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बच्चे के लिए वीनिंग को आसान बनाने के 5 तरीके

बच्चे के लिए वीनिंग को आसान बनाने के 5 तरीके

2 May 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 260 Articles

वीनिंग बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण माइलस्टोन है। इसके लिए सही तरीके को अपनाने और बच्चे को प्रोत्साहित करने की जरूरत होती है। इसलिए यहां आज हम वीनिंग को आसान बनाने के तरीके पर चर्चा करेंगे। इन तरीकों से पहले हम सरल शब्दों में बताएंगे वीनिंग क्या है और क्या बच्चे वीनिंग का संकेत भी देते हैं। चलिए, तो बिना देरी के आगे बढ़ते हैं।

वीनिंग क्या है? 

छोटे बच्चे का धीरे-धीरे माँ का दूध छुड़ाना और उसे ठोस आहार देने की प्रक्रिया को वीनिंग (What is Weaning in Hindi) कहते हैं। इस दौरान बच्चे के पोषण के लिए अन्य स्रोतों को उसकी डाइट में शामिल किया जाता है। वीनिंग यानी बच्चे का दूध छुड़ाना और अनाज यानि ठोस खाद्य पदार्थ खिलाना शुरू करना।

ये संकेत बताते हैं कि आपका बच्चा वीनिंग/दूध छोड़ने के लिए तैयार है

कुछ बच्चे माँ का दूध छोड़ना ही नहीं चाहते, क्योंकि वो उसी में खुश और संतुष्ट रहते हैं। लेकिन कुछ बच्चे माँ को संकेत देते हैं कि वो दूध छुड़ाने की प्रक्रिया के लिए तैयार हैं। क्या हैं वो संकते आइए जानते हैं –

  • दूध पीने के समय रूचि न दिखाना या स्तनपान करने में आनाकानी करना
  • पहले की तुलना में कम समय तक दूध पीना
  • दूध पीते-पीते रूक जाना और आसपास की चीजों को देखना
  • स्तन से खेलना जैसे उसे लगातार खींचना।
  • स्तन को सिर्फ इतना चूसना कि उससे दूध ना निकले।

नोट – अगर शिशु छह महीने से पहले ये संकेत दिखाता है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। इससे शिशु दूध पीने में क्यों आनाकानी करता है, यह समझने में मदद मिलेगी।  

वीनिंग को आसान बनाने के तरीके
फिंगर फूड्स खाता बच्चा / स्रोत – पिक्साबे

वीनिंग को आसान कैसे बनाएं 

बच्चे का रूझान दूध से ठोस खाद्य पदार्थ की तरफ लेकर जाना इतना आसान नहीं है। ऐसे में वीनिंग (weaning in hindi) को आसान बनाने के लिए (How to Make Weaning Easier in Hindi) आप इन टिप्स को अपना सकती हैं।

  1. अपने पति व घर के अन्य सदस्यों को कहें कि बच्चे को दूध का कप या बोतल दें। आपसे बच्चा दूध की बोतल व कप लेने के बजाय स्तनपान करने की जिद कर सकता है। इसलिए घरवालों से ही मदद लेना बेहतर होगा।
  2. छह महीने के बाद से ही शिशु को मसला हुआ आलू, फल या दाल का पानी व सूप देना शुरू करें। इससे बच्चे की रूचि दूसरी चीजों की तरफ भी बढ़ने लगेगी और वो 9 महीने तक आते-आते आसानी से दूध छोड़ देगा। 
  3. बच्चे को स्तनपान छुड़ाने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा दिक्कत यह होती है कि उसे लगता है कि माँ से उसे वो प्यार, समय और उतना ध्यान नहीं मिल रहा है। ऐसे में आप स्तनपान कराने की जगह उसके साथ खेलें, उसे कुछ देर गले से लगाकर रखें। इससे आप दोनों के बीच एक अलग बॉन्ड बनेगा।
  4. स्तनपान छुड़ाने की शुरुआती दिनों की प्रक्रिया में हर दो से पांच  दिन में एक सत्र को छोड़ें। उदाहरण के लिए आप दिन में छह बार बच्चे को दूध पिलाती हैं, तो एक दिन सिर्फ पांच बार पिलाएं। उसके बाद दो दिन बाद दोबारा सिर्फ पांच बार पिलाएं।

    जब बच्चे को इसकी आदत लग जाए, तो इसी तरह से दिन में चार बार, फिर तीन और करते दिन में एक बार ही दूध पिलाना शुरू करें। शुरुआत आप दोपहर के सत्र को छुड़वाकर कर सकती हैं।  इसी तरह आप स्तनपान का समय भी घटा सकती हैं। आप अगर पहले हर बार पांच मिनट तक दूध पिलाती थीं, तो अब उसे दो या तीन मिनट कर दें।
  5. इस प्रक्रिया में सब्र का होना बहुत जरूरी है। सब्र के साथ ही यह भी ध्यान दें कि बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाएगा, उसका दूध छोड़ना उतना ही मुश्किल होगा। इसलिए दूध छुड़ाने की प्रक्रिया को 7 से 8 महीने या 6 महीने के बाद ही शुरू कर दें। इस प्रक्रिया को इतने धीरे-धीरे बच्चे की आदत में शुमार करें कि उसे पता ही न लगे। साल भर का होने से पहले ही बच्चा दूध छोड़ देगा।

कई बार माँ जल्दबाजी करती हैं। वीनिंग की प्रक्रिया जल्दबाजी नहीं, समझ और सूझबूझ की है। इसलिए इसे समय पर ही शुरू करें, ताकि धीरे-धीरे बच्चे का दूध छुड़वाने के साथ ही उसमें पौष्टिक आहार की आदत डाली जाए। छह महीने के बाद बच्चे में कप व चम्मच से पानी पीने की आदत डालें। फिर इसी तरह से जूस और मसले हुए आहार व गाय का दूध। इस तरह से बच्चे में कटोरी, चम्मच जैसे विभिन्न बर्तन से खाने की आदत होने लगेगी और बच्चा दूध पीना समय रहते छोड़ देगा।

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