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प्रेग्नेंसी में थायराइड से जुड़ी हर जरूरी बात

प्रेग्नेंसी में थायराइड से जुड़ी हर जरूरी बात

23 May 2022 | 1 min Read

Vinita Pangeni

Author | 554 Articles

प्रेगनेंसी में महिलाओं को काफी तरह की दिक्कतों से गुजरना पड़ता है। इस दौरान नजर आ रहे कुछ लक्षण का कारण सिर्फ प्रेग्नेंसी होती है। फिर गर्भावस्था के बाद सबकुछ सामान्य हो जाता है। लेकिन इस दौरान नजर आने वाले कुछ बदलाव का कारण थायराइड भी हो सकता है। क्या है थायराइड और प्रेग्नेंसी में थायराइड होने से गर्भावस्था कैसे प्रभावित होती है, यह हम इस लेख में बताएंगे।  

क्या है थायराइड?

गले के आगे एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है। यह ग्रंथि थायराइड कहती है। थायराइड ग्रंथि हमारे द्वारा खाए जाने वाले फूड्स को एनर्जी में बदलकर टी3 और टी4 हार्मोन बनाती है। 

इन हार्मोंस की मदद से हार्ट रेट, शरीर के तापमान, सांस, पाचन तंत्र, कोलेस्ट्रॉल आदि को नियंत्रित होते हैं। अगर ये दोनों हार्मोन असंतुलित होते है, तो उसे थायराइड होना कहा जाता है।

इन दोनों हार्मोन्स को नियंत्रित थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (TSH) करता है। इस टीएसएच को  मस्तिष्क में मौजूद पिट्यूरी ग्लैंड से  बनता है।

थायराइड बीमारी तब बनती है, जब थायराइड ग्रंथि टी3 और टी4 हार्मोन जरूरत से ज्यादा या जरूरत से कम बनाते हैं। ज्यादा थायराइड बनाने वाली स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है और कम थायराइड बनने को हाइपोथायरायडिज्म।

प्रेग्नेंसी में थायराइड का योगदान

कम्यूनिटी एक्सपर्ट, लैक्टेशन एंड न्यूट्रिशन, पूजा मराठे बताती हैं कि गर्भस्थ शिशु का विकास सुनिश्चित करने के लिए थायराइड का स्तर सही होना जरूरी है। यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र विकास के लिए भी अहम है। 

गर्भावस्था के पहले 3 महीने तक गर्भस्थ शिशु अपनी माँ के थायराइड हार्मोन पर निर्भर करता है। यह प्लेसेंटा के माध्यम से उस तक पहुंचता है। 

लगभग 12वों हफ्ते में बच्चे की थायराइड ग्रंथि अपना काम करना शुरू कर देती है। लेकिन यह ग्रंथि गर्भावस्था के 18 से 20वें सप्ताह तक पर्याप्त थायराइड हार्मोन नहीं बना पाती। यही वजह है कि बच्चा माँ के थायराइड पर निर्भर रहता है।

गर्भावस्था पर थायराइड होने पर क्या होता है?

हम दोनों तरह के थायराइड के कारण गर्भवास्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के बारे में आगे बिंदुवार बता रहे हैं। 

प्रेग्नेंसी में हाइपोथायरायडिज्म

हाइपोथायरायडिज्म होने पर अगर सही तरह से इसका इलाज नहीं करवाया जाए, तो यह गंभीर हो सकता है। इसके चलते इस तरह के प्रभाव दिख सकते हैं।

  • एनीमिया होना
  • मृत नवजात (स्टिल बर्थ)
  • नवजात का वजन कम होना
  • गर्भपात और गर्भपात का जोखिम
  • मानसिक विकास सही से न हो पाना
  • उच्च रक्तचाप और आगे चलकर प्री-एक्लेम्पसिया
  • ऊपर बताए गए सभी प्रभाव हाइपोथायरायडिज्म के गंंभीर रूप लेने के कारण होते हैं

प्रेग्नेंसी में हाइपरथायरायडिज्म

हाइपरथायरायडिज्म का इलाज नहीं हो, तो इस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसा अधिकतर गंभीर मामलों में होता है।

  • उच्च रक्तचाप
  • शिशु का कम वजन
  • समय से पहले शिशु का जन्म
  • अचानक हृदय की गति का रुकना
  • गर्भपात या गर्भपात का जोखिम बढ़ना
प्रेग्नेंसी में थायराइड
प्रेगनेंसी में थायराइड को चेक करते एक्सपर्ट / स्रोत – पिक्सेल्स

प्रेग्नेंसी में थायराइड के कारण 

सामान्य समय हो या प्रेगनेंसी थायराइड होने के कारण अधिकतर एक समान ही होते हैं। हम यह हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों के कारण बताएंगे। साथ ही कुछ आम कारण भी बताएंगे, जिससे थायराइड को समझने में मदद मिलेगी।

हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism)

  • एंडेमिक गोइटर 
  • खाने में आयोडीन की कमी होना
  • पिट्यूटरी ग्लैंड संबंधी कोई रोग
  • रेडियेशन या फिर किसी दवाई का दुष्प्रभाव 
  • बीमारी के चलते थायराइड ग्रंथि को निकालने के कारण
  • गर्भावस्था में हाशिमोटो ऑटोइम्यून बीमारी की वजह से। 100 में से दो गर्भवती महिलाओं को यह बीमारी होती है। 

हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism)

  • ग्रेव डिजीज (Graves disease) नामक ऑटो इम्यून सिस्टम विकार। हजार में से 4 गर्भवती महिलाएं इसका शिकार होती हैं।
  • थायराइड ग्रंथि में नोड्यूल्स बनने से थायराइड हार्मोंस का प्रभावित होने के कारण। इसे टॉक्सिक एडेनोमास (Toxic adenomas) कहते हैं। 
  • थायराइड ग्रंथि में सूजन आने होने पर ज्यादा हार्मोंस बनना, जिसे सब-एक्यूट थायरायडिटिस (Subacute thyroiditis) कहा जाता है।

गर्भावस्था में थायराइड के लक्षण व संकेत क्या हैं?

गर्भावस्था में थायराइड के लक्षण सही से समझाने के लिए हमने नीचे हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों के लक्षण अलग-अलग बताए हैं।

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण

  • वजन का बढ़ना
  • नब्ज धीरे चलना
  • पेट खराब होना
  • शरीर में ऐंठन होना
  • थकान ज्यादा लगना
  • त्वचा कसी-कसी लगना
  • ठंड बर्दाश्त न कर पाना
  • चेहरा सूजा हुआ दिखना
  • कब्ज की शिकायत होना या बढ़ना
  • काम पर ध्यान न लगना या याददाश्त कम होना
  • टीएसएच का स्तर ज्यादा होना और टी4 का कम होना

हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण

  • उल्टी होना
  • चक्कर आना
  • थकान लगना
  • वजन का घटना
  • पेट का खराब होना
  • पसीना ज्यादा आना
  • ब्लड शुगर का बढ़ना
  • हृदय की गति का बढ़ना
  • भूख कम या ज्यादा लगना
  • देखने की क्षमता कम होना
  • थायराइड हार्मोंस ज्यादा बनना
  • थायराइड के आकार का बढ़ना

गर्भावस्था में थायराइड कितना होना चाहिए?

प्रेगनेंसी में थायराइड का पता लगाने के लिए टीएसएच (थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन) के स्तर की जांच की जाती है। इसलिए गर्भावस्था में टीएसएच के सामान्य से ही थायराइड का पता लगाया जा सकता है। आगे हम थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (TSH) का सामान्य स्तर बता रहे हैं।

टीएसएच (MIU/L)कमअधिक
पहली तिमाही0.12.5
दूसरी तिमाही0.23.0
तीसरी तिमाही0.33.0
गर्भावस्था में थायराइड कितना होना चाहिए, यह समझाने वाला चार्ट

प्रेग्नेंसी में थायराइड से कैसे बचें

  • डॉक्टर की सलाह पर प्रतिदिन व्यायाम करके इससे बच सकते हैं या इसे नियंत्रित कर सकते हैं। साथ ही समय-समय पर अपना चेकअप करवाते रहें।
  • सुबह और शाम को करीब आधा-आधा घंटा खुली हवा में पैदल चलें।
  • डाइट को पूरी तरह से हेल्दी और अपने थायराइड के स्तर के हिसाब से रखें।
  • हाइपरथायरायडिज्म होने पर  कम आयोडीन युक्त भोजन करना चाहिए। आप अपनी डाइट में ओट्स, शहद, बिना नमक वाले नट्स शामिल कर सकते हैं।
  • हाइपरथायरायडिज्म होने में कम वसा युक्त खाद्य पदार्थ खाना चाहिए। 

आप समझ ही गए होंगे कि थायराइड क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है। थायराइड का पता लगते ही सही तरीके से इसका इलाज करवाना चाहिए। डॉक्टर कुछ दवाएं लेने का सुझाव देते हैं, जिनकी मदद से हार्मोन्स को बैलेंस करने में मदद मिलती है। 

गर्भावस्था में थायराइड का नियंत्रित न रहना गर्भस्थ शिशु और माँ दोनों के लिए खतरनाक है, इसलिए समय-समय चेकअप करवाते रहें और खुद को व अपने शिशु को सुरक्षित रहें।

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