कोलोस्ट्रम को पोषण का स्त्रोत क्यों कहाँ जाता है?

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कोलोस्ट्रम को पोषण का स्त्रोत क्यों कहाँ जाता है?

 

कोलोस्ट्रम क्या है?

 

हर स्तनधारी माँ को डिलीवरी के बाद आने वाले पहले दूध को कोलोस्ट्रम कहते है। यह ज्यादातर गर्भावस्था ख़तम होने के पड़ाव पर स्त्रावित होता है। यह एक पिले और चिपचिपे गाढ़े पदार्थ जैसा होता है जो पोषक तत्व और कई अन्य पदार्थ से बरपुर होता हैं, यह बच्चे को गर्भ से बहार सुरक्षित करने के लिए बहोत उपयुक्त होता हैं।

 

 

कोलोस्ट्रम पोषक क्यों कहाँ जाता है?

 

कोलोस्ट्रम की रचना यह बाद में आने वाले स्तनपान दूध से अलग होती हैं। कोलोस्ट्रम यह इम्युनोग्लोबुलिन से भरपूर होता हैं, जो संक्रमण से बचता हैं। यह बच्चे को बढ़ने जो एंजाइम, पेप्टाइड्स, विटामिन, आवश्यक फैटी एसिड, खनिज और अमीनो एसिड से भरा होता हैं। बाद में स्रावित दूध की तुलना में कोलोस्ट्रम की प्रोटीन सामग्री भी अधिक होती है। कोलोस्ट्रम का सेवन शरीर को इतने तरीकों से लाभ पहुंचाता है कि अब यह वयस्कों के लिए भी उपलब्ध है।

 

 

नवजात शिशु को कोलोस्ट्रम कैसे उपयुक्त है?

 

  • इसमें उच्च स्तर के एंटीबायोटिक होते हैं, जो एक अच्छी प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने में मदद करते हैं
  • यह बच्चे के पेट के अस्तर पर एक कोट का निर्माण करता है - यह शिशु को न केवल बचपन में, बल्कि भविष्य में भी बीमारियों से बचाता है।
  • कोलोस्ट्रम एक रेचक की तरह काम करके मेकोनियम (बच्चे का पहला मल) को बाहर निकालने में मदद करता है
  • यह पीलिया होने से रोकता है
  • कोलोस्ट्रम पर्याप्त मात्रा में सही पोषक तत्व प्रदान करके बच्चे को लाभ पहुंचाता है, जिससे यह सही भोजन बन जाता है।

 

आज कल बाजार में कोलोस्ट्रम की सप्लीमेंट्स सामान पोषक मात्रा में भी उपलब्ध है:

 

  • जैविक कोलोस्ट्रम, डोपामाइन और सेरोटोनिन को नियमित करने में मदद करते है, जिससे मूड अच्छा हो जाता है।
  • ऐसे कई अध्ययन हैं जिन से पता चला है कि कोलोस्ट्रम सूजन, और दर्द को कम करने में मदद कर सकता है, और कई स्केलेरोसिस, ल्यूपस और क्रोहन रोग जैसे कई ऑटोइम्यून रोगों को कम करने में सहायता कर सकता है।
  • यह भी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने और वजन घटाने में मदद करने में अत्यधिक उल्लेखनीय साबित हुआ है, खासकर मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए उपयुक्त है।

 

कोलोस्ट्रम लेने के कुछ अन्य फायदे:

 

कोलोस्ट्रम में लैक्टोज के बहुत कम स्तर होते हैं, वास्तव में इतने कम, कि लैक्टोज कोई भी व्यक्ति बिना किसी कठिनाई के इसका उपभोग कर सकते हैं। हालांकि, सतर्क रहना और कम से कम संभव खुराक के साथ शुरू करना महत्वपूर्ण है।

इसका उपयोग बच्चों में पूरक के रूप में किया जा सकता है क्योंकि यह शरीर के विकास के लिए इष्टतम पोषण प्रदान करता है।

 

कोलोस्ट्रम की खुराक कितनी मात्रा में होनी चाहिए?

 


१ से ४ चम्मच नैसर्गिक कोलोस्ट्रम स्तन से हर रोज आता है। यह कोलोस्ट्रम की मात्रा नवजात शिशु के पेट के लिए उचित है। यद् रखे बहोत सी महिला माताएं २४ घंटो में ३० मल कोलोस्ट्रम दे पाती है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि बच्चे को दूध की पूर्ति होने के लिए अक्सर स्तनपान कराया जाता है।

 

दिन में दो बार कोलोस्ट्रम पाउडर की मात्रा वयस्क व्यक्तियों के लिए एक चम्मच, छोटे बच्चों के लिए आधा चम्मच पानी के साथ होनी चाहिए। आप कैप्सूल के रूप में भी कोलोस्ट्रम ले सकते हैं और कैप्सूल की खुराक पर उसकी मात्रा निर्भर कराती है।


कार्बनिक कोलोस्ट्रम में कोई जोड़ तत्व नहीं होता है और प्रशीतन की आवश्यकता नहीं होती है।

 

शिशुओं को किसी भी प्रकार की खुराक देने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि कोलोस्ट्रम में पोषक तत्वों का उच्चतम स्तर होता है।

 

किसी भी चिंता के मामलों में, हमेशा बाल रोग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श करें। इससे भी बेहतर, एक लैक्टेशन सलाहकार  के साथ एक नियुक्ति करें क्योंकि वे आपके बच्चे के फीड पर बेहतर अच्छी सलाह दे सकते हैं।

 

 

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