्ते के बाद कम होने लगता है। 

किसे कहते हैं अबॉर्शन?

  • इस शब्द का इस्तेमाल तब होता है, जब महिला की मर्जी से डॉक्टर की देखरेख में गर्भावस्था को खत्म किया जाता है। 
  • इसमें दवाएं, सर्जिकल प्रक्रियाओं से महिला को गुजरना पड़ता है। 
  • गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए किए गए अबॉर्शन का कारण मां की सेहत या भ्रूण संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं।
मिसकैरेज और अबॉर्शन में अंतर
मिसकैरेज और अबॉर्शन में अंतर होता है, इसे लोग अक्सर एक मान लेते हैं, लेकिन ऐसा है नहीं / चित्र स्रोत – unsplash

मिसकैरेज और अबॉर्शन के कारण | Miscarriage and Abortion Causes in Hindi

मिसकैरेज और अबॉर्शन में अंतर की तरह उसके कारण भी भिन्न होते हैं। इनके कारण के बारे में हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं।

मिसकैरेज के कारण | Miscarriage Causes

मिसकैरेज कई तरह के चिकित्सीय कारणों से हो सकता है, जिनमें से कई व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं होते। हां, मिसकैरेज के कारण समझकर इससे बचने में मदद मिल सकती है।

  • अधिकांश गर्भपात क्रोमोसोम से जुड़ी समस्याओं के कारण होता है, जिसके कारण बच्चे के विकास को असंभव बना देते हैं। 
  • दुर्लभ मामलों में, ये समस्याएं माता या पिता के जीन से संबंधित होती हैं।
  • नशीली दवाएं 
  • शराब और धूम्रपान
  • क्लॉटिंग (थक्के) संबंधी विकार
  • पर्यावरण विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना
  • हार्मोन संबंधी समस्या
  • संक्रमण और अधिक वजन
  • मां के प्रजनन अंगों में समस्याएं
  • शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में समस्या
  • माँ में गंभीर शरीर-व्यापी रोग (जैसे अनियंत्रित मधुमेह)
  • अधिक उम्र में गर्भधारण करना

अबॉर्शन के कारण | Causes of Abortion

अबॉर्शन की प्रक्रिया को मेडिसन या सर्जिकल तरीके से या इन दोनों की मदद से पूरा किया जाता है। इसे अक्सर सर्जिकल गर्भपात या एसपिरेशन गर्भपात कहा जाता है। अबॉर्शन के कारण अधिकतर गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं होती है। इसके अलावा, अगर महिला पूरी तरह से गर्भावस्था के लिए तैयार नहीं है, तो भी वह अबॉर्शन करने का फैसला ले सकती है। 

गर्भपात के बाद की सावधानियां और खुद का ख्याल रखने का तरीका | Care After Abortion or Miscarriage in Hindi

मिसकैरेज हुआ हो या अबॉर्शन करवाया गया है, दोनों ही स्थितियों में महिला को कुछ सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। आगे जानें कि इस दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए और खुद की केयर कैसे करनी चाहिए। 

  • शराब, सिगरेट और अन्य नशीली चीजों से दूर रहें।
  • अधिक मात्रा में चाय, कॉफी या अन्य कैफीन युक्त खाद्य व पेय को लेने से बचें।
  • गम में खाने-पीने से परहेज न करें। स्वस्थ आहार का सेवन करती रहें।
  • अधपका मांस और अंडा खाने से बचें।
  • गर्भपात के बाद एकदम दूसरी प्रेग्नेंसी के बारे में विचार न करें। शोधों के अनुसार 18 महीनें के बाद या  कम से कम 6 महीनें के बाद ही कंसीव की प्लानिंग करनी चाहिए।
  • डॉक्टर से समय-समय पर चेकअप करवाती रहें। बुखार होने पर डॉक्टर को बताएं। यह इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। 
  • एक्सपर्ट की सलाह पर हल्की एक्सरसाइज करती रहें। इससे वजन नियंत्रित रहेगा।

मिसकैरेज होने या किसी जटिलता के चलते अबॉर्शन कराने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भविष्य में दोबारा गर्भधारण नहीं हो पाएगा। कई महिलाएं इस मुश्किल दौर से निकलने के बाद स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं। बशर्ते, इस दौरान खुद का ध्यान रखने में कोई ढील न छोड़ें।

मुख्य चित्र स्रोत – Pexels

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