2 Jun 2022 | 1 min Read
Vinita Pangeni
Author | 549 Articles
प्रेग्नेंसी में गर्भकालीन मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज) होना सामान्य है। माना जाता है तकरीबन 10 प्रतिशत महिलाओं को यह समस्या होती है। इसका प्रतिशत दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसलिए महिलाओं को सतर्क रहने और लक्षणों पर गौर करना जरूरी है। जेस्टेशनल डायबिटीज से बचने के लिए बहुत से तरीकों को अपनाया जाता है, जिनमें से एक योग भी है। प्रीनेटल योग जेस्टेशनल डायबिटीज के लिए कितना प्रभावकारी है, यह इस लेख में जानते हैं।
हां, योग और प्राणायाम रक्त शर्करा यानी ब्लड ग्लूकोज के स्तर को कम करने की क्षमता रखते हैं। इस तरह ये जेस्टेशनल डायबिटीज को कम करने में मदद कर सकता है। इससे भ्रूण और माँ पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से बचा जा सकता है। गर्भावधि मधुमेह से बचने के लिए गर्भावस्था में हल्के एक्सरसाइज और योग को सुरक्षित बताया गया है।
योग हार्मोन को नियंत्रित करके गर्भावधि मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। खासकर, कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन हार्मोन के स्तर को कम करके, रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित करते हैं। यही नहीं, योग से भावनात्मक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है, जिससे बॉडी रिलेक्स रहती है।
शरीर में विश्राम प्रतिक्रिया को उत्तेजित करके भावनात्मक कल्याण करता है। योगाभ्यास करने वाली माँ शरीर के बारे में जागरूक रहती है ताकि वह अपने ऊर्जा स्तर, रक्त शर्करा के स्तर और भूख की सटीक निगरानी कर सके।
ऋषिकेश में रह रही योग टीचर लतिका पयाल के अनुसार, “जेस्टेशनल डायबिटीज का इलाज करने के लिए प्रसव पूर्व माँ को योग, प्राणायाम, रिलैक्शन और मेडिटेशन की प्रैक्टिस करनी चाहिए।”
प्रेग्नेंसी में जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर योगासन फायदेमंद तो हैं, लेकिन सभी योगासन इस समय नहीं किए जा सकते हैं। हां, आप प्राणायाम जरूर कर सकती हैं। इसके अलावा, योगासन से जुड़ी जानकारी के लिए आपको योग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि, हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है।
जी हैं, एक योगासन जो किसी महिला के लिए प्रेग्नेंसी में सेफ हो, वो जरूरी नहीं कि आपके लिए भी सुरक्षित हो। अगर आप आमतौर पर प्रीनेटल योग जो जेस्टेशनल डायबिटीज को कम कर सकते हैं, उनका नाम जानना चाहती हैं, तो वो आगे दिए गए हैं। लेकिन, इनमें से किसी भी योगासन को बिना विशेषज्ञ की सलाह के न करें।
अनुपचारित गर्भकालीन मधुमेह वाली माताओं से जन्म लेने वाले शिशुओं में निम्नलिखित खतरे बढ़ जाते हैं –
• समय से पहले जन्म, जिसके परिणामस्वरूप सांस लेने और अन्य चिकित्सीय समस्याएं होती हैं
• हाइपोग्लाइसीमिया (निम्न रक्त शर्करा)
•दौरे का कारण बनता है
• हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (हृदय की मांसपेशियां अस्वाभाविक रूप से मोटी होना)
• कम उम्र में ही या बड़े होने पर बच्चे को टाइप 2 मधुमेह हो सकता है।
जन्म देने के बाद, गर्भावधि मधुमेह वाली लगभग 50% महिलाओं को टाइप 2 मधुमेह हो जाता है। हालांकि, अगर गर्भावस्था में महिला का वजन कम व स्वस्थ रहता है, तो यह जोखिम काफी कम हो जाता है।
आप समझ ही गए होंगे कि जेस्टेशनल डायबिटीज में योगासन फायदेमंद होता है। अगर इस दौरान आप योग करना चाहती हैं, तो शरीर पर ज्यादा जोर बिल्कुल भी न डालें और खाना खाने के कम-से-कम तीन घंटे बाद ही योगासन करें। भरे हुए पेट में योगासन नहीं करना चाहिए। साथ ही हमेशा विशेषज्ञ की सलाह और देखरेख में योगासन करें। अन्यथा गर्भावस्था को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
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