कैसे पता लगाएं बच्चे को ‘Feeding Problem’ है?

कैसे पता लगाएं बच्चे को ‘Feeding Problem’ है?

26 May 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 540 Articles

बच्चे के पैदा होते ही उसकी हर छोटी-बड़ी बात पर गौर करना पड़ता है। कुछ ऐसा ही फीडिंग के साथ भी है। बच्चा सही तरह से दूध पी रहा है या नहीं व खा रहा है या नहीं, इस पर ध्यान देना पड़ता है। हो सकता है कि बच्चा मुंह में निप्पल लगाकर रखता हो, लेकिन दूध पीता न हो। कटोरी में प्यूरी लेकर रखता हो पर उसे खत्म करने की जगह कपड़े में या इधर-उधर गिरा देता है। यह कुछ और नहीं, बल्कि फीडिंग प्रॉब्लम (Feeding problem) हो सकती है।

फीडिंग प्रॉब्लम क्या है? 

जब बच्चा अपनी उम्र के अनुसार जरूरत से कम या ज्यादा खाता या पीता है, तो उसे फीडिंग प्रॉब्लम कहते हैं। 

छोटे बच्चों में होने वाले भोजन विकार को फीडिंग प्रॉब्लम कहा जाता है। जब यह परेशानी पूर्व-किशोर (pre-teens), किशोरों और वयस्कों में होती है, तो इसे ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है। 

कभी-कभी फीडिंग प्रॉब्लम बिना इलाज के ठीक हो जाती है। कुछ मामलों में शिशु या बच्चे को डॉक्टर को दिखाने की जरूरत भी होती है।

बच्चों में फीडिंग प्रॉब्लम होना आम है। लेकिन इसे पहचानना जरूरी है। ताकि वक्त रहते फीडिंग प्रॉब्लम के इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क किया जा सके।
खाने को लेकर नखरे करते बच्चे का प्रतिकात्मक चित्र / स्रोत – अनस्प्लैश

भोजन विकार (Feeding Problem) की समस्या कब उत्पन्न होती है?

कम्यूनिटी एक्सपर्ट, लैक्टेशन व न्यूट्रिशन, पूजा मराठे बताती हैं शैशवावस्था (Infancy) या प्रारंभिक बचपन में फीडिंग प्रॉब्लम व आहार विकार तब होता है जब कोई शिशु या 6 वर्ष से कम उम्र का बच्चा स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त खाने से इनकार कर देता है। यह पेट की समस्या जैसे किसी चिकित्सीय स्थिति के कारण नहीं होता है। 

दूध पिलाने में गड़बड़ी के परिणामस्वरूप, शिशु या बच्चे का सामान्य रूप से वजन नहीं बढ़ पाता है। बाल चिकित्सा आहार विकार, जिन्हें परिहार/प्रतिबंधात्मक भोजन सेवन विकार (Avoidant/Restrictive food intake disorders) भी कहा जाता है, ऐसी स्थितियां हैं, जिनमें बच्चा खाने से परहेज करता है या खाने को सीमित कर देता है कि वह क्या या कितना खाएगा। 

इससे वजन घटने, पोषण की कमी, पोषक तत्वों के सप्लीमेंट की आवश्यकता या दैनिक गतिविधियों में समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।

फीडिंग प्रॉब्लम के लक्षण 

कभी-कभी बच्चा चूसने, चबाने या निगलने में सक्षम नहीं होने के कारण दूध पीने  में या फीडिंग में प्रॉब्लम होती है। इसका कारण बर्थ डिफेक्ट फांक तालु (cleft palate) या टंग टाई (tongue tie) से उपजी हो सकती है। 

पूजा मराठे के अनुसार, शिशु को दूध पिलाने और निगलने की समस्याओं के कुछ संभावित कारणों में शिशु का समय से पहले जन्म, शिशु का जन्म के समय कम वजन, कुछ दर्दनाक जन्म से मौजूद चोटें (सेरेब्रल पाल्सी) और खाने और सांस लेने में समन्वय संबंधी समस्या शामिल हैं। 

जब कारण कम स्पष्ट हो, तो आप इन संकेतों को देख सकते हैं:

  • ठीक से वजन नहीं बढ़ना
  • भोजन के समय दम घुटना
  • दम घुटना या गैगिंग करना
  • खाते या पीते समय खांसना
  • उम्र के हिसाब से विकास नहीं होना
  • 8 महीने की उम्र तक बेबी फूड प्यूरी नहीं लेना
  • मुंह में डाले वाले खाने को मुंह से बाहर फेंकना
  • 12 महीने की उम्र में भी टेबल फूड नहीं खाना
  • 16 महीने से कप का उपयोग नहीं करना या बेबी फूड नहीं लेना
  • अधिकतर भोजन करते समय रोना
  • नियमित रूप से भोजन करने के लिए 30 मिनट से अधिक समय लेना

परिवार में शामिल फीडिंग प्रॉब्लम के लक्षण :

  • अपने बच्चे के साथ खाने और खिलाने के बारे में बहस करना
  • खाने की समस्याएं, जो आपके बच्चे को आपसे मिल सकती हैं

फीडिंग प्रॉब्लम का बचाव कैसे किया जा सकता है? 

फीडिंग प्रॉब्लम का बचाव नहीं किया जा सकता है। हां, कुछ तरीकों से बच्चे को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

  • खाने को लेकर बहस न करना
  • मजेदार तरीके से बच्चे को खाना खिलाना
  • बच्चे को जबरदस्ती भोजन खिलाने की कोशिश न करें, प्यार से खिलाएं,
  • सब्र रखें

फीडिंग प्रॉब्लम से कितने प्रतिशत बच्चे होते हैं प्रभावित?

फीडिंग प्रॉब्लम सामान्य रूप से विकासशील बच्चों में 25% तक रहती है। साथ ही न्यूरोडेवलपमेंटल डिसेबिलिटी के कारण 35% बच्चों में होती है। यह फीडिंग प्रॉब्लम भोजन खाने में दिक्कत या खाने में या दूध पीने में आनाकानी करना है। 

अब आप समझ ही गए होंगे कि फीडिंग प्रॉब्लम क्या है और इससे कैसे निपटना चाहिए। अगर कभी भी आपको लगे कि शिशु बहुत दिनों से दूध पीने व खाना खाने में आनाकानी कर रहा है, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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