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गर्भावस्था के दौरान पेट पर डार्क काली लाइन (लिनिया नाइग्रा) क्यों बनती है?

गर्भावस्था के दौरान पेट पर डार्क काली लाइन (लिनिया नाइग्रा) क्यों बनती है?

1 Feb 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

 

नारी के लिए गर्भावस्था भगवान का उपहार होता है, जिससे उसको माँ बनने का सौभाग्य मिलता है। इस अवस्था में उसको जैसे दुनिया की सारी खुशियाँ मिल जाती हैं, उसी तरह बहुत तरह के नए और अनोखे अनुभवों से होकर गुजरना भी पड़ता है। असल में प्रेग्नेंसी की अवस्था में शरीर में हॉर्मोन्स के कारण बहुत सारे बदलाव होते हैं, जैसे पेट और स्तन का आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, रंग थोड़ा सांवला हो जाता है आदि। लेकिन इनमें से सबसे अजीब एक चीज जो नजर आता है, वह है पेट पर काले रंग की रेखा, इसको लिनिया नाइग्रा कहते हैं। हमें पता है लिनिया नाइग्रा को लेकर आपके मन में सवालों का सागर उमड़ रहा होगा। टेंशन मत कीजिए, हम आगे प्रेग्नेंसी में नाभी के नीचे लाइन, लिनिया नाइग्रा दिखाई पड़ती है, उसके ही बारे में बात करने वाले हैं।

प्रेग्नेंसी में नाभी के नीचे लाइन (लिनिया नाइग्रा) है क्या?

जैसा कि हम पहले बात कर रहे थे कि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में अनेक बदलाव होते हैं, पेट इतना बढ़ जाता है कि स्ट्रेच मार्क्स पड़ने लगते हैं। इसके अलावा जो एक नया चीज होता है, वह है गर्भावस्था के दौरान पेट पर काली लाइन जो प्यूबिक हेयर के ऊपर से नाभी तक जाता है। किसी-किसी में यह डार्क लाइन नाभी से छाती तक चला जाता है। प्रेग्नेंसी के समय पेट पर काली लाइन को ही लिनिया नाइग्रा कहते हैं, पर यह वह रेखा है जो गर्भावस्था के दूसरी तिमाही और तीसरी तिमाही के बीच निकलती है और डिलीवरी के 9-10 महीने के बाद खुद ही हल्की होकर लुप्त हो जाती है। इस रेखा को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं, न ही इससे माँ को कोई परेशानी का सामना करना पड़ता है और न ही शिशु को। यह सिर्फ पेट पर प्रत्यक्ष रूप से दिखती है और कुछ महीनों के बाद खो जाती है।

प्रेग्नेंसी के समय लिनिया नाइग्रा क्यों पड़ती है?

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर के दूसरों अंगों की त्वचा में भी बहुत बदलाव आते हैं। पेट और स्तन की त्वचा में खिंचाव उत्पन्न होने के कारण जिस तरह रंग में बदलाव आता है, वैसे ही स्ट्रेच मार्क्स भी आते हैं। कुछ महिलाओं के चेहरे का रंग और सांवला हो जाता है और उस पर गहरे रंग के धब्बे भी पड़ते हैं। यहाँ तक कि ब्रेस्ट के निप्पल का रंग भी पहले से और गहरा हो जाता है। पहले से जो दाग-धब्बे शरीर पर थे, वह और भी स्पष्ट रूप से नजर आने लगते हैं।

आपको पता है इस रंग के बदलाव और दाग-धब्बों की स्पष्टता के पीछे कारण क्या है? असल में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का निष्कासन ज्यादा होता है, जो शिशु के विकास के लिए जरूरी होता है।

एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टोरेन हार्मोन त्वचा में मेलानोसाइट्स नाम के कोशिकाओं को उत्तेजित करता है, जो मेलानिन का उत्पादन करता है। इसी मेलानिन के अधिक उत्पादन के कारण गर्भावस्था के दौरान त्वचा के रंग में बदलाव आदि आते हैं। यहाँ तक कि इसी के उत्पादन के कारण आप लिनिया नाइग्रा को और गहरे रंग में देखते हैं।

गर्भावस्था के दौरान पेट पर डार्क लाइन कब से दिखाई देती है?

आम तौर पर लिनिया नाइग्रा पेट पर प्रेग्नेंसी के दूसरी तिमाही और तीसरी तिमाही के बीच से दिखाई देनी शुरू हो जाती है। पहले इस रेखा का रंग हल्का रहता है, जो बाद में धीरे-धीरे गहरी और स्पष्ट रेखा के रूप में नजर आने लगती है। इस रेखा को लेकर कई तरह के मिथक है, जिनमें एक यह है कि अगर रेखा प्यूबिक हेयर से लेकर नाभी तक जाती है तो लड़की होगी और रेखा अगर नाभी से छाती की तरफ जाती है तो लड़का होगा। वैसे इस मान्यता के पीछे न कोई वैज्ञानिक कारण है और न ही कोई प्रामाणिक तथ्य है।

 

क्या गर्भावस्था के दौरान पेट पर जो काली रेखा या प्रेग्नेंसी में नाभी के नीचे लाइन जो आती है, वह रह जाती है?

जी नहीं, डिलीवरी के बाद से ही यह डार्क लाइन धीरे-धीरे धूमिल होने लगती है। प्रसव या डिलीवरी के 9-10 महीने के बाद प्रेग्नेंसी में नाभी के नीचे लाइन जो आई थी, वह लगभग विलीन हो जाती है। वैसे तो इस रेखा से डिलीवरी के बाद माँ या शिशु किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। लिनिया नाइग्रा को कम करने के लिए आप ट्रिक्स को फॉलो कर सकते हैं-

  • बाहर निकलते समय पेट पर भी सनस्क्रीन लोशन लगाएं। पेट और शरीर की त्वचा को धूप के संपर्क में कम आने दें।
  • नींबू का रस लगा सकते हैं क्योंकि यह हाइपरपिग्मेंटेशन पर काम करता है। अगर डिलीवरी के बाद भी लिनिया नाइग्रा का रंग गहरा ही रहता है तो नींबू का रस लगाने से रंग धीरे-धीरे हल्का हो सकता है।

 

प्रेग्नेंसी में नाभी के नीचे लाइन यानि लिनिया नाइग्रा न हो तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। किसी-किसी महिला में यह काली रेखा इतनी हल्की होती है कि वह नजर नहीं आती है, यह गर्भावस्था के लिए किसी प्रकार की कमी का सूचक नहीं है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान जो भी शारीरिक बदलाव हो रहे हों, उसे दिल से स्वीकार कीजिए और खुशी-खुशी नए मेहमान के आने की तैयारी कीजिए।

#garbhavastha

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