ग्राइप वाटर का उपयोग : नवजात शिशुओं के पेट का दर्द ग्राइप वाटर से दूर होगा?

cover-image
ग्राइप वाटर का उपयोग : नवजात शिशुओं के पेट का दर्द ग्राइप वाटर से दूर होगा?

अपनी परेशानी बताने के लिए छोटे बच्चे सिर्फ रो सकते है। आपके बच्चे के रोने का मतलब आपसे बेहतर कोई नहीं पहचान सकता है, इसलिए अक्सर माँ को तुरंत पता चल जाता है कि आपका बच्चा नींद में है, भूखा है, या उसे गले लगाने की जरूरत है। बच्चे का थोड़ा बहुत रोना सामान्य है, लेकिन कभी-कभी बच्चे पेट भरा होने पर भी अत्यधिक रो सकते हैं।

बच्चे का लगातार बुरी तरह रोना पेट दर्द के कारण भी हो सकता है। बच्चों को अक्सर पेट का दर्द, पेट में गैस के कारण होता है। गैस और पेट से जुड़ी बाकि समस्याओं के लिए बच्चों को ग्राइप वाटर (Gripe Water For Newborn) देने की सलाह अक्सर नयी माँओं को मिलती रहती है। बेबी चक्रा के इस आर्टिकल में जानेंगें कि यह ग्राइप वाटर आखिर क्या है और यह बच्चे को राहत देने में कैसे मददगार है?

ग्राइप वाटर क्या है ? - Gripe Water Kya Hai

ग्राइप वॉटर एक आम ओवर-द-काउंटर वाटर-बेस्ड सप्लीमेंट है जो कि पेट दर्द, कोलिक दर्द और हिचकी के लिए दिया जाता है। इसे 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश फार्मासिस्ट विलियम वुडवर्ड द्वारा बाजारों में उपलब्ध कराया गया था। 1840 के दशक के दौरान, इंग्लैंड में मलेरिया का प्रकोप हुआ और डॉक्टरों ने इसका इलाज करने के लिए एक चिकित्सा परिसर तैयार किया। उन्होंने देखा कि यह दवा पेट की समस्याओं से पीड़ित बच्चों को शांत करने में सक्षम थी और वुडवर्ड ने इस सूत्र को देखा और संशोधित करके बाजार में उपलब्ध करवाया।

इसके मूल सूत्र में पानी, डिल तेल, सौंफ़ के बीज का तेल, चीनी, सोडियम बाइकार्बोनेट और 3.6% एल्कोहल शामिल होता था, लेकिन अब निर्माताओं ने मेडिकल कम्युनिटी के आपत्ति जताने पर इसे पूरी तरह से एल्कोहलमुक्त कर दिया है।

ग्राइप वाटर के फायदे - Benefits Of Gripe Water

अल्कोहल मुक्त और विश्वसनीय ब्रांड का ग्राइप वाटर बच्चों की कई समस्याओं से निपटने में मदद कर सकता है। शिशु को जब ग्राइप वाटर (Gripe Water For Newborn) देना शुरू करें तो एक बार बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। डॉक्टर ही इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि शिशु को ग्राइप वाटर की जरूरत है या नहीं? एक बार डॉक्टर ग्रीन सिग्नल दे दें तो इस ग्राइप वाटर के फायदे उठाये जा सकते हैं -

पेट दर्द से राहत(Stomach Pain Relief)

ग्राइप वाटर का उपयोग शिशुओं में पेट दर्द को शांत करने के लिए किया जाता है। अपच, एसिड रिफ्लकशन या पेट फूलने के कारण डायाफ्राम में जलन हो सकती हैं जिसकी वजह से हिचकी आती है। बच्चे को अगर नियमित ग्राइप वाटर दिया जाए तो हिचकी की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

पाचन रहता है ठीक (Good For Digestion)

ग्राइप वाटर को अक्सर उन बच्चों को दिया जाता है जिन्हे पाचन तंत्र की परेशानियां, गैस या पेट फूलना, एसिड और कब्ज की समस्या होती है। ग्राइप वाटर की तासीर ठंडी होती है जिसकी वजह से पेट को आराम महसूस कराने में यह सप्लीमेंट बहुत मददगार हो सकता है।

कौलिक के लिए फायदेमंद (Gripe Water For Colic)

कोलिक बच्चों को शुरूआती 6 महीनों के दौरान बहुत परेशान कर देने वाली समस्या है। इसकी वजह से बच्चे अक्सर शाम के समय एक नियत समय पर चिड़चिड़ापन और पेट में दर्द महसूस कर सकते हैं। बच्चों के शाम को रोने की वजह कोलिक ही है और ग्राइप वाटर इससे राहत दे सकता है।

आइए, अब जानते हैं कि ग्राइप वाटर कैसे और कब दें?

ग्राइप वॉटर कैसे दें / कब दें ?

ग्राइप वाटर केवल तब दिया जाना चाहिए जब बच्चा ऐसे लक्षण दिखाता है जिन्हें अन्य तरीकों से ठीक नहीं किया जा सकता है | एक शिशु जिसका विशेष रूप से स्तनपान कराया जा रहा है उसे ग्राइप वाटर देने से पहले अपने बाल रोग विशेषज्ञ से एक बार परामर्श करना ज़रूरी हैं | कुछ निर्माताओं ने इसे दो हफ्तों के कम आयु के शिशुओं को देने की भी सिफारिश की है जो कि बहुत विवादास्पद है।

ग्राइप वाटर हमेशा चम्मच या ड्रॉपर से दें | आमतौर पर इसका असर कुछ मिनटों में दिख जाता हैं पर बच्चे की आयु और पीड़ा की तीव्रता पर भी निर्भर हैं | इसे दिन में एक या दो बार अथवा अपने बाल विशेषज्ञ की सलाह पर दे सकते हैं | एक्सपायरी डेट के बाद का ग्राइप वाटर इस्तेमाल ना करें |

ग्राइप वाटर के नुकसान - Gripe Water Side Effects

इस बात का कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि ग्राइप वाटर बच्चे के लिए सुरक्षित या असुरक्षित है। ग्राइप वाटर के शुरुआती फार्मूलों में अल्कोहल होता था जो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए निश्चित रूप से खराब होता है। आज के सूत्रों में अल्कोहल नहीं है लेकिन इसके बजाय पैराबेंस, वेजिटेबल कार्बन जैसे अन्य पदार्थ भी हैं जो समान रूप से हानिकारक हो सकते हैं।

सोडियम बाइकार्बोनेट जैसे अन्य अवयव, यदि अधिक मात्रा में लिए जाएँ, तो ये दूध क्षार सिंड्रोम (Milk-alkali syndrome) के रूप में जानी जाने वाली बीमारी का कारण बन सकते है। आगे चल कर यह बच्चों के गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए कोशिश करें कि ग्राइप वाटर का उपयोग कम ही करना पड़े | डिल तेल और सौंफ़ तेल ग्राइप वाटर में एकमात्र तत्व हैं जिन्हें बच्चे के लिए सुरक्षित समझा जा सकता है। भारतीय फॉर्मूलेशन में अतिरिक्त सुखदायक प्रभाव देने के लिए पुदीने का तेल भीइस्तेमाल होता है।

तो ये थी शिशु के लिए ग्राइप वाटर (Gripe water for newborn) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी। बच्चे के पेट में दर्द न हो इसके लिए सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा दूध पिलाने के दौरान सीधा रहे ताकि पेट में गैस की समस्या कम हो सके। यदि आप अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाती हैं, तो बोतल खाली होते ही दूध पिलाना बंद कर दें, ताकि आपका बच्चा अपनी बोतल से हवा न निगल सके। दूध पिलाने के बाद हमेशा शिशु को डकार लेने में मदद करें और अधिक परेशानी होने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें, सिर्फ ग्राइप वाटर पर निर्भर न रहें।


Related Articles:

#shishukidekhbhal #gripewater
logo

Select Language

down - arrow
Personalizing BabyChakra just for you!
This may take a moment!