डाउन सिंड्रोम को कैसे पहचाने, इसके कारण और ट्रीटमेंट

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डाउन सिंड्रोम को कैसे पहचाने, इसके कारण और ट्रीटमेंट

बच्चे के जन्म के बाद एक मां के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी बच्चों की अच्छी तरह से परवरिश करना है। बच्चों को अच्छी जिंदगी देना, लेकिन क्या हो जब गर्भावस्था के दौरान ही पता चला कि आपको अपने आने वाले बच्चें को एक विशेष परवरिश देनी है। यह खास देखभाल तब दी जाती है जब बच्चे के साथ डाउन सिंड्रोम की स्थिति हो।

डाउन सिंड्रोम क्या है

डाउन सिंड्रोम की स्थिति में बच्चा कई शारीरिक और मानसिक विकार से जूझता है। हालांकि यह एक आनुवंशिक विकार है, लेकिन गर्भावस्था में किसी कमी की वजह से भी यह स्थिति होती है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चा अपने 21 वें गुणसूत्र से दोगुना होने की वजह से पैदा होता है। जिसकी वजह से बच्चों के शरीर, चेहरे और दिमाग का विकास देरी से होता है। डाउन सिंड्रोम को अगर सही तरह से समझा जाए तो शारीरिक संपर्क के दौरान माता (xx) 23 क्रोमोसोम और पिता के 23 (xy) क्रोमोसोम गर्भस्थ भ्रूण तक पहुंचते हैं। लेकिन अगर इनमें से 21वें क्रोमोसोम नहीं बन पाते है। इस स्थिति में बच्चों के विकास में कई तरह की कमियां आने लगती है।

डाउन सिंड्रोम के लक्षण बच्चों में क्या होते है

  • चेहरे का सपाट होना
  • हाथ पैरों की बनावट असामान्य होना।
  • बच्चों का कद छोटा होना।
  • आंखों का ज्यादा उभरा होना।
  • जीभ का उभरना।
  • बोलने में परेशानी।
  • बच्चों की चाल में असुविधा।

 

डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों में जन्मजात भी कई तरह की समस्या होती है। जैसे कि हार्ट संबधी परेशानी। बहरापन होना, मोटापा, सांस लेने में दिक्कत, पैरों का असामान्य होना। थायराइड, मानसिक तौर से परेशानी इसके अलावा स्किन इंफेक्शवन, यूरिन संबधी समस्या बच्चों में देखने को मिलती है।

 

डाउन सिंड्रोम का इलाज

डाउन सिंड्रोम ऐसी अवस्था है जिसके लिए बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। हालांकि बहुत से केस में डॉक्टर कई तरह की दवाइयों, से कुछ कमियों को ठीक करने की कोशिश करते है। लेकिन आज ऐसे बहुत से संगठन है जो डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को समझने में मदद करते है। इन बच्चों के लिए अलग से एक्टिविटी क्लास होती है। आज ऐसे बहुत से बच्चे है जो इस समस्या से पीड़ित होकर भी आगे बढ़ रहे है।

 

डाउन सिंड्रोम बच्चों के लिए पैरेंट्स का सपोर्ट क्यों जरूरी है

  • प्रत्येक माता-पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा हेल्दी हो। लेकिन अगर डाउन सिंड्रोम जैसी समस्या बच्चे में है तो उससे कैसे निपटा जाए। इस परेशानी से निपटना इतना आसान नहीं है। लेकिन अगर आपके अंदर थोडा सा धैर्य है तो आप अपने बच्चे को काफी कुछ सिखा सकते है।
  • बच्चे के पोषण का ध्यान बचपन से ही रखे, हांलिकी ऐसे बच्चों के साथ डील करने में मुश्किल होगी। लेकिन अपने बच्चे को जन्म दिया है। इसलिए आप जितने अच्छे से अपने बच्चे को संभाल सकते है और कोई नहीं।
  • बच्चे हमेशा प्यार की भाषा समझते है इसलिए आप बच्चों से बहुत प्यार से काम ले। आप यह नहीं सोचे कि आपका बच्चा और बच्चों से अलग है। हां कुछ परेशानियां होगी लेकिन आपको खुद पर संयम रखना होगा। हो सकता है आप किसी पब्लिक प्लेस पर जाए तो वहां पर आपको दिक्कत हो। लेकिन ऐसे में पहली प्राथमिकता अपने बच्चे को दे।
  • क्योंकि डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को यह नहीं पता होता है कि वह जो कर रहे है वह सही है या गलत। जरूरी नहीं कि इस डाउन सिंड्रोम बच्चों को हमेशा आपके साथ की जरूरत हो अगर आप बच्चों का सही समय पर सहयोग करे तो यह बच्चे भी बहुत कुछ कर सकते है।
  • किसी भी पेरेंट्स के लिए बच्चों की अच्छी ग्रोथ बहुत मायने लगती है। लेकिन इस स्थिति में पेरेंट्स भी परेशान हो जाते है कि वह कैसे अपने बच्चों को संभाले। आज हमारे देश में ऐसी बहुत सी स्वयंसेवी संस्था जो इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बहुत कुछ कर रही है। बहुत से बच्चे अपने आत्म निर्भर भी है जिनको किसी के सहारे की आवश्यकता नहीं है। इसलिए अपने बच्चों को मानसिक सहयोग भी दे और उन्हें इस काबिल बनाए कि समाज में इन बच्चों की अलग पहचान बने।
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