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मॉम इंफ्लूएंसर वैभवी द्विवेदी ने शेयर की अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी, न्यू मॉम्स के लिए दी ये खास टिप्स

मॉम इंफ्लूएंसर वैभवी द्विवेदी ने शेयर की अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी, न्यू मॉम्स के लिए दी ये खास टिप्स

30 Jun 2022 | 1 min Read

Mona Narang

Author | 173 Articles

प्रेग्नेंसी या पैरेंटिंग से जुड़ी जानकारी पाने के लिए आप सोशल मीडिया पर कई मदर इंफ्लूएंसर्स को फॉलो करती हैं। आप चाहती हैं कि आपके बच्चे को किसी बात की तकलीफ न हो, इसलिए आप हर वो चीज जानना चाहती हैं जिसके बारे में आप अब तक अनजान थीं। हमारी बेबी चक्रा मॉम स्पेशल सीरिज इसी पर आधारित है। आज हम मॉम इंफ्लूएंसर वैभवी द्विवेदी की मदरहुड जर्नी के साथ हाजिर हुए हैं। उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी और पैरेंटिंग लाइफ के बारे में बेबी चक्रा से बात की। तो, चलिए जानते हैं वैभवी की जर्नी किस तरह औरों से अलग थी।

सबसे पहले मॉम इंफ्लूएंसर वैभवी द्विवेदी के जीवन के बारे में जानते हैं

पेशे से फाइनेंस स्पेशलिस्ट वैभवी द्विवेदी बैंग्लोर में रहती हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी जॉब से कुछ समय का ब्रेक लिया है। फिलहाल वह अपना ज्यादातर टाइम अपनी 2 साल की बेटी तीशा (Tisha) को देती हैं। इसके साथ ही वह अपने पैरेंटिंग जर्नी पर ब्लॉग्स बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं, जिन्हें लोगों द्वारा काफी पसंद किया जाता है। वैभवी सोशल मीडिया पर पैरेंटिंग, लाइफस्टाइल, फैशन और फूड से जुड़े इंटरेस्टिंग ब्लॉग्स बनाती हैं। वैभवी का कहना है कि उन्हें ऐसा कॉन्टेंट क्रिएट करना पसंद है जो उनके फॉलोओर्स तक जरूरी जानकारी पहुंचाने के साथ उन्हें एंटरटेन करे।  

क्या आप अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी के बारे में कुछ बताएंगी? आपके लिए यह समय कैसा था क्या आपने इस दौरान किन्हीं चुनौतियों का सामना किया?

अपनी पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान मैं वर्किंग थी, जिस वजह से मुझे कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा, लेकिन मेरे ऑफिस से मुझे पूरा सपोर्ट मिला। प्रेग्नेंसी में मुझे सबसे बड़ी परेशानी यह हुई कि उस समय कोविड की वजह से लॉकडाउन था और मेरे आस-पास पति के अलावा घर का कोई दूसरा सदस्य नहीं था। घर के बड़ों ने जितना हो सका फोन पर हमें गाइड किया।

लॉकडाउन एक ऐसा टाइम था जब घरों में मेड भी नहीं आती था। ऐसे में ऑफिस, घर का काम, मूड स्विंग्स को मैनेज करना मुश्किल होता था, लेकिन इस जर्नी में मुझे मेरे पार्टनर का पूरा साथ मिला। फिर चाहे वो मेरे मूड स्विंग्स हो या क्रेविंग्स, मेरे पार्टनर ने सब स्मार्टली हैंडल किया। 

डिलीवरी के एक महीने बाद तक भी घर से कोई नहीं आ पाया था। ये मेरी पहली प्रेग्नेंसी थी और कई सारी चीजें थी जिससे मैं वाकिफ नहीं थी। तो पैंडेमिक के समय में हम दोनों के लिए बेबी की केयर करना काफी मुश्किलों से भरा समय था। हर समय हम दोनों को यह डर सताता था कि कहीं हम कुछ गलती न कर बैठें।

क्या आपको कॉफी पीना पसंद है? अगर हां, तो प्रेग्नेंसी के दौरान आपने कैफीन इनटेक को कैसे मैनेज किया?

मॉम इंफ्लूएंसर वैभवी
वैभवी की बेटी के साथ ट्रिप की तस्वीर

मैं टी लवर हूं। मैं दिन में चाय के बिना नहीं रह पाती हूं। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान चाय की जगह मैंने दूध को दे दी थी। हां, ऐसा करना बहुत मुश्किल था, लेकिन आपके शरीर में पल रही नन्हीं जान के अच्छी हेल्थ के लिए आप कुछ भी कर सकती हैं।

आपकी पैरेंटिंग जर्नी अबतक कैसी रही? पेरेंट बनने के बाद इस सफर में आपने क्या सीखा?

डिलीवरी के बाद पहला महीना मेरे लिए काफी मुश्किल और संघर्षों से भरा था। लेकिन धीरे-धीरे मैंने और मेरे पार्टनर ने मिलकर बेबी की अच्छे से देखभाल करना सीख लिया था। यह वो समय था जब मुझे इस बात का अहसास हुआ कि अगर आपका पार्टनर आपके साथ खड़ा है, तो आप मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों को हंसकर पार कर लेते हैं। इस पूरी जर्नी के दौरान मेरा पार्टनर सिर्फ मेरा स्पोर्ट था, जिसने मुझे और बेबी दोनों को अच्छे से संभाला।

समान पालन-पोषण पर आपके क्या विचार हैं? प्रेग्नेंसी जर्नी में आपके पार्टनर ने आपकी किस तरह मदद की?

मेरा स्ट्रांगली इस बात को मानना है कि बच्चे की परवरिश में माँ की तरह ही पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। बच्चे को दोनों पेरेंट्स की बराबर जरूरत होती है। मुझे लगता है कि हर पिता को अपने बच्चे के पालन-पोषण की जर्नी में मां के समान योगदान देना चाहिए। 

मेरे पति का बिजी शेड्यूल होने के बावजूद प्रेग्नेंसी के दौरान हर छोटी से बड़ी परेशानी के दौरान वो मेरे साथ मौजूद थे। डिलीवरी के बाद भी मेरे पार्टनर ने मुझे हर तरह से स्पोर्ट किया और एक पिता की जिम्मेदारियों पर हमेशा खरे उतरते हैं। मुझे इंसोमनिया (स्लीप डिसऑर्डर) है। आज भी अगर हमारी बेटी रात को नींद में उठ जाती है, तो मेरे पति मेरी नींद डिस्टर्ब न हो इसलिए उसे दूसरे रूम में लेकर चले जाते हैं और खुद संभालते हैं।

जब मैंने मॉम इन्फ्लुएंसर बनने के बारे में सोचा, उस समय भी मैं खुद को लेकर इतनी कॉन्फिडेंट नहीं थी, लेकिन मेरे पति ने मुझे प्रोत्साहित किया। अगर कई बार मैं अपने प्रोजेक्ट्स को लेकर बीजी हो जाती हैूं, तो उस दौरान वो तीशा (Tisha) का अच्छे से ख्याल रखते हैं। मेरी मॉम ब्लॉगर की जर्नी बिना मेरे पति के स्पोर्ट के पूरी नहीं हो सकती थी। टचवुड… आई फील सो ब्लेसड एंड लकी।

यहां देखें किस तरह वैभवी अपनी बेटी को एंगेज रखती हैं:

क्या कभी आपको ऐसा लगता है ‘नहीं अब मुझसे नहीं हो पाएगा?

हां, अमूमन हर दिन ऐसा होता है। जब भी मैं बहुत थक जाती हूं और अपने लिए समय तक नहीं निकाल पाती हूँ तो ऐसा दिमाग में आता है। ऐसा लगने लगता है अब बस मुझसे और नहीं होगा। लेकिन यह एक ऐसी जॉब है जिससे आप नहीं भाग सकते। यह ड्यूटी 24×7 होती है, जिसमें आपको कोई छुट्टी मिलती है। जब भी मेरे दिमाग में ऐसे विचार आते हैं मैं अपनी बेटी का चेहरा देख लेती हूं और उसकी मेरे साथ रहने की चाहत मेरे मूड को वापस से बेहतर कर देती है। 

जीवन के बारे में आप अपने बच्चे को क्या सिखाना चाहेंगी?

मैं अपने बच्ची को दो जरूरी बातें सिखाना चाहती हूँ। पहली कि वो सबका सम्मान करें। फिर चाहे कोई उससे बड़ा हो या छोटा। घर पर काम करने वाली मेड ही क्यों न हो, हर किसी के काम का सम्मान करना आना चाहिए। दूसरी बात यह कि वह सही गलत की पहचान होने के साथ जिंदगी के हर पल का भरपूर आनंद लें। 

एक वर्किंग मदर के रूप में आपको किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

मॉम इंफ्लूएंसर वैभवी
बेटी के साथ वैभवी

वर्किंग मदर होने के साथ, हां मेरे लिए अपनी बेटी को संभालना थोड़ा मुश्किल होता था। कोविड के दौरान वर्क फ्रॉम होम था तो ऑफिस के साथ बेटी को संभालना थोड़ा आसान था। लेकिन ऑफिस की कॉल्स और मीटिंग्स के बीच में उसे टाइम देना थोड़ा टफ होता था। मेरी माँ ने इस दौरान मुझे काफी हेल्प की। लेकिन जैसा कि सभी जानते हैं कि बच्चे के आस-पास जितने भी लोग क्यों न हो, उसे माँ की जरूरत होती है, तो मैं ऑफिस के साथ ज्यादा से ज्यादा समय अपनी बेटी को देती थी। अभी ऑफिस ओपन हो गए हैं और मैं अपनी बेटी को पूरा टाइम देना चाहती हूं, इसलिए मैंने कुछ समय के लिए काम से ब्रेक लिया है।

गर्भावस्था और वर्क लाइफ के बीच संतुलन बनाने के लिए आप नई मॉम्स को क्या सलाह देंगी?

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला काफी जल्दी थक जाती हूं। शरीर में हो रहे बदलावों की वजह से उन्हें कई अन्य परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में अपनी परेशानियों को थोड़ा कम करने के लिए दूसरों की मदद लें। अपने पार्टनर, मदर इन लॉ या केयर टेकर से घर के व बाहर के कामों में मदद लें। इससे आपको आराम मिलेगा और दिमाग भी स्वस्थ रहेगा।

चित्र स्रोत: Vaibhavi Dwivedi

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