बच्चों के पेट में कीड़े होना आम बात है, लेकिन उनके लक्षण और इलाज को नज़रअंदाज़ न करें

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बच्चों के पेट में कीड़े होना आम बात है, लेकिन उनके लक्षण और इलाज को नज़रअंदाज़ न करें

बच्चों की स्किन और उनकी बॉडी, दोनों को ही शुरूआती टाइम में इंफ़ेक्शन का ख़तरा रहता है। अभी तक उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी मज़बूत नहीं हुई होती कि इनसे लड़ सके, इसलिए बच्चों को वर्म इंफ़ेक्शन या संक्रमण होते ही उसका इलाज ज़रूर करें।



बच्चों में कीड़े/ वर्म क्यों होते हैं?
बड़ों के मुक़ाबले बच्चों में इस तरह के संक्रमण के Chances ज़्यादा रहते हैं। ये संक्रमण डेली काम जैसे पार्क या घास पर नंगे पैर चलने या खेलने से भी हो जाते हैं। बच्चों को वर्म संक्रमण का ख़तरा अलग-अलग जगहों पर रहता है, जिनमें मुख्य हैं:

1. संक्रमित मिट्टी:
वर्म्स का बच्चों के शरीर में घुसने का सबसे आसान ज़रिया है मिट्टी। मिट्टी में नमी होने की वजह से ये पैरासाइट या वर्म्स के जन्म के लिए परफ़ेक्ट जगह होती है।



2. साफ़-सफ़ाई न होना:
शौच के समय हाथ न धोना, खाने से पहले और बाद में हाथ न धोना या फिर खुले में शौच करने से इस तरह से संक्रमण सबसे पहले पकड़ता है। घर से लेकर आस-पास सफ़ाई न होना इसकी सबसे बड़ी वजह बनती है।



3. अधपका खाना:
कटे हुए फल या फिर अधपके पोर्क, चिकन की वजह से भी बैक्टीरिया बच्चे के शरीर में जाने में सक्षम होते हैं. ये न सिर्फ़ शरीर बल्कि दिमाग़ को भी डैमेज कर सकते हैं।



4. बड़ों से बच्चों तक
घर के बड़े, ख़ास कर वो, जिनके साथ बच्चा ज़्यादा समय बिताता है, वो अगर साफ़-सफाई न रखें, तो उनसे भी ये बच्चों में संक्रमित होता है। वर्म्स नाखूनों पर अंडे देते हैं, साफ़ न रखने से ये आसानी से खाना खिलाते समय बच्चों तक जा सकते हैं।



5. संक्रमित पालतू जानवर
यूँ तो बढ़ते बच्चों के लिए घर के पालतू जानवर का साथ सही माना जाता है, लेकिन उनके शरीर में पल रहे कीड़े आसानी से बच्चों तक जा सकते हैं।


कैसे पता चलता है कि बच्चे को संक्रमण हुआ है?
संक्रमण के लक्षण कई बार इतने हलके होते हैं कि माँ-बाप इन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं। सबसे कॉमन लक्षण हैं:

1. खाना एकदम से कम होना और बीच-बीच में भूख लगना
2. पेट दर्द
3. वज़न कम होना
4. हमेशा भूख लगना
5. अनिमिआ (ये हुकवर्म संक्रमण की निशानी है)
6. पिनवर्म, थ्रेडवर्म के केस में बच्चे हमेशा Rectal (मलद्वार) एरिया में खुजली की शिकायत करते हैं।
7. पॉटी में खून आना
8. बार-बार पेशाब जाना और दर्द होना
9. सोने में परेशानी होना और इस वजह से चिडचिड़ापन
10. खांसी
11. कुपोषण
12. उम्र के हिसाब से न बढ़ना


कीड़ों के संक्रमण से बचाने के नेचुरल तरीके

यूँ तो वर्म के हिसाब से डॉक्टर (Pediatrician) बच्चे के लिए दवाई लिखता है। छोटे बच्चों को सिरप और बड़ों को टेबलेट्स दी जाती हैं। इसकी दवाई का कोर्स ज़्यादा दिनों का नहीं होता, आप कुछ दिनों के भीतर इसकी दवाईयां बंद करवा सकते हैं। लेकिन बेहतर हो बच्चे को संक्रमण से पहले ही दवा दी जाएँ, ताकि इसकी नौबत ही न आये।

इसके अलावा कुछ घरेलु नुस्खे भी हैं, जो बच्चे को संक्रमण के दौरान होने वाली असहजता से बचाते हैं। ये कीड़ों को ख़त्म तो नहीं कर सकते लेकिन बच्चे को इनसे आराम ज़रूर मिलता है।

लहसुन:
लहसुन को प्राकृतिक डीवर्मिंग एजेंट (कीड़ों को मारने वाला) माना जाता है। लहसुन में मौजूद सल्फ़र कीड़ों को ख़त्म करने में मदद करता है। दिन में लहसुन की तीन कलियाँ इसके इलाज में असरदायक हैं।



कच्चा पपीता:
कच्चे पपीते में मौजूद एंजाइम, Papain पेट में मौजूद कीड़ों को मारने और उन्हें शरीर से बाहर निकालने में सहायक है। कीड़े मारने के लिए बच्चे को लगातार तीन दिन एक चम्मच क्रश किये हुए कच्चे पपीते को गुनगुने दूध और शहद के साथ दें।



अजवाईन:

अजवाईन में मौजूद Thymol कीड़ों को पनपने नहीं देता। इसे खाली पेट गुड़ के साथ लें, आराम मिलेगा।

 

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