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बच्चों को बोतल से दूध पिलाना: फायदे, नुकसान व ध्यान रखने योग्य बातें

बच्चों को बोतल से दूध पिलाना: फायदे, नुकसान व ध्यान रखने योग्य बातें

7 Apr 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 279 Articles

जन्म के बाद नवजात शिशु का पहला आहार माँ का दूध ही होता है। डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के अंदर उसे स्तनपान करा देना चाहिए, लेकिन कुछ परिस्थितियों में नवजात बच्चों को बोतल से दूध पिलाना भी पड़ जाता है।

देखा जाए, तो बोतल से दूध पिलाना कुछ स्थितियों में सरल व सुरक्षित हो सकता है, लेकिन किसी नवजात को बोतल से फॉर्मूला दूध पिलाना कितना सुरक्षित हो सकता है, यह एक चिंता का विषय बन सकता है। इस लेख में आप छोटे बच्चों को बोतल से दूध पिलाने के बारे में विस्तार से जानेंगे। साथ ही बोतल से दूध पिलाने के फायदे व बोतल से दूध पिलाने के नुकसान की जानकारी भी पढ़ेंगे। 

बच्चों को बोतल से दूध पिलाना कितना सुरक्षित है?

बच्चों को बोतल से दूध पिलाना कितना सुरक्षित हो सकता है, यह पूरी तरह से बोटलफीडिंग के प्रकार व इसकी अवधि पर निर्भर कर सकता है। दरअसल, माँ के दूध में वे सभी पोषक तत्व होते हैं, तो एक नवजात शिशु के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं। 

इतना ही नहीं, नवजात शिशुओं में इम्‍यून सिस्‍टम उनके बढ़ते विकास के साथ मजबूत होता है, वहीं मां के दूध में प्राकृतिक तौर पर शिशु के शरीर को इम्‍युनिटी देने वाले पोषक मौजूद होते हैं। इस आधार पर ऐसा माना जा सकता है कि छोटे बच्चों को बोतल से दूध पिलाना स्तनपान के मुकाबले में कम प्रभावकारी हो सकता है। 

छोटे बच्चों को बोतल से फॉर्मूला दूध पिलाना कब शुरू करें?

बच्चों को बोतल से दूध पिलाना
बच्चों को बोतल से दूध पिलाना / चित्र स्रोतः फ्रीपिक

जन्म से लेकर 6 माह की उम्र तक स्तनपान के जरिए शिशु को दूध पिलाना आवश्यक माना गया है। इसके बाद शिशु को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में स्तनपान या बॉटलफीडिंग के साथ ठोस खाद्य भी देना शुरू किया जा सकता है। वैसे छोटे बच्चों को बोतल से फॉर्मूला दूध पिलाना कब शुरू करें, इसके लिए कोई उम्र निर्धारित नहीं है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शिशु के लिए माँ का स्तनपान ही प्राथमिक होना चाहिए। हां, अगर किसी कारणवश स्तनपान संभव नहीं है, तो ऐसी परिस्थिति में शिशु को बॉटलफीडिंग भी कराया जा सकता है। 

बच्चों को बोतल से दूध पिलाने के फायदे

बोतल से दूध पिलाने के फायदे निम्नलिखित हैं, जिनमें शामिल हैंः

  • अगर किसी माँ के स्तनों में दूध का उत्पादन बहुत कम होता है या नहीं होता है, तो ऐसी परिस्थितियों में बच्चों को बोतल से दूध पिलाने के फायदे हो सकते हैं।
  • अगर माँ किसी कारणवश माँ को अपने नवजात शिशु से दूरी बनाकर रखनी पड़ रही है, तो इस तरह की स्थितियों में भी बोतल से दूध पिलाने का गाइड लाभकारी हो सकता है।
  • कई बार स्तनपान का अनुभव दर्द से जुड़ा हो सकता है। बच्चा अक्सर स्तनपान के दौरान स्तनों को काटने का प्रयास कर सकता है। ऐसे में बोतल से दूध पिलाने के फायदे माँ को निप्पल में दर्द से बचाए रख सकते हैं।
  • परिवार का कोई भी सदस्य बच्चे को बोतल से दूध पिला सकता है।
  • घर से लेकर सार्वजनिक स्थानों में भी बोतल से बच्चे को दूध पिलाना सुलभ हो सकता है।
  • शिशु को बॉटलफीडिंग की आदत होने पर वह खुद से दूध का बोतल पकड़कर दूध पी सकता है। ऐसे में माँ व अन्य सदस्य अपने अन्य कामों को भी आसानी से कर सकते हैं।

बोतल से दूध पिलाने के नुकसान

जिस तरह हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी तरह बच्चों को बोतल से दूध पिलाने के नुकसान भी हो सकते हैं। बोतल से दूध पान के क्या खतरे हैं, इसके बारे में नीचे पढ़ें। 

  • बोतल से दूध पान के क्या खतरे हैं, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है मां के स्तनपान के जरिए मिलने वाले पोषक तत्वों से शिशु का वंचित रह जाना। ऐसे में शिशु को बॉटलफीडिंग शुरुआती आवश्य विभिन्न पोषक तत्वों से वंचित रख सकता है। 
  • अगर बोतल को बच्चे के मुंह के अंदर लगा कर छोड़ दिया जाए, तो इससे बच्चे को चोकिंग का जोखिम हो सकता है। साथ ही यह कान के संक्रमण व दांत टूटने के जोखिम भी बढ़ा सकता है। 
  • अगर दूध की बोतल को ठीक से साफ नहीं किया जाता है, तो शिशु को बॉटलफीडिंग के दौरान विभिन्न संक्रामक रोग होने का जोखिम बढ़ सकता है। 
  • शिशु को बॉटलफीडिंग के दौरान दूध की मात्रा का ध्यान रखान होता है। ऐसे में कई बार बोतल से बच्चे को दूध पिलाना इसलिए भी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि वह अधिक मात्रा में दूध पी सकता है।
  • स्तनपान से माँ और शिशु के बीच भावनात्मक लगाव बढ़ सकता है। ऐसे में बोतल से दूध पिलाने के नुकसान बच्चे व माँ के बीच के लगाव को कम कर सकता है। 

बच्चों को बोतल से दूध पिलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

बोतल से फॉर्मूला दूध पिलाना भले ही मिला-जुला परिणाम दे सकता है, लेकिन बोतल से दूध पिलाते समय कुछ जरूरी बातों का भी ध्यान रखना होता है, जैसेः

बच्चों को बोतल से दूध पिलाना
बच्चों को बोतल से दूध पिलाना / चित्र स्रोतः फ्रीपिक
  • रोते हुए बच्चे को बोतल से दूध न पिलाएं। ऐसा करने से बच्चे के गले में दूध अटक सकता है और उसे परेशानी हो सकती है। 
  • शुरू में बच्चे को बोतल से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ही दूध पिलाएं। एक बार में दूध की बोतल को पूरी तरह न भरें।
  • बोतल से फॉर्मूला दूध पिलाना आसान बनाने के लिए बच्चे की पोजीशन का ध्यान रखें। 
  • शिशु को बॉटलफीडिंग कराने के दौरान बीच-बीच में थोड़ा आराम भी करने दें। 
  • बच्चे को उतनी ही बॉटलफीडिंग कराएं, जितनी उसे भूख हो।
  • शिशु को बॉटलफीडिंग के दौरान अकेला न छोडे़ें।
  • जबरदस्ती शिशु को बॉटलफीडिंग न कराएं।

बोतल से दूध पिलाने का गाइड

बच्चों को बोतल से दूध पिलाना एक आसान प्रक्रिया है। हालांकि, इसके लिए बोतल से शिशु को दूध कैसे पिलाएं, इसके बारे में भी पता होना चाहिए। बोतल से दूध पिलाने का गाइड हमें बॉटलफीडिंग का सही तरीका जानने में मदद कर सकता है। 

  • सबसे पहले बोतल को गुनगुने पानी से अच्छे से साफ करें। 
  • अब इसमें सामान्य तापमान का दूध भरें।
  • निपल से दूध की कुछ बूंदे टपका कर जांच करें कि दूध का रिसाव बहुत कम या बहुत अधिक मात्रा में न हो रहा हो। 
  • अगर ऐसा है, तो निपल को बदलें और सही होल वाला निपल लगाएं। 
  • अब बच्चे को पीठ के बल पालने, बिस्तर या गोदी में लिटाकर बोतल से दूध पिलाएं। 
  • इस दौरान बच्चे का सिर उसके धड़ से थोड़ा ऊपर (45 डिग्री के आसपास) ही रखें। ऐसा करने में दूध बच्चे के गले में अटकेगा नहीं। 

उम्मीद करते हैं कि शिशु को बोतल से दूध पिलाने का गाइड व इससे जुड़ी अन्य जरूरी बातें आपके लिए कारगर साबित होंगी। वैसे तो बच्चे के लिए स्तनपान को ही प्राथमिकता दें, लेकिन अगर किसी कारणवश इसमें परेशानी आ रही है, तो शिशु को बॉटलफीडिंग के जरिए भी दूध पिला सकती हैं।

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