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गर्भ में बच्चे की धड़कन कब आती है तथा कितनी होनी चाहिए

गर्भ में बच्चे की धड़कन कब आती है तथा कितनी होनी चाहिए

24 May 2018 | 1 min Read

Ankita Mishra

Author | 409 Articles

माँ के गर्भाशय के अंदर नौ महीने तक भ्रूण का विकास जिस तरह से होता है, वह एक अनोखी कल्पना जैसी ही होती है। इस पूरे समय में बच्चे का शरीर कैसे विकसित होता है, गर्भ में बच्चे की धड़कन कब आती है (Bacche Ki Dhadkan) या किस तरह उसकी आंख, कान और नाक का विकास होता है, यह जानना बहुत ही रोमांचित होता है। पुराने लेख में बच्चे की ग्रोथ की जानकारी देने के बाद अब आपको इस लेख में हम बच्चे की धड़कन कितने दिन बाद आती है (Bacche Ki Dhadkan Kab Banti Hai), इसकी जानकारी दे रहे हैं। 

बच्चे की धड़कन कितने दिन बाद आती है? (Pregnancy me baby ki heartbeat kab aati hai)

गर्भधारण के 3 सप्ताह के बाद शिशु की हार्ट मसल यानी हृदय की मांसपेशी के ऊतकों का निर्माण होने लगता है। इसे मायोकार्डियम (Myocardium) भी कहते हैं। इस दौरान बहुत ही ध्यान से डॉक्टर डॉप्लर मशीन से बच्चे की हार्टबीट को सुन सकते हैं। 

हालांकि, आमतौर पर लगभग 6 सप्ताह के बाद डॉप्लर मशीन से बच्चे की हार्टबीट को बहुत ही आराम से ट्रैक किया जा सकता है और बच्चे की धड़कन को गर्भाशय से सुना जा सकता है। फिर जैसे-जैसे गर्भावस्था का चरण बढ़ता है, वैसे-वैसे बच्चे की हार्टबीट बिना उपकरण के भी सुनाई दे सकती हैं।

बच्चे की धड़कन कितनी होनी चाहिए? (Pregnancy me baby ke heartbeat kitni honi chahiye)

एक्सपर्ट्स के अनुसार, माँ के गर्भ में अगर एक मिनट तक भ्रूण का दिल 120 से 160 बार के बीच धड़कता है (Bacche Ki Dhadkan Kitni Hoti Hai), तो इसे नॉर्मल हार्ट बीट मानी जा सकती है। 

बच्चे की हार्टबीट की निगरानी कैसे की जाती है? (Pregnancy me baby ke heartbeat ko monitor kaise karte hain)

गर्भ में बच्चे की धड़कन कब आती है
गर्भ में बच्चे की धड़कन कब आती है / चित्र स्रोतः फ्रीपिक

माँ के गर्भाशय में बच्चे की धड़कन को सुनने व इसकी निगरानी करने के लिए (Bacche Ki Dhadkan Kaise Sune) डॉक्टर डॉप्लर डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए गर्भवती महिला के पेट के ऊपर इस डिवाइस को लगाया जाता है, जो एक मॉनिटर में बच्चे के दिल की धड़कन को रिकॉर्ड करता है। 

इसके अलावा, निम्नलिखित तरीकों से भी बच्चे की हार्टबीट की निगरानी की जा सकती है, जैसेः

  • नॉन स्‍ट्रेस टेस्‍ट (Non stress test in hindi)
  • कॉन्‍ट्रैक्‍शन स्‍ट्रेस टेस्‍ट
  • बायोफिजिकल प्रोफाइल 

यह डिवाइस पूरी तरह से माँ और गर्भ के बच्चे के लिए सुरक्षित होती है और इस्तेमाल में भी आसान होती है। 

बच्चे की हार्टबीट को कैसे सुन सकते हैं? (bacche ki dhadkan kaise sune)

आमतौर पर माँ के गर्भ से सीधे तौर पर कानों से बच्चे की हार्टबीट को सुनना संभव नहीं है। हालांकि, डॉप्लर की मदद से आसानी से बच्चे की हार्टबीट कोई भी सुन सकता है। इसके अलावा, गर्भावस्था के आखिरी महिनों में माँ के गर्भ में बच्चे के दिल की धड़कने साफ-साफ सुनाई दे सकती हैं। गर्भ से सुनने पर बच्चे के दिल की आवाज किसी घोड़े के दौड़ने जैसी हो सुनाई दे सकती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे की हार्टबीट में बदलाव (Pregnancy me bacche ki dhadkan me changes)

प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे की हार्टबीट में बदलाव भी हो सकता है, जो विभिन्न स्थितियों पर निर्भर कर सकता है, जैसेः

  • गर्भवती महिला या बच्चे में हृदय और ब्लड सकुर्लेशन में बदलाव होना
  • गर्भवती महिला को ऑक्सीजन की कमी होना, इसके कारण बच्चे तक भी ऑक्सीजन की कमी हो सकती है
  • गर्भावस्था के दौरान महिला के दैनिक आहार में पोषक तत्वों की आपूर्ति होना
  • गर्भावस्था में खून की कमी होना
  • गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन सामान्य से बहुत कम या ज्यादा होना
  • गर्भाशय में भ्रूण की स्थिति
  • गर्भावस्था का चरण
  • गर्भाशय में शिशु की हलचल

प्रसव या लेबर के दौरान भ्रूण की हार्टबीट की निगरानी क्यों जरूरी है? (Labour ke waqt baby ki heartbeat monitor karna kyu jaruri hai) 

गर्भ में बच्चे की धड़कन कब आती है
गर्भ में बच्चे की धड़कन कब आती है / चित्र स्रोतः फ्रीपिक

ऐसी कई वजहें हैं, जिनके कारण प्रसव या लेबर के दौरान भ्रूण की हार्टबीट की निगरानी करनी जरूरी होती हैः

  • प्रसव के दौरान स्वस्थ शिशु को जन्म देने के लिए
  • गर्भाशय के संकुचन की निगरानी करने के लिए
  • जन्म के बाद नवजात शिशु को हाइपोक्सिया या एसिडोसिस जैसी स्थितियों से बचाने के लिए
  • गर्भ में बच्चे की स्थिति सुरक्षित रखने के लिए

गर्भ में बच्चे की धड़कन कब आती है, जाहिर है इसकी उचित जानकारी आपको इस लेख से मिली होगी। एक बात का ध्यान रखें कि बच्चे की धड़कन कितने दिन बाद आती है, यह गर्भ धारण के हफ्तों पर ही पूरी तरह से निर्भर करती है, क्योंकि गर्भधारण के हफ्तों के आधार पर ही माँ के गर्भ में शिशु का विकास होता है। अगर किसी कारणवश गर्भवती महिला को सांस से जुड़ी कोई परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और माँ के साथ ही गर्भस्थ शिशु में ऑक्सीजन लेवल की जांच कराएं।

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