सर्दियों में बच्चों को उबटन लगाना होता है फायदेमंद

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सर्दियों में बच्चों को उबटन लगाना होता है फायदेमंद

नवजात शिशु की देखभाल में मालिश करना भी शामिल है। अपने यहां बरसों से बच्चे की मालिश की जाती है। घर की बुजुर्ग औरतें बड़े शौक से बच्चे की मालिश करती हैं। इसके लिए वे खुद अपने हाथों से नवजात शिशु के लिए उबटन बनाती हैं और बच्चे को लगाती हैं। उत्तर भारत में हर बच्चे की मालिश सरसों के बुकवा (उबटन) से की जाती है शिशु की मॉडर्न मां चाहे कितनी ही नाक-भौं सिकोड़े। गांव-कस्बों में आज भी जच्चा-बच्चा की मालिश सरसों के बुकवा (उबटन) से करने का रिवाज है। यही नहीं इसके लिए निपुण मालिश वाली को बुलाया जाता है जो कम-से-कम सवा महीने जच्चा-बच्चा की मालिश और स्नान कराती है और बदले में मोटा नेग वसूलती है। घरवाले भी जिसे देने में कभी आना-कानी नहीं करते हैं।

बेबीचक्रा के इस लेख में आइए देखते हैं कि सरसों का उबटन और दूसरे उबटन बनाने की विधि और उनके फायदे-

छवि स्त्रोत: freepik.com

सरसों का उबटन - Mustard ubtan

सरसों को बीन कर-धोकर धूप में सुखा लिया जाता है। फिर इसे कड़ाही में अच्छी तरह भूना जाता है। ठंडा होने पर इसे सिल पर पीसा जाता है। आजकल सिल-बट्टा हर घर में नहीं होता तो मिक्सर में पीसा जाता है। बच्चे को लगाने से पहले इसे हल्का सा गरम कर लिया जाता है। अगर ठोड़ा पतला करना हो तो इसमें अपनी इच्छानुसार पहले से गरम करके ठंडा किया हुआ सरसों, तिल या नारियल का तेल भी डाला जा सकता है।


गेहूं के चोकर का उबटन - Wheat Bran Ubtan

आटे को छानने के बाद जो चोकर बचता है उसमें मलाई और हल्दी डालकर उबटन बनाया जाता है। जिन बच्चों को सरसों का उबटन नहीं लगा सकते उन्हें इससे काम चलाया जाता है। यह त्वचा के अतिरिक्त रोएं निकालता है।


बेसन का उबटन - Gram Flour Ubtan

बेसन को छानकर उसमें मलाई वाला दूध, हल्दी मिलाकर बनाया जाता है। बड़े होने पर कुछ बच्चे सरसों का उबटन पसंद नहीं करते तो उन्हें बेसन का उबटन लगाया जाता है। इच्छानुसार इसमें गुलाबजल भी डाला जा सकता है।


मेथी का उबटन - Fenugreek Ubtan

मेथी के दानों को भून कर पीस लिया जाता है। इसमें थोड़ा दूध और नारियल तेल डालकर पेस्ट बना लिया जाता है। यह उन बच्चों को लगाया जाता है जिनके शरीर पर अतिरिक्त बाल होते हैं।


उबटन से मालिश करने का तरीका- How To Massage With Ubtan

उबटन से मालिश करना सदियों से चला आ रहा है। इससे कोई नुकसान नहीं होता जब तक कि बच्चे को स्किन एलर्जी या कोई बीमारी न हो। फिर भी बच्चे को एक बार एलर्जी टेस्ट करके देख लेना चाहिए। अगर बच्चे को कोई एलर्जी नहीं दिखाई देती है तो उसे उबटन से मालिश की जा सकती है।

  • शुरुआत में बच्चे को पतला घोल बना कर उबटन से मालिश करें। अगर उसे सूट करता है तो धीरे-धीरे उबटन को गाढ़ा करती जाएं।
  • सबसे पहले बैठ जाएं और पैरों को आगे फैला लें। अब अपनी जांघों पर बच्चे को पेट के बल आड़ा लिटा दें। और धीरे-धीरे उबटन लगाती जाएं जिससे कि बच्चा सहज हो सके। पहले पीठ पर फिर उसके पैरों पर उबटन लगा कर हल्के हाथों से मसाज करें। आपके हाथों और हवा के कारण उबटन धीरे-धीरे सूखने लगेगा और आप उसे रगड़ कर झाड़ दें।
  • अब बच्चे को सीधा करके पैरों पर लिटा कर उबटन लगाएं। मसाज करते-करते इसे भी रगड़ कर झाड़ दें।
  • उबटन के बाद राई के तेल (पहले से गरम करके ठंडा किया हुआ) से भी मालिश की जाती है।
  • मालिश करने के बाद बच्चे को हाथ-पैरों की हल्की कसरत भी कराई जाती है।
  • बच्चे के सिर में राई के तेल से हलके हाथों से मसाज किया जाता है। बच्चे सिर के कोमल तालू में केवल तेल रख कर छोड़ दिया जाता है। जिसे तालू अपने आप सोख लेता है।
  • उबटन के फायदे के लिए मालिश के बाद उसे थोड़ी देर धूप दिखानी चाहिए। इस समय उसे कॉटन के दुपट्टे से ढक देना चाहिए ताकि टैनिंग न हो। 10-15 मिनट बाद बच्चे को स्तनपान करा के, डकार दिला के और उसे कॉटन के कपड़े में अच्छी तरह लपेट कर सुला देना चाहिए।
  • बच्चा जब सोकर उठे तब उसे नहलाना चाहिए।
  • बच्चे की मालिश करते समय उससे बातें भी करनी चाहिए जिससे उसे यह मजेदार लगेगा। पहले तो बच्चे को मालिश करते हुए लोकगीत गाया जाता था जिसे ‘अपटोनी’ कहते हैं।


उबटन की मालिश के फायदे

  • उबटन की मालिश से बच्चे के शरीर का रक्त संचार बढ़ता है और उसके शरीर का विकास तेजी से होता है।
  • बच्चे के शरीर की थकी हुई मांसपेशियों को आराम मिलता है। शरीर का दर्द और तनाव दूर होता है और वे सुकून की नींद सोते हैं।
  • नवजात शिशु के लिए उबटन इस्तेमाल करने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। बच्चे की त्वचा में निखार आता है जो उसकी उम्र भर बना रहता है।
  • उबटन के फायदे ये भी हैं कि तेल और धूप के कारण हड्डियां मजबूत होती हैं।
  • छोटे बच्चों के शरीर से अनचाहे बालों को हटाने के लिए उपयोगी है और त्वचा का रूखापन दूर होता है।
  • मेडिकल साइंस का मानना है कि मालिश बच्चों के डायबिटीज़ रोग में कारगर है।
  • इससे हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस का मुकाबला करने के लिए प्रतिरोध शक्ति बढ़ती है।
  • बच्चे के बड़े होने तक उबटन की मालिश की जा सकती है।

तो इस लेख में आपने जाना कि नवजात शिशु के लिए उबटन कितना फायदेमंद हो सकता है। उबटन बनाने की विधि और उबटन के फायदे भी आप लेख में सरल तरीके से जान चुके हैं, उम्मीद करते हैं कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। उबटन और मालिश के पारम्परिक तरीकों को शिशु पर तभी आजमाएं, जब उनको स्किन से जुड़ी कोई समस्या न हो। शिशु को प्रशिक्षित व्यक्ति ही मालिश दे तो अच्छा रहता है क्योंकि वो नाजुक होते हैं। ऐसी ही अन्य उपयोगी जानकारी के लिए हमारे दूसरे आर्टिकल भी पढ़े।

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