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प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

23 Feb 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 279 Articles

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही का चरण बहुत ही नाजुक होता है। यह वह समय होता है, जिसके बाद शिशु का जन्म होता है। यही वजह है कि गर्भावस्था का तीसरा त्रैमासिक गर्भवती के शरीर में हो रहे बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील भी बन जाता है। ऐसे में इस दौरान होने वाली सामान्य व गंभीर बदलावों के लक्षणों की पहचान करनी जरूरी हो जाती है। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने किसी तरह के शारीरिक व मानसिक बदलाव के साथ सामने आते हैं, इसे समझने में यह लेख आपके लिए मददगार हो सकता है।

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही क्या है?

 

गर्भावस्था का पूरा काल 9 महीनों का होता है। यानी एक गर्भवती महिला लगभग 40 सप्ताह तक गर्भ में अपने शिशु की देखभाल करती है। इस पूरे गर्भावस्था के चरण को तीन तिमाही में बांटा गया है। हर एक तिमाही में तीन-तीन महीने होते है।

1. गर्भावस्था की पहली तिमाही – गर्भधारण करने से लेकर 12वें सप्ताह तक का समय यानी पहला, दूसरा और तीसरा महीना।
2. गर्भावस्था की दूसरी तिमाही – 12 से 24वें सप्ताह तक का समय यानी चौथा, पांचवा और छठा महीना।
3. गर्भावस्था की तीसरी तिमाही – 24 से 40वें सप्ताह तक का समय यानी सातवां, आठवां और नौवां महीना।

जैसे ही गर्भवती प्रेग्नेंसी के छह माह पूरे करके सातवें माह के चरण में आती है, तो उसी सप्ताह से प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही शुरू हो जाती है। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने पूरे होते ही शिशु के जन्म का समय आ जाता है। यही वजह है कि गर्भावस्था का तीसरा त्रैमासिक बहुत ही खास होता है। इस दौरान गर्भवती में दिखाई देने वाले हर लक्षणों की बारीकी से देखभाल करनी चाहिए, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के लक्षण

पहले और दूसरे त्रैमासिक की ही तरह गर्भावस्था का तीसरा त्रैमासिक भी कई लक्षणों से भरा होता है। इस दौरान गर्भवती महिला के शरीर में शारीरिक बदलाव के साथ ही मानसिकर बदलाव भी देखा जा सकता है। इन लक्षणों और बदलावों के बारे में नीचे हमने गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने दर महीने से जानकारी दी है।

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही – प्रेग्नेंसी का सातवां महीना

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही यानी सातवें महीने में निम्नलिखित शारीरिक व मानसिक बदलाव हो सकते हैंः

  • शारीरिक तौर पर असुविधा महसूस करना। ऐसा बढ़ते हुए पेट के कारण हो सकता है।
  • लगभग पांच किलो तक गर्भवती का वजन बढ़ सकता है।
  • सोने में परेशानी होना।
  • शिशु के जन्म से जुड़ी देखभाल व मातृत्व के चरण को लेकर चिंता होना।
  • प्रेग्नेंसी में बुरे सपने आना
  • सांस लेने में परेशानी होना। दरअसल, बढ़ते गर्भाशय की वजह से फेफड़ों पर दबाव पड़ सकता है। इससे गर्भवती महिला सांस लेने में परेशानी महसूस कर सकती हैं।
  • लेबर पेन जैसा अनुभव करना, जिसे नकली लेबर पेन भी कहा जा सकता है।
  • तीसरी तिमाही में गर्भावस्था के दौरान सफेद स्राव हो सकता है।
  • स्तनों से गाढ़े पीले रंग के पदार्थ का रिसाव होना या निपल डिस्चार्ज होना। इस स्राव को ‘कोलोस्ट्रम’ कहा जाता है।

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही – प्रेग्नेंसी का आठवां महीना

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के आठवें महीने में निम्नलिखित शारीरिक व मानसिक बदलाव हो सकते हैंः

  • वजन बढ़ने के कारण पैरों में दर्द हो सकता है।
  • वेरकोज वेन्स की समस्या हो सकती है। इस समस्या में नसे मोटी हो जाती हैं और उभरी हुई नजर आने लगती हैं।
  • पीठ दर्द व कमर दर्द की समस्या हो सकती है।
  • कब्ज के कारण गर्भावस्था का तीसरा त्रैमासिक बवासीर की समस्या को भी जन्म दे सकता है।
  • प्रसव को लेकर मन में चिंता बढ़ सकती है। इस वजह से गर्भवती का स्वभाव चिड़चिड़ा हो सकता है।
  • पेट, जांघ, कमर पर स्ट्रेच मार्क्स उभर सकते हैं।

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही – प्रेग्नेंसी का नौवां महीना

गर्भावस्था का तीसरा त्रैमासिक नौवें महीने में निम्नलिखित लक्षणों से भरा हो सकता है, जैसेः

  • तीसरी तिमाही में गर्भावस्था के दौरान सफेद स्राव यानी योनि से सफेद पानी आना।
  • गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने में नाभि अधिक ऊभर सकती है।
  • गर्भावस्था का तीसरा त्रैमासिक प्रसव के करीब आने पर सीने में जलन, बदन दर्द, स्तनों में सूजन जैसी सामान्य परेशानियों को बढ़ा सकता है।

गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने में किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?

 

यह बात तो साफ है कि गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने कई शारीरिक व मानसिक बदलावों से भरे हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि वह इन स्थितियों के लक्षणों को सामान्य बना सके और खुद की सेहत का ध्यान रख सके।

  • कैल्शियम व फॉलिक एसिड युक्त खाद्य को आहार में शामिल करें। इससे माँ व भ्रूण की हड्डियों के उचित विकास में मदद मिल सकती है।
  • डॉक्टर द्वारा बताए गए व्यायाम करें या थोड़ा बहुत टहल सकती हैं।
  • बहुत देर तक एक ही स्थान पर खड़ी या बैठी न रहें।
  • उठते, बैठते या लेटते समय दीवार या किसी सहारे का इस्तेमाल करें। इस दौरान जल्दबादी न करें।
  • मन में उठने वाली चिंताओं के बारे में पति व अन्य करीबी सदस्यों से बात कर सकती हैं।
  • गर्भावस्था के अंतिम तीन महीने बवासीर की समस्या से बचाव के लिए फाइबर युक्त आहार खा सकती हैं।
  • बदन दर्द को कम करने के लिए थोड़ा बहुत स्ट्रेच कर सकती हैं।
  • गर्भावस्था में भारी सामान न उठाएं न ही झुककर कोई काम करें।
  • आरामदायक कपड़े व जूते पहनें।
  • केमिकल युक्त किसी भी कॉस्मेटिक का इस्तेमाल न करें।
  • ज्यादा से ज्यादा आराम करने पर भी ध्यान दें।
  • गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान सूखे मेवे का सेवन करें। यह गर्म तासीर के होते हैं, इसलिए, इनकी मात्रा सीमित ही रखें।
  • गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में संभोग (सेक्स) करने से बचें। इस बारे में डॉक्टर से भी उचित सलाह ले सकती हैं।

उम्मीद है कि प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही को समझने में यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा। साथ ही,
गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान सूखे मेवे व अन्य पोषक तत्वों से भरे खाद्य को अपने आहार में शामिल करें, ताकि माँ व बच्चे को जरूरी पोषक मिल सके। इसके अलावा, यह भी ध्यान रखें कि तीसरी तिमाही में गर्भावस्था के दौरान सफेद स्राव जैसी समस्या अगर अधिक होती है, तो बिना देरी के डॉक्टर से परामर्श करें।

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