9 Jun 2022 | 1 min Read
Vinita Pangeni
Author | 549 Articles
ऑटिज्म और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर क्या अलग-अलग दिक्कतें हैं या इनके बीच कुछ अंतर है। यह हम आपको इस लेख में विस्तार से बताएंगे। साथ ही ऑटिज्म का होम्योपैथी इलाज संभव है या नहीं, इसकी जानकारी भी देंगे।
ऑटिज्म का मेडिकल टर्म ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर है। ऑटिज्म शब्द को अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन द्वारा 2013 में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर में बदल दिया गया था। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) अब अम्बरैला टर्म है, जिसमें निम्नलिखित स्थितियां शामिल हैं:
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें शिशु को निम्नलिखित दिक्कतें होती हैं।
ऑटिज्म में सिंगल या मल्टीपल न्यूरोलॉजिकल उतार-चढ़ाव दोनों हो सकते हैं, जो व्यवहार परिवर्तन को उत्तेजित करता है। इससे बच्चों का इंटरेक्शन स्किल और कॉम्युनिकेशन भी प्रभावित होता है। दरअसल, ऑटिज्म एक स्पेक्ट्रम स्थिति है। मतलब कुछ लोग दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित होते हैं।
उदाहरण के लिए, कुछ ऑटिस्टिक लोग भाषा का उपयोग नहीं कर पाते, जबकि अन्य बोलने में माहिर होते हैं, उनके लिए दूसरों की बातें समझना मुश्किल हो सकता है। कुछ ऑटिस्टिक लोगों में बौद्धिक अक्षमता, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) व सीखने में कठिनाई होती है। कुछ को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं, ज्यादातर चिंता और अवसाद।
ऑटिज्म के लक्षण व ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के संकेत कुछ इस प्रकार हो सकते हैं –
एएसडी को बहुत प्रारंभिक मस्तिष्क विकास संबंधी विकार माना जाता है। ऑटिज्म के व्यवहार संबंधी लक्षण कुछ बच्चों में छह महीने से तो कुछ में 1 से 1/2 वर्ष की आयु व 3 वर्ष की आयु के बीच दिखाई देने लग जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी ऑटिज्म की आशंका का पता लगाया जा सकता है।
डॉ. ए एम रेड्डी, ऑटिज्म सेंटर, हैदराबाद तेलंगना के अनुसार, कम उम्र में निदान होने पर होम्योपैथी से बच्चों का बेहतर इलाज किया जा सकता है। इससे आगे बढ़ती उम्र में बेहतरीन सुधार प्रदर्शित होते हैं। सही समय पर सही इलाज से बच्चों की क्षमता और सोच में सुधार होता है।
उपचार में दवाओं के साथ ही आहार, पोषण और अन्य गतिविधियां शामिल हैं, जो बच्चे की स्थिति में सुधार में बेहतर काम करते हैं। साथ ही बच्चे को व्यवहार और संचार थैरेपी, शैक्षिक थैरेपी पारिवारिक थैरेपी, पारंपरिक उपचार देने की आवश्यकता पड़ सकती है।
अक्सर ASD जीवन भर चलने वाली स्थिति होती है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों और वयस्कों दोनों को व्यवहारिक हस्तक्षेपों से लाभ होता है, जो ऑटिज्म की मुख्य लक्षण व कमियों को दूर करने के लिए नए कौशल सिखाता है।
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