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कोरोना और लॉकडाउन की पहली लहर में कैसा रहा प्राची पाल के पेरेंटिंग का सफर, यहां पढ़ें

कोरोना और लॉकडाउन की पहली लहर में कैसा रहा प्राची पाल के पेरेंटिंग का सफर, यहां पढ़ें

11 May 2022 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 406 Articles

प्रेग्नेंसी और पेरेंटिंग का सफर हर किसी के लिए अलग-अलग अनुभव लिए होता है। इसी से जुड़ा एक और अनुभव हम यहां पर अपनी नई मॉम्स का लेकर आए हैं। आज हम आपको न्यू मॉम प्राची पाल, उनकी 2 वर्ष की बेटी, प्रेग्नेंसी के लक्षण और उनकी गर्भावस्था के सफर से मिलवाने हैं। 

न्यू मॉम प्राची पाल की खास बात है कि उन्होंने कोरोना की पहली लहर में माँ बनने का अनुभव किया। किस तरह उस पेनिक अवस्था में उन्होंने अपनी जरूरतों को पूरा किया और बेटी की परवरिश की, यह जानना बेहद ही रोचक है।

अपने निजी और कामकाजी जीवन के बारे में बताएं?

मैं और मेरे पति चंडीगढ़ से हैं, लेकिन मौजूदा समय में हम कोचि, केरल में रहते हैं। मेरे पति भारतीय नेवी में हैं। अगर मैं अपने निजी जीवन की बात करूं, तो मैं शादी से पहले जॉब करती थी, लेकिन फिलहाल अभी बहुत कुछ बदल गया है। 

पति का ट्रांसफर होने के बाद शादी करके हम केरल में शिफ्ट हो गए, जहां पर मुझे इसका एहसास हुआ कि नई जगह पर नई जॉब ढूंढ पाना इतना आसान नहीं है। फिर कुछ ही समय में मुझे जब यह पता चला कि मैं माँ बनने वाली हूं, तो बस मैंने अपने मदरहुड को इन्जॉय करने का फैसला कर लिया और अभी मैं अपनी शादी-शुदा जीवन और माँ के सफर को अच्छे से इन्जॉय कर रही हूं।

आपकी गर्भावस्था का सफर कैसा रहा?

पेरेंटिंग का सफर
प्राची पाल और उनकी फैमिली

लोग कहते हैं कि माँ बनना बहुत ही खूबसूरत एहसास होता है और हर महिला के लिए सौभाग्य की बात होती है। लेकिन हर किसी की अपनी यात्रा होती है और उनके अलग-अलग अनुभव होते हैं। मैं माँ बनकर बहुत खुश थी और मैं पूरी गर्भावस्था के दौरान शारीरिक रूप से स्वस्थ भी थी। लेकिन इस दौरान मुझे उल्टियां बहुत होती थी, जिस वजह से मैं ठीक से कुछ नहीं खा पाती थी। बस उल्टियों ने ही मेरी गर्भावस्था के समय को बहुत चुनौतीपूर्ण बनाया था।

आपकी मदरहुड की शुरुआत कैसे हुई और पेरेंट्स बनने के बाद आपने खुद के बारे में क्या सीखा?

पालन-पोषण का सफर हमारे लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था। देखा जाए, तो किसी भी पेरेंट्स के लिए घर में एक नन्हे मेहमान का आना और परिवार का अहम हिस्सा बनना बेहद खास एहसास होता है। इसके बाद जिंदगी बहुत बदल जाती है, जिसका असर मेरी जिंदगी में भी दिखाई दिया। 

जिस वक्त मैं माँ बनी उस वक्त कोविड की पहली लहर आई थी और लोग काफी डरे हुए थे। फिर लॉकडाउन के उन 21 दिनों में मैंने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया। कोविड और लॉकडाउन के कारण, मैंने कुछ ऐसे अनुभव भी किए हैं, जिन्हें मैं कभी नहीं भूल सकती हूं। 

लॉकडाउन के कारण हमें बिना परिवार के मदद के अकेले ही बच्चे को संभालना पड़ा। इतना ही नहीं हमें बच्चे की जरूरत का सामान भी लाने में परेशानी होती थी, जैसे उसके लिए जरूरी दवाएं और टीकाकरण के लिए अस्पताल जाना। जाहिर है हमारी बेटी से पहले हमने कभी भी इतने छोटे बच्चे की देखभाल नहीं की थी। इस वजह से यह अनुभव हमारे लिए सबसे अलग था।

पेरेंटिंग में दोनों साथी की बराबर जिम्मेदारी पर आपका क्या विचार है? आपके पति से आपके किस तरह की मदद मिली?

समय बदल गया है और बदल भी रहा है। मुझे लगता है कि जिस तरह बच्चे की देखभाल करने की जिम्मेदारी एक माँ की होती है, उसी तरह एक पिता को भी इस जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। मेरी पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान मेरे पति ने मेरा पूरा साथ दिया, उन्होंने हर चीज का अच्छे से ख्याल रखा, उनके प्यार और सपोर्ट से मैं उन मुश्किल दिनों में भी खुश रह पाई, जब मुझे प्रेग्नेंसी से जुड़ी दिक्कतें होती थीं। 

लॉकडाउन में बेटी के जन्म के बाद मेरे पति ने हर संभव तरीके से मेरी मदद की और हमारे स्वास्थ्य का ध्यान रखा। मुझे लगता है कि मैं और मेरे पति अपनी बेटी के प्रति बराबरी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे उससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात का ख्याल रखते हैं। इसके अलावा, मैं जब भी अपनी बेटी के साथ व्यस्त रहती हूं, तो मेरे पति घर के काम भी कर लेते हैं। 

आप अपने बच्चे को जीवन में क्या सीख देना चाहेंगी?

सभी पेरेंट्स अपने बच्चों को सबसे अच्छी परवरिश देने की सोचते हैं और इसमें अपना बेस्ट भी देते हैं। पर इससे इंकार नहीं कर सकते हैं कि हर बच्चा अलग होता है। इसलिए यह बच्चे पर भी तय कर सकता है कि वह अपने पेरेंट्स से जीवन के बारे में किस तरह की सीख लेता है और उनके विचारों को कितना मानता है।

हम पेरेंट्स सिर्फ अपने बच्चों को सिखाने की कोशिश कर सकते हैं, पर उस पर इसके लिए कभी दबाव नहीं बना सकते हैं। मैं अपनी बेटी को अपने तरीके से समझाने के साथ ही, उसे सही-गलत का अंतर करने, बड़ों का सम्मान करने, खुद का स्टैंड लेने और आत्मनिर्भर बनने की भी सीख दूंगी। 

मैं हर दिन उसे कुछ नया सिखाने का प्रयास भी करती हूं। साथ ही, समय के साथ मुझे उसे और भी बहुत कुछ सिखाना होगा। 

एक कामकाजी मां के रूप में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

मुझे लगता है कि माँ बनने के बाद हाउस वाइफ या वर्किंग मदर, दोनों को ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के परिवार में रहते हैं। एक बार के लिए वर्किंग मदर के लिए परिवार के साथ रहकर बच्चे की परवरिश करना आसान हो सकता है। 

वहीं, दूसरी तरह अगर माँ वर्किंग नहीं भी है और वह परिवार से दूर रहती है, तो उसके लिए अकेले घर और बच्चे की देखभाल करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जैसा कि मैं एक गृहिणी हूं, मेरे लिए इसका अनुभव अलग है। हो सकता है कि एक कामकाजी माँ के लिए यह और भी मुश्किल हो सकता है और उनका अनुभव भी अगल हो सकता है।

ये मजेदार वीडियो बनाने के लिए आपको कौन प्रेरित करता है? 

सच कहूं तो मैं किसी से प्रेरित होकर ये वीडियो और फोटो पोस्ट नहीं करती हूं। मैं यह सब आनंद और अपनी बेटी के बीच इस खूबसूरत रिश्ते की वजह से करती हूं। मेरा दिल चाहता है कि मैं इन पलों को थामे रहूं, जिसमें मेरी बेटी हर दिन कुछ नया सीख रही है। यही वजह है कि इन वीडियो और फोटोज को डालकर मैं अपनी खुशी को सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के साथ शेयर करती हूं। 

आप अपने प्रशंसकों के साथ क्या संदेश देना चाहेंगी?

मैं उन सभी लोगों को बहुत धन्यवाद देती हूं जो मुझे देखना पसंद करते हैं और मेरे वीडियो और तस्वीरों को लाइक करते हैं। मैं बस इतना ही कहना चाहती हूं कि अपनी खुशी को लेकर सिर्फ अपने करीबी लोगों के बारे में सोचें। दूसरे लोग क्या सोचते हैं, लोग क्या कहेंगे इसकी तरफ ध्यान न दें। वही करें जिससे आपको और आपके परिवार को खुशी मिले, क्योंकि हर किसी का अपना नजरिया होता है। 

अगर आपमें कोई हुनर ​​है, तो न सोचें कि लोग क्या कहेंगे। ये आपकी जिंदगी है, इसे अपनी शर्तों पर जिएं। ये खूबसूरत जिंदगी भगवान की देन है।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर आपके क्या विचार हैं? ऑनलाइन शिक्षा में किसी तरह का बदलाव चाहेंगी?

पिछले दो सालों में शिक्षा प्रणाली में काफी बदलाव आया है। कोरोना की वजह से हम सभी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, लेकिन इन सबके कारण कुछ अच्छी सुविधाएं भी मिली हैं, जैसे ऑनलाइन पढ़ाई और वर्क फ्रॉम होम। 

इससे छात्रों के साथ ही कामकाजी लोगों को भी काफी मदद व आराम मिला है। अब लोग घर बैठे ही बहुत कुछ सीख सकते हैं और कर सकते हैं। मैं इस वर्तमान शिक्षा प्रणाली का समर्थन करती हूं, लेकिन पूरी तरह से नहीं, क्योंकि कुछ लोग ऑनलाइन के जरिए गुमराह भी करते हैं। हर चीज के कुछ फायदे और कुछ नुकसान दोनों होते हैं। 

युवा माताओं को वर्किंग लाइफ, गर्भावस्था और पेरेंटिंग के बारे में आप क्या सलाह देना चाहेंगी?

मैं उन सभी गर्भवती महिलाओं और नई माताओं से कहना चाहती हूं कि गर्भावस्था के सफर को लेकर हर किसी का अपना अनुभव, अलग एहसास, लक्षण और समस्याएं होती हैं, इसलिए कभी भी खुद की तुलना एक-दूसरे के अनुभवों व लक्षणों से न करें। 

साथ ही, हर बच्चे का विकास भी अलग होता है, इसलिए अगर बच्चा देरी से चलता है या देरी से बोलता है, तो इसे लेकर ज्यादा परेशानी न हों। बच्चे के विकास को समय दें। वह समय व विकास के अनुसार सब सीख जाएगा। बस बच्चे का अच्छे से ख्याल रखें। अच्छा और पौष्टिक खाना खुद खाएं और बच्चे को भी दें, ताकि बच्चे के शरीर और दिमाग दोनों का विकास सही और अच्छे तरीके से हो सके।

तो, कुछ ऐसा रहा है हमारी न्यू मॉम प्राची पाल के पेरेंटिंग का सफर। हो सकता है कि प्राची पाल की ही तरह आप जैसी कई माताओं ने भी इनके जीवन से मिलते-जुलती स्थिति का अनुभव किया हो। अगर आपके मन में कभी भी ऐसा विचार आता है कि उसके प्रेग्नेंसी के लक्षण आपसे अलग क्यों हैं, तो ध्यान रखें कि सभी की गर्भावस्था अपने आप में अनोखी होती है। 

हम जल्द ही फिर से लेकर आएंगे एक नई और अलग माँ के जीवन का किस्सा।

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