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ऑटिज्म और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर में अंतर और होम्योपैथी इलाज

ऑटिज्म और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर में अंतर और होम्योपैथी इलाज

9 Jun 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 554 Articles

ऑटिज्म और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर क्या अलग-अलग दिक्कतें हैं या इनके बीच कुछ अंतर है। यह हम आपको इस लेख में विस्तार से बताएंगे। साथ ही ऑटिज्म का होम्योपैथी इलाज संभव है या नहीं, इसकी जानकारी भी देंगे।

ऑटिज्म और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के बीच अंतर

ऑटिज्म का मेडिकल टर्म ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर है। ऑटिज्म शब्द को अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन द्वारा 2013 में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर में बदल दिया गया था। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) अब अम्बरैला टर्म है, जिसमें निम्नलिखित स्थितियां शामिल हैं:

  • ऑटिस्टिक विकार
  • व्यापक विकास संबंधी विकार (PDD-NOS)
  • एस्पर्जर सिन्ड्रोम

ऑटिज्म में शिशु को क्या दिक्कतें होती हैं?

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें शिशु को निम्नलिखित दिक्कतें होती हैं।

  • सामाजिक मेलजोल में कमी
  • मौखिक और अमौखिक संचार सहित सामाजिक संचार में कठिनाइयां
  • प्रतिबंधित व्यवहार, रुचियों या गतिविधियां या इनमें रेपिटेटिव पैटर्न 
  • मोटर और संवेदी व्यवहार में दोहराव जैसे हाथों को बार-बार हिलाना या उठा लेना
  • न बदलने वाली रुचियां
  • भाषा के विकास में देरी या इसका विकास न होना 
  • बौद्धिक अक्षमता

ऑटिज्म में सिंगल या मल्टीपल न्यूरोलॉजिकल उतार-चढ़ाव दोनों हो सकते हैं, जो व्यवहार परिवर्तन को उत्तेजित करता है। इससे बच्चों का इंटरेक्शन स्किल और कॉम्युनिकेशन भी प्रभावित होता है। दरअसल, ऑटिज्म एक स्पेक्ट्रम स्थिति है। मतलब कुछ लोग दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित होते हैं। 

उदाहरण के लिए, कुछ ऑटिस्टिक लोग भाषा का उपयोग नहीं कर पाते, जबकि अन्य बोलने में माहिर होते हैं, उनके लिए दूसरों की बातें समझना मुश्किल हो सकता है। कुछ ऑटिस्टिक लोगों में बौद्धिक अक्षमता, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) व सीखने में कठिनाई होती है। कुछ को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं, ज्यादातर चिंता और अवसाद।

ऑटिज्म और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर में अंतर और ऑटिज्म का होम्योपैथी इलाज
अपने ऑटिस्टिक बेटी को प्यार से आइसक्रीम खिलाती माँ/स्रोत – पिक्सेल्स

शिशु में ऑटिज्म के लक्षण

ऑटिज्म के लक्षण व ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के संकेत कुछ इस प्रकार हो सकते हैं – 

  • 16 महीने तक कोई शब्द नहीं बोलना
  • अपना नाम सुनने पर भी प्रतिक्रया न करना
  •  6 महीने की उम्र तक व्यापक रूप से न मुस्कुराना
  • किसी भी उम्र में भाषा  या सामाजिक कौशल को खोना
  • 24 महीनों तक कोई अर्थपूर्ण, दो-शब्द वाले वाक्यांश न बोलना, इसमें नकल करना या दोहराना शामिल नहीं है

कब पता चलता है कि बच्चे को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) है?

एएसडी को बहुत प्रारंभिक मस्तिष्क विकास संबंधी विकार माना जाता है।  ऑटिज्म के व्यवहार संबंधी लक्षण कुछ बच्चों में छह महीने से तो कुछ में 1 से 1/2 वर्ष की आयु व 3 वर्ष की आयु के बीच दिखाई देने लग जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी ऑटिज्म की आशंका का पता लगाया जा सकता है

क्या ऑटिज्म व ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का होम्योपैथी इलाज संभव है?

डॉ. ए एम रेड्डी, ऑटिज्म सेंटर, हैदराबाद तेलंगना के अनुसार, कम उम्र में निदान होने पर होम्योपैथी से बच्चों का बेहतर इलाज किया जा सकता है। इससे आगे बढ़ती उम्र में बेहतरीन सुधार प्रदर्शित होते हैं। सही समय पर सही इलाज से बच्चों की क्षमता और सोच में सुधार होता है।

उपचार में दवाओं के साथ ही आहार, पोषण और अन्य गतिविधियां शामिल हैं, जो बच्चे की स्थिति में सुधार में बेहतर काम करते हैं। साथ ही बच्चे को व्यवहार और संचार थैरेपी, शैक्षिक थैरेपी पारिवारिक थैरेपी,  पारंपरिक उपचार देने की आवश्यकता पड़ सकती है।

अक्सर ASD जीवन भर चलने वाली स्थिति होती है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों और वयस्कों दोनों को व्यवहारिक हस्तक्षेपों से लाभ होता है, जो ऑटिज्म की मुख्य लक्षण व कमियों को दूर करने के लिए नए कौशल सिखाता है।

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