गर्भावस्था के दौरान पीलीया का भ्रूण पर क्या प्रभाव होता है ?

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गर्भावस्था के दौरान पीलीया का भ्रूण पर क्या प्रभाव होता है ?

पीलिया अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। बल्कि, यह शरीर के अंदर विकसित होने वाले एक रोग प्रक्रिया का संकेत है। गर्भवती महिलाओं में पीलिया परेशानी है, क्योंकि यह भ्रूण और मातृ स्वास्थ्य के लिए गंभीर परिणाम का कारण हो सकता है।

 

गर्भावस्था के दौरान पीलिया और शिशुओं पर इसके प्रभाव के बारे में जानने के लिए पढ़ें।



पीलिया क्या है?

 

पीलिया एक ऐसी स्थिति है जो आपके जिगर के कामकाज में गिरावट का कारण बनती है। पीलिया का सबसे आम लक्षण यह है कि यह आपकी त्वचा और आपकी आंखों को पीलापन देता है व आपका मूत्र गहरे रंग का हो जाता है। पीलिया के परिणाम सहज से लेकर घातक तक हो सकते हैं। नवजात शिशुओं में पीलिया काफी आम है। हालांकि वयस्क भी इस स्थिति से पीड़ित हो सकते हैं, गर्भावस्था के दौरान पीलिया अपेक्षाकृत दुर्लभ है।

 

गर्भावस्था के दौरान पीलिया के कारण

 

१)हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम

 

-गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में बार-बार होने वाली उल्टी के कारण शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और निर्जलीकरण हो जाना ।
-यह जिगर के समुचित कार्य को प्रभावित कर सकता है और पीलिया का कारण बन सकता है।

 

२) HELLP ​​सिंड्रोम

 

-एचईएलपी (हेमोलिसिस, एलिवेटेड लिवर एंजाइम और लो प्लेटलेट्स) सिंड्रोम अक्सर उन महिलाओं को प्रभावित करता है जो प्री-एक्लेमप्सिया से पीड़ित हैं
-यह गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में हो सकता है ।
-इस सिंड्रोम से प्रभावित महिलाएं भी जिगर की क्षति से पीड़ित होती हैं, जिससे पीलिया हो सकता है।

 

३)अधिक फैटी लीवर

 

-गर्भावस्था के अंतिम चरण में कभी-कभी जिगर में फैटी एसिड जमा हो सकता है।
- यह जिगर की शिथिलता और पीलिया का कारण बन सकता ।
-ऐसी स्थिति माँ और उसके बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

 

शिशुओं पर गर्भावस्था के दौरान पीलिया के प्रभाव क्या हैं?

 

गर्भावस्था के दौरान पीलिया के परिणामस्वरूप बच्चे  पर कई गंभीर प्रभाव हो सकते हैं।


- शिशु के प्रसव से जुड़ी जटिलताएँ
- शिशु के समग्र विकास का बाधित होना।

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