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सेक्स एजुकेशन के बारे में 2 से 7 साल के बच्चों  से कैसे बात करें

सेक्स एजुकेशन के बारे में 2 से 7 साल के बच्चों से कैसे बात करें

4 Oct 2021 | 1 min Read

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सेक्स शब्द जो शायद आप अपने बच्चों के सामने तो बिल्कुल भी बोलना नहीं पसंद करेगें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चे सबसे ज्यादा यौन शोषण का शिकार 2 से 5 साल की उम्र में होते है। इसकी वजह है कि बच्चों को यह नहीं पता होता है कि उनके साथ क्या हो रहा है। इसलिए सेक्स और सेक्स एजुकेशन का सही महत्व बच्चों को समझाना होगा। 2 साल के बच्चे के लिए शायद यह समझना बहुत मुश्किल होगा। लेकिन अगर तभी से शुरुआत कर दी जाए तो बैड टच जैसी बातें काफी कम हो जाए।

इस उम्र में क्या उम्मीद करें

अपने बच्चे को सेक्स एजुकेशन देना एक अच्छा विचार है, क्योंकि इससे उन्हें अपने शरीर को समझने और इसके प्रति सजग रहने की सीख मिलती है। इस उम्र में यानि बचपन में बच्चों के मन में कई सवाल हो सकते हैं जिनके बारे में ताज्जुब करने जैसा कुछ भी नहीं है। वो अपने आस-पास घटने वाली घटनाओं को देखते हैं और उसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हो सकते हैं जैसे माँ की अलमारी में रखे सैनेटरी नैपकिन क्या हैं या लड़के और लड़कियों के अंदर के वस्त्र अलग-अलग क्यों होते हैं? असल में यह बहुत ही नैचुरल चाइल्ड बिहेवियर है जिसका फायदा ये है कि बच्चा जिस उम्र में सवाल करना शुरू कर दे, उसी समय आप उसे सेक्सुअली एजुकेट कर सकते हैं।

अगर आप अपने बच्चे को किसी भी तरह के अनैतिक व्यवहार से सुरक्षित रखना चाहते हैं तो आपको अपने बच्चे द्वारा प्रश्न पूछने के लिए प्रतीक्षा करने की भी आवश्यकता नहीं है। आप यह पूछकर बातचीत शुरू कर सकते हैं, ‘क्या आपने कभी सोचा है कि आप कैसे पैदा हुए या आप कहाँ से आए हैं?’ या आप एक गर्भवती महिला को देखकर कह सकते हैं कि ‘उस महिला के अंदर एक बच्चा बढ़ रहा है। क्या आप जानते हैं कि वह बच्चा वहां कैसे पहुंचा?’

चलिए, जानते हैं कि बच्चों से बात करने के लिए कौन से तीन अहम कदम उठाए जा सकते हैं ?

सेक्स के बारे में बात करने के लिए तीन कदम

माता-पिता अक्सर इस असमंजस में रहते हैं बच्चों से सेक्स के बारे बात कैसे की जाए। यहाँ हम कुछ बेसिक टिप्स बता रहे हैं जो आपको अपने बच्चे से सेक्स के बारे में बात करने में मदद कर सकते हैं।

1. पहले जानिए वो कितना जानते हैं ?

सबसे पहले, पता करें कि आपका बच्चा पहले से क्या जानता है। उदाहरण के लिए उनसे पूछिए , ‘आपको क्या लगता है कि बच्चे कहाँ से आते हैं?’ या ‘आपने क्या सुना है कि बच्चे कहाँ से आते हैं?’

2. आधा-अधूरा ज्ञान सही करे

दूसरा, अगर बच्चे कोई गलत फैक्ट बोलते हैं तो उनकी गलत सूचना को ठीक करें और सही बात बताएं। उदाहरण के लिए, ‘कोई भी बच्चा अपनी माँ के पेट में नहीं बढ़ता है बल्कि वो अपनी मम्मी के अंदर एक विशेष स्थान पर बढ़ते हैं, जिसे गर्भाशय कहा जाता है।

3. अपनी बातों में शामिल करें सेक्स एजुकेशन

तीसरा, बातचीत के दौरान अपनी भावनाओं के बारे में बात करें और उसे सेक्स एजुकेशन की ओर मोड़ दें। उदाहरण के लिए, आज मम्मी आपके साथ नहीं खेल सकती हैं क्योंकि मम्मी को पीरियड्स आए हुए है। क्या आपने महिलाओं की इस समस्या के बारे में कभी सुना है ?

इसके बारे में कैसे बात करें ?

बहुत से पेरेंट्स यही सोचते है कि क्या यह सही उम्र है बच्चों को यह सब बताने कि। तो जी हां यही सही उम्र है जब बच्चों को पता चलना चाहिए कि सही गलत क्या है। सबसे पहले बात करते हैं कि बच्चों के लिए यह क्यों जरूरी है। आपका बच्चा प्ले स्कूल जाए या फिर डे केयर। हर समय आप बच्चे पर नजर नहीं रख सकते है। लेकिन कुछ तो ऐसा कर सकते हैं कि आप यह समझ जाए कि बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है या नहीं। सबसे पहले 2 साल के बच्चे जो कि चलना, बोलना शुरू करते है कुछ इस तरह से बातें पूछ सकते हैं –

बच्चे क्या पूछते हैं … माता-पिता क्या जवाब देते हैं?

बचपन वह अवस्था है जहां आपके बच्चे आपकी हर बात पर विश्वास करते हैं और उसे आत्मसात कर लेते हैं – इसलिए इस अवसर को गवाएं नहीं और उन्हें सही सूचना देने का प्रयास करें। यदि आप यह नहीं करते हैं तो वे इसे कहीं और (मित्रों और सोशल मीडिया) से जानकारी प्राप्त करेंगे, जो कि उन्हें भ्रमित कर सकते हैं। बच्चे अक्सर पूछते हैं कि बेबी कहाँ से आते हैं तो पैरेंट्स उन्हें एक सही जवाब न देकर भरमा देते हैं कि रानी परी बच्चे को लेकर आती हैं या बच्चे जादू से पैदा होते हैं, यह सही जवाब नहीं है। आइए, हम आपको बताते हैं कि उम्र के अनुसार बच्चों को कैसे सेक्स एजुकेशन दी जा सकती है।

0-2 साल: सेक्स, कामुकता और शरीर के बारे में क्या कहना है?

छोटे बच्चों को अपने सभी बॉडी पार्ट के बारे में पता होना चाहिए। उन्हें बताएं कि सभी जीवित चीजें प्रजनन करती हैं- पेड़ बीज गिराते हैं, कुत्तों के पिल्ले होते हैं और इंसानों के बच्चे होते हैं। जब आपको ये चीज़ें दिखे तो धीरे-धीरे प्रजनन के उदाहरण देना शुरू करें। उन्हें बता सकते हैं कि एक बच्चा महिला के अंदर गर्भाशय में बढ़ता है जो बेबी बैग जैसा होता है। साथ ही उन्हें पता होना चाहिए कि बच्चा पैदा करने के लिए स्त्री और पुरुष दोनों की आवश्यकता होती है। अगर वे जानना चाहते हैं कि बच्चा पेट से कैसे निकलता है, तो बस समझाएं कि यह महिला के पेट से या उसकी योनि से बाहर आता है। छोटे बच्चों को बताएं कि बच्चे पैदा करना बड़ो का काम है।

2-3 साल: सेक्स, कामुकता और शरीर के बारे में क्या कहना है?

2-3 वर्ष की आयु के अधिकांश बच्चे अपने और अन्य बच्चों के शरीर के बारे में बहुत उत्सुक होते हैं। वे यह भी देखते हैं कि लड़कों और लड़कियों के शरीर अलग-अलग हैं। आपका बच्चा आपसे पूछ सकता है या कह सकता है कि ‘वह क्या है?’ आप अपने बच्चे को सिखा सकते हैं कि प्रत्येक शरीर के अंग का एक नाम होता है और उसका अपना ‘काम’ होता है। उदाहरण के लिए, ‘यह आपका पेनिस है या ये आपकी वजाइना हैं जहाँ से आप सुसु को शरीर से बाहर कर सकते हैं। 3 साल बाद बच्चा हर तरह के अंतर को समझने लगते है। अपने प्राइवेट पार्ट के प्रति भी बच्चों में समझ आती है। उस समय बच्चों को यह समझना कि अगर कोई भी आपके प्राइवेट पार्ट को टच करने की कोशिश करे तो तुरंत चिल्लाए और वहां से भागे फौरन मम्मा को बताए। इस उम्र में बच्चे बहुत ही क्लोज होने की कोशिश करते है जो बच्चों से प्यार से बात करेगा या फिर गिफ्ट देगा। बच्चा उसे ही अपना समझते हैं।

4-5 साल: सेक्स, कामुकता और शरीर के बारे में क्या कहें?

4-5 साल के बच्चे अक्सर पूछते हैं कि बच्चे कहां से आते हैं। वे यह समझ सकते हैं कि एक बच्चा माँ के गर्भाशय में बढ़ता है, और एक बच्चा पैदा करने के लिए आपको एक पुरुष शुक्राणु (एक छोटे बीज की तरह) और एक महिला से एक डिंब (एक छोटे अंडे की तरह) की आवश्यकता होती है। 4 से 5 साल की उम्र में बच्चे टीवी पर बहुत कुछ देखते है। आप हर समय तो टीवी का चैनल नहीं बदलेगे। ऐसे में अपने बच्चों को बताना शुरू करे कि यह सब क्या है। लेकिन कुछ इस तरह कि यह जो भी देख रहो आपको एक सही उम्र में इसका पता चलेगा। क्योंकि हर चीज की एक उम्र होती है। जैसे इस उम्र में आप साइकिल चलाना, दोस्त बनाना सीख रहे हो। वैसे ही 8 साल के बाद आपको मेल और फीमेल में दिलचस्पी होगी।

6-7 साल: सेक्स, कामुकता और शरीर के बारे में क्या कहें?

छह साल की उम्र तक, कई बच्चे इस बात में रुचि रखते हैं कि बच्चे कैसे बनते हैं और वे कई सवाल पूछ सकते हैं। अगर आपका बच्चा पूछता है, ‘बच्चा आपके गर्भाशय में कहाँ से आया?’ अपने बच्चे से पूछें कि वे क्या सोचते हैं। इससे आपको यह समझने में मदद मिलती है कि आपका बच्चा पहले से क्या जानता है। तब आप सरलता से समझा सकते हैं, उतनी ही जानकारी दे सकते हैं जितनी आप सहज महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, ‘एक बच्चा पैदा करने के लिए, एक पुरुष से एक शुक्राणु और एक महिला से एक अंडा एक साथ जुड़ते हैं। अपने बच्चे को बताएं कि आपको कोई लड़का दोस्त बहुत अच्छा लगे, तो कोई लड़की। लेकिन अच्छा लगना का मतलब यह नहीं कि आप उसको बैड टच करो आप उससे बातें करो। आप अपनी बातें शेयर करो लेकिन उसका तरीका मम्मा से पूछों। जब बच्चे बड़े हो जाते हैं शादी के बाद अपनी बॅडिंग को और स्ट्रांग करने के लिए एक दूसरे को टच करते है। लेकिन अभी आपकी उम्र खेलने की है कुछ नया सीखने की है। तो कभी भी ऐसा कुछ देखा तो आप स्वंय हट जाओ। अगर आपको लगता है कि कोई आपको जबरदस्ती यह सब दिखा रहा तो फौरन मुझे बताओं। हो सकता है कोई अजनबी कहे कि अरे मैं तुम्हें तुम्हारा फेवरेट गिफ्ट दूंगा। मेरे साथ यहां अकेले चले, तो तुरंत अपनी बात का विरोध करो।

एक पेरेंट्स होने के नाते आप सबसे पहले अपने बच्चे के दोस्त बने। बच्चों का इतना विश्वास जीते कि अगर कोई ऐसा सोचे भी तो बच्चा सबसे पहले अपने पेरेंट्स से बोले। बच्चों के अंदर से यह डर निकाल दे कि तुमने कुछ किया होगा। पेरेंट्स का भरोसा ही बच्चों के लिए बहुत कुछ होता है, इसलिए सही उम्र में बच्चों को सही तरीके से सेक्स एजुकेशन अवश्य दे। 

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