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टीकाकरण चार्ट, जानिए टीकाकरण कैसे साबित होता है नवजात शिशुओं के लिए एक वरदान

टीकाकरण चार्ट, जानिए टीकाकरण कैसे साबित होता है नवजात शिशुओं के लिए एक वरदान

28 Apr 2018 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 554 Articles

स्वस्थ बच्चे के जन्म के बाद उसकी पर्याप्त देखभाल और पोषण के साथ ही बीमारियों से बच्चे की रक्षा भी महत्वपूर्ण है। इसलिए जन्म के बाद बच्चे का टीकाकरण किया जाता है। विभिन्न आयु वर्ग के आधार पर शिशु का टीकाकरण किया जाता है। टीकाकरण के बारे में आप टीकाकरण चार्ट के माध्यम से अधिक जान सकते हैं। इस लेख में हमने टीकाकरण किसे कहते हैं, टीकाकरण के लाभ और किस उम्र में कौन-सा टीका लगना चाहिए, इसकी पूरी जानकारी दी है।

सबसे पहले जानते हैं कि टीकाकरण किसे कहते हैं।

क्या है टीकाकरण | टीकाकरण किसे कहते हैं?

टीकाकरण इंजेक्शन या मुंह के माध्यम से शरीर तक पहुंचाई जाने वाली दवाई है। इसे इंग्लिश में वैक्सीनेशन कहा जाता है। टीकाकरण से जानलेवा बीमारियों से बचने में मदद मिलती है। क्योंकि, टीकाकरण के दौरान लगाई जाने वाली दवाई हमारी इम्यूनिटी को बीमारी से लड़ने की क्षमता और मजबूती देती है। 

टीके संक्रमण की नकल करके (Imitating an infection) कुछ बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। ये भविष्य के संक्रमण से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को तैयार करता है। 

आगे समझते हैं कि टीकाकरण क्यों किया जाता है।

बच्चों के लिए टीकाकरण का महत्व | टीकाकरण के लाभ

बच्चे का टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है। टीकाकरण के लाभ बहुत हैं। टीकाकरण से बच्चे को जानलेवा बीमारियों से बचाने में मदद मिलती हैं। जैसे कि पोलिया और लकवा के केस धीरे-धीरे टीकाकरण से इनके मामले कम होते गए हैं।

बच्चे व नवजात शिशु का टीकाकरण एकदम सुरक्षित होता है। बस टीका लगाने के बाद उन्हें हल्का दर्द हो सकता है, जो बीमारी की वजह से होने वाले गंभीर परिणाम से बचा सकता है। 

टीकाकरण के लाभ सिर्फ बच्चे को ही नहीं, बल्कि उसकी आने वाली पीढ़ी को भी बीमारियों से बचाया जा सकता है।

समय पर नवजात शिशु का टीकाकरण करने से बीमारी के इलाज में पैसों को खर्च होने से बचाया जा सकता है। साथ ही शिशु के बीमार होने से उसकी पढ़ाई में होने वाली हानि से बचाया जा सकता है। 

नवजात शिशु टीकाकरण चार्ट 2022 | Shishu Tikakaran Chart

आगे हम नवजात शिशु टीकाकरण चार्ट 2022 लेकर आए हैं। इनकी मदद से आपको बच्चे का टीकाकरण किस उम्र में होता है और कौन-सा टीका उसे लगता है, इसे समझने में मदद मिलेगी।

आयुबीमारी के लिए टीका
6 सप्ताह     डिप्थीरिया, पेट्यूसिस या काली खांसी और टेटनस जैसी बीमारियों के लिए संयोजित डीटीपी टीके की पहली खुराक।इंजेक्शन पोलियो टीका (आईपीवी) या मौखिक पोलियो टीका (ओपीवी) की पहली खुराकहेपेटाइटिस बी टीका की दूसरी खुराक (हेप-बी)इन्फ्लूएंजा के खिलाफ हिब (हैमोफिलस इन्फ्लूएंजा प्रकार बी) की पहली खुराक।रोटावायरस की वजह से गंभीर दस्त जैसे बीमारियों के खिलाफ रोटावायरस टीका की पहली खुराक।बच्चों में निमोनिया के खिलाफ पीसीवी (न्यूमोकोकल संयुग्मित टीका) की पहली खुराक।
10 सप्ताहडीटीपी, आईपीवी या ओपीवी, हिब, रोटावायरस और पीसीवी की दूसरी खुराक।
14 सप्ताहडीटीपी, आईपीवी या ओपीवी, हिब, रोटावायरस और पीसीवी की तीसरी खुराक।
6 महीनेओपीवी की खुराक और हेप-बी की तीसरी खुराक
9 महीने ओपीवी की खुराक और एमएमआर की पहली खुराक। एमएमआर टीका मम्प्स, खसरा और रूबेला जैसी बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा के लिए है (जर्मन खसरा)। टायफाइड के खिलाफ टाइफाइड कंजुगेट टीका (टीसीवी) एमएमआर टीका के 4 सप्ताह बाद दी जाती है। बच्चे की उम्र के 12 महीने तक दिया जा सकता है।
1 सालहेपेटाइटिस ए के लिए जिम्मेदार वायरस के खिलाफ हेप–ए की पहली खुराक
नवजात शिशु टीकाकरण चार्ट 2022
बच्चों का टीकाकरण चार्ट
टीकाकरण के बाद रोती बच्ची – स्रोत – पिक्सेल्स

बच्चों का टीकाकरण चार्ट

नवजात शिशु टीकाकरण चार्ट 2022 के बाद टीकों के प्रकार पर एक नजर डालते हैं।

शिशुओं को लगने वाले टीकों के प्रकार – H2 

वैक्सीन के प्रकार में इनएक्टिवेटेड टीके, अटेन्यूऐटेड टीके, टॉक्साइड टीके और सबयूनिट टीके शामिल हैं। इनके अंतर्गत कौन-से टीके आते हैं उनके बारे में हम आगे टेबल के माध्यम से बता रहे हैं – 

अटेन्यूऐटेड टीकेइनएक्टिवेटेड टीकेटॉक्साइड टीकेसबयूनिट कॉन्जुगेट टीके
चेचकपोलियो (IPV)डिप्थीरियाहेपेटाइटिस-बी
खसरा,  मम्प्स, रूबेला (MMR वैक्सिन)हेपेटाइटिस-एटेटनसइंफ्लुएंजा
चिकन पॉक्सरेबीजहेमोफिलस इंफ्लुएंजा टाइप-बी
इंफ्लुएंजाकाली खांसी
रोटावायरसन्यूमोकोकल
जोस्टरमेनिंगोकोक्सल
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस
टीकों के प्रकार

टीकाकरण के दौरान सावधानियां – H2 

टीके के दुष्प्रभाव शिशु को बचाने के लिए आप निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए।

  • डॉक्टर द्वारा टीकाकरण के दौरान बताई गई बातों को फॉलो करें
  • टीकाकरण के बाद इंजेक्शन वाली जगह पर किसी तरह की दवाई न लगाएं
  • बच्चे के बुखार को कम करने के लिए उसके सिर पर ठंडी पानी की पट्टी लगाएं
  • छोटे स्पॉट अगर फफोले में तब्दील होने लगे, तो उस जगह में हवा लगने दें। इससे घाव को जल्दी भरने में मदद मिलेगी।

टीकाकरण के दुष्प्रभाव

बच्चे टीकाकरण के बाद लक्षण के रूप में कुछ दुष्प्रभाव से गुजरते हैं। आगे जानते हैं कि बच्चे टीकाकरण के बाद लक्षण के रूप में किन दुष्प्रभावों का सामना कर सकते हैं – 

  • इंजेक्शन वाली जगह लाल हो सकती है।
  • टीके लगने की वजह से थोड़ा दर्द हो सकता है। 
  • जिस स्थान पर इंजेक्शन लगा हो, वहां हल्की सूजन हो सकती है। 
  • इंजेक्शन लगने वाली त्वचा पर छोटा-सा दाग दिख सकता है।
  • रोटावायरस टीकाकरण के 7 दिन बाद उल्टी व दस्त हो सकते हैं। इसलिए, उसके हाथ धुलाते रहें और हाइजीन का ध्यान रखें।
  • न्यूमोकोकल टीकाकरण से मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।
  • डिप्थीरिया टेटनस के टीके से बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है और उसे थकान लग सकती है।
  • ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के टीकाकरण से मतली हो सकती है। 
  • मेनिंगोकोकल सी टीकाकरण से बच्चे का सिर दर्द, भूख में कमी और चिड़चिड़ापन हो सकता है।
  • खसरा मम्पस रूबेला के टीकाकरण से लाल चकत्ते, खांसी, नाक का बहना जैसी दिक्कतें हो सकती है। 
  • इंजेक्शन की जगह पर छोटे-छोटे दाने हो सकते हैं। 
  • छोटी चेचक के टीकाकरण से लाल चकत्ते, खांसी, फूली हुई आंखें, लार ग्रंथियों में सूजन हो सकती है।
  • हेपेटाइटिस बी से चक्कर, पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द और अनिद्रा व कान का दर्द हो सकता है।
  • बीसीजी वैक्सीन से लिम्प नोड्स में सूजन, फोड़ा व हड्डी में सूजन हो सकती है।
  • इंजेक्शन वाली जगह पर जलन भी हो सकती है।

टीकाकरण न होने के नकारात्मक प्रभाव

बीमारियों की जटिलताओं से बचने के लिए बच्चों का टीकाकरण बहुत जरूरी है। अगर वैक्सीन न लगाई जाए, तो क्या होगा यह हम आगे बता रहे हैं।

  • खसरा का टीकाकरण न हो, तो यह जानलेवा हो सकता है। 
  • इंफ्लुएंजा का टीकाकरण न करने के कारण गंभीर सांस संबंधी विकार हो सकते हैं। 
  • चिकनपॉक्स का टीका न हो, तो यह इंफेक्शन दूसरों को भी हो सकता है। साथ ही मृत्यु का कारण भी बन सकता है। 
  • काली खांसी बच्चों को बहुत जल्दी प्रभावित करती है। इससे बच्चे को बहुत असुविधा हो सकती है। 
  • बच्चों का टीकाकरण नहीं होने से उसे बीमारियों का खतरा होता है।

टीकाकरण बच्चे को कई हानिकारक बीमारियों से बचाने के लिए सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है। टीकाकरण से जुड़ी लापरवाही से शिशु का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इसलिए, शिशु का टीकाकरण समय पर करवाते रहें।

ध्यान दें कि लेख में दी गई जानकारी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। समय-समय पर बच्चे के टिकाकरण के लिए डॉक्टर से संपर्क करते रहें।

अन्य सामान्य प्रश्न : H2

शिशु के जन्म के बाद कितने टीके लगते हैं?

शिशु के जन्म के बाद तीन वैक्सीन लगती हैं। फिर धीरे-धीरे 12 से 14 टीके लगते हैं।

नवजात शिशु को टीका कब कब लगता है?

2 महीने, 4 महीने, 6 महीने और एक साल की उम्र में शिशु को कई तरह की वैक्‍सीन लगती हैं।

भारत में नवजात शिशु को कौन सी वैक्सीन दी जाती है?

नवजात शिशु को बीसीजी, हेपेटाइटिस बी 1,आईपीवी जैसी अनेक वैक्सीन दी जाती है।

बच्चों को टीका कैसे लगता है?

बच्चों को टीका दो तरह से लगता है। एक इंजेक्शन के माध्यम से दूसरा पीने वाली बूंदें, जैसे पोलियो ड्रॉप्स।

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